कमजोर मानसून और महंगी ऊर्जा के बावजूद भारत की रफ्तार रहेगी तेज, वर्ल्ड बैंक ने बढ़ाया ग्रोथ अनुमान
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर वर्ल्ड बैंक ने बड़ा अनुमान जारी किया है। कमजोर मानसून और महंगी ऊर्जा की चुनौती के बावजूद बैंक ने भारत की ग्रोथ पर भरोसा बढ़ाया है। मजबूत घरेलू मांग, इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर अर्थव्यवस्था को कितनी रफ्तार देंगे, जानिए रिपोर्ट में क्या कहा गया है।

In Short
- वर्ल्ड बैंक ने भारत की FY27 GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% किया।
- मजबूत घरेलू मांग, इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर से अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने की उम्मीद।
- महंगी ऊर्जा और कमजोर मानसून के बावजूद भारत की आर्थिक ग्रोथ मजबूत रहने का अनुमान।
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर वर्ल्ड बैंक ने अपना अनुमान बढ़ा दिया है। वर्ल्ड बैंक का कहना है कि कमजोर मानसून और महंगी ऊर्जा के बावजूद इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा देगी। बैंक ने मार्च 2027 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष के लिए भारत की आर्थिक ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड बैंक का नया अनुमान पहले के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक ज्यादा है। यह अनुमान RBI के 6.7% के मौजूदा अनुमान से भी ऊपर है। RBI के ग्रोथ अनुमान में भी बुधवार को बदलाव होने की उम्मीद है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए RBI से करीब चार साल में पहली बार ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है।
घरेलू मांग बनी अर्थव्यवस्था की ताकत
वर्ल्ड बैंक की दक्षिण एशिया की चीफ इकोनॉमिस्ट फ्रांजिस्का ओन्सोर्गे ने कहा कि भारत में घरेलू मांग काफी मजबूत बनी हुई है। उनके मुताबिक यह मजबूती किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं है। निजी और सरकारी खर्च के साथ निवेश और खपत में भी मजबूती देखने को मिल रही है।
वर्ल्ड बैंक का भारत पर नया अनुमान दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था को लेकर सामने आए ज्यादा सकारात्मक आकलनों की कड़ी में एक और अनुमान है।
पूर्वी एशिया में एनर्जी शॉक का खतरा
वर्ल्ड बैंक ने मंगलवार को जारी अपनी ईस्ट एशिया एंड पैसिफिक इकोनॉमिक अपडेट में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को लेकर भी चेतावनी दी है। बैंक का कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक कीमतें बढ़ने के बाद इस क्षेत्र की सरकारों ने दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा आक्रामक कदम उठाए हैं और सब्सिडी पर ज्यादा निर्भरता दिखाई है।
वर्ल्ड बैंक के मुताबिक यह तरीका लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकता। बैंक का अनुमान है कि मिडिल ईस्ट से तेल निर्यात 2027 के मध्य तक संघर्ष से पहले के स्तर पर नहीं लौटेगा। इंडोनेशिया, थाईलैंड और वियतनाम ने रिटेल पेट्रोल की कीमतों को दबाने के लिए कदम उठाए हैं। इस साल इनके डॉलर भंडार में 15% से 40% तक की कमी आई है।
AI से मिल रहा ग्रोथ को सहारा
फिलहाल वर्ल्ड बैंक के मुताबिक ऊर्जा से जुड़े जोखिमों पर ‘AI टेलविंड्स’ भारी पड़ रहे हैं। बैंक ने ईस्ट एशिया और पैसिफिक की इस साल की ग्रोथ का अनुमान 0.3 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 4.5% कर दिया है। इसकी बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बूम से जुड़ा मजबूत निवेश और एक्सपोर्ट है। अगले साल के लिए 4.4% ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखा गया है।
हालांकि, वर्ल्ड बैंक ने चेतावनी दी कि अगर एनर्जी शॉक लंबे समय तक रहता है और इसके साथ AI साइकिल में गिरावट तथा अल नीनो के कारण मौसम में रुकावट आती है, तो आर्थिक मजबूती पर दबाव बढ़ सकता है। महंगी ऊर्जा का असर मैन्युफैक्चरिंग पर पहले ही दिखाई दे रहा है, जबकि ट्रांसपोर्ट की बढ़ती कीमतों ने कंज्यूमर डिमांड को प्रभावित किया है।