टॉप-3 स्टार्टअप राज्यों में जगह बनाएगा UP? योगी सरकार ने बनाया बड़ा प्लान

उत्तर प्रदेश सरकार नई स्टार्टअप पॉलिसी के जरिए युवाओं और नए कारोबारियों के लिए बड़ा रास्ता खोलने की तैयारी में है। राज्य को देश के टॉप स्टार्टअप हब में लाने के लिए कई अहम लक्ष्य तय किए गए हैं।

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In Short

  • योगी सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश के टॉप-3 स्टार्टअप राज्यों में शामिल करना है।
  • सरकार की योजना 10,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स, 100 इनक्यूबेटर्स और 8 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तैयार करने की है।
  • स्टार्टअप शुरू करने वालों को हर महीने ₹17,500, प्रोडक्ट बनाने के लिए ₹5 लाख और उसे बाजार में उतारने के लिए ₹7.5 लाख तक की मदद मिलेगी।

By Gaurav Kumar:

Yogi Government Startup Plan: उत्तर प्रदेश सरकार नई स्टार्टअप पॉलिसी के जरिए राज्य में कारोबार शुरू करने वाले युवाओं के लिए बड़ा माहौल तैयार कर रही है। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश के टॉप-3 स्टार्टअप राज्यों में शामिल करना है। इसके लिए 10,000 से ज्यादा स्टार्टअप्स, 100 इनक्यूबेटर्स और 8 आधुनिक सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस तैयार करने की योजना बनाई गई है।

यह पॉलिसी यूपी आईटी और स्टार्टअप पॉलिसी 2016 और 2017-22 में दिए गए स्टार्टअप से जुड़े नियमों को आगे बढ़ाती है।

हर जिले में खुलेगा इनक्यूबेटर

नई पॉलिसी के तहत उत्तर प्रदेश के हर जिले में कम से कम एक इनक्यूबेटर शुरू करने या किसी मौजूदा इनक्यूबेटर को सहयोग देने का लक्ष्य है। पूरे राज्य में कुल 100 इनक्यूबेटर्स बनाए जाएंगे।

सरकार कम से कम 10 लाख वर्ग फुट का इनक्यूबेशन और एक्सेलेरेशन स्पेस तैयार करना चाहती है। इसके अलावा लखनऊ में देश का सबसे बड़ा इनक्यूबेटर स्थापित करने की भी योजना है। राज्य में 8 सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे, जहां नए कारोबारों को आधुनिक सुविधाएं और जरूरी सहयोग मिलेगा।

स्टार्टअप्स को ₹17,500 से ₹7.5 लाख तक मदद

आइडिया स्टेज पर मौजूद स्टार्टअप्स को एक साल तक हर महीने 17,500 रुपये का सस्टेनेंस अलाउंस दिया जाएगा। एक इनक्यूबेटर से हर साल अधिकतम 25 स्टार्टअप्स को यह मदद मिल सकेगी।

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मिनिमम वायबल प्रोडक्ट यानी एमवीपी तैयार करने के लिए 5 लाख रुपये तक का प्रोटोटाइप ग्रांट मिलेगा। प्रोडक्ट को बाजार में उतारने के लिए प्रत्येक स्टार्टअप को 7.5 लाख रुपये तक की सीड कैपिटल या मार्केटिंग सहायता दी जाएगी।

पेटेंट और इवेंट का खर्च भी मिलेगा

भारतीय पेटेंट फाइल कराने पर 2 लाख रुपये और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए 10 लाख रुपये तक का खर्च वापस मिल सकता है। राष्ट्रीय स्तर के इवेंट में हिस्सा लेने पर 50,000 रुपये और अंतरराष्ट्रीय इवेंट के लिए 1 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी।

महिला, ट्रांसजेंडर या दिव्यांग को-फाउंडर की हिस्सेदारी 26 फीसदी से ज्यादा होने पर सस्टेनेंस अलाउंस और सीड कैपिटल में 50 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के को-फाउंडर वाले स्टार्टअप्स को भी यह सुविधा दी जाएगी।

इनक्यूबेटर्स को एक करोड़ तक ग्रांट

इनक्यूबेटर्स को टेक्नोलॉजी सुविधाओं के लिए 1 करोड़ रुपये तक का कैपिटल ग्रांट मिलेगा। पूर्वांचल और बुंदेलखंड में यह राशि 1.25 करोड़ रुपये तक होगी। हर साल 30 लाख रुपये तक ऑपरेशनल सपोर्ट भी दिया जा सकता है।

कम से कम 12 हफ्तों का एक्सेलेरेशन प्रोग्राम चलाने वाले संस्थानों को प्रति स्टार्टअप 1 लाख रुपये तक का मैचिंग ग्रांट मिलेगा। एक प्रोग्राम के लिए अधिकतम सहायता 10 लाख रुपये तय की गई है।

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