शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी के लिए खत्म होगा कैपिटल गेन टैक्स? Edelweiss के चेयरमैन ने उठाई मांग
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी को लेकर कैपिटल गेन टैक्स हटाने की मांग तेज हो गई है। Edelweiss के चेयरमैन रशेश शाह ने सरकार को बड़ा सुझाव दिया है। इस बीच विदेशी निवेश के आंकड़ों में भी बदलाव दिख रहा है। जानिए बाजार पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

In Short
- Edelweiss के चेयरमैन रशेश शाह ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए टैक्स हटाने का सुझाव दिया।
- इस साल 28 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी के बावजूद पिछले तीन हफ्तों में 5 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश आया।
- ग्रुप अगले 18 से 24 महीनों में अपने एसेट मैनेजमेंट बिजनेस का IPO लाने की तैयारी कर रहा है।
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी तेज करने के लिए कैपिटल गेन टैक्स हटाने की मांग बढ़ रही है। अब Edelweiss Financial Services के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रशेश शाह ने भी इस मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि अगर भारत विदेशी निवेशकों को लंबे समय तक अपने बाजार से जोड़े रखना चाहता है, तो सरकार को उनके लिए कैपिटल गेन टैक्स हटाने पर विचार करना चाहिए। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को मुंबई मेंब्लूमबर्ग टेलीविजन की मेनका दोशी और हसलिंडा अमीन को दिए इंटरव्यू में रशेश शाह ने कहा कि भारत को विदेशी निवेशकों को यह संदेश देना चाहिए कि देश उनका निवेश चाहता है।
विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स हटाने की मांग क्यों?
रशेश शाह ने कहा कि अगर भारत चाहता है कि विदेशी निवेशक दोबारा लौटें और भारतीय बाजार में लंबे समय तक पैसा लगाएं, तो कैपिटल गेन टैक्स हटाना एक आसान रास्ता हो सकता है।
फिलहाल भारत में एक साल से ज्यादा समय तक रखे गए लिस्टेड शेयरों पर होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5% टैक्स लगता है। वहीं शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर 20% टैक्स लगाया जाता है।
इस हफ्ते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा था कि वह शेयर बाजार से जुड़े टैक्स में बदलाव पर विचार करेंगी। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि सरकार कैपिटल गेन टैक्स या ट्रांजैक्शन टैक्स में बदलाव करने की योजना बना रही है या नहीं।
विदेशी निवेशकों ने निकाले 28 अरब डॉलर
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 28 अरब डॉलर से ज्यादा निकाल चुके हैं।
हालांकि पिछले तीन हफ्तों में तस्वीर बदली है। ग्लोबल AI कंपनियों के शेयरों में बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 5 अरब डॉलर से ज्यादा लगाए हैं। इससे घरेलू बाजार में करीब 10% की रिकवरी देखने को मिली है।
हर साल 80 अरब डॉलर तक आ सकता है घरेलू निवेश
रशेश शाह के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बड़ी चुनौतियां हैं। हालांकि घरेलू निवेश बाजार को सहारा दे रहा है।
उनका अनुमान है कि म्यूचुअल फंड हर साल 40 से 50 अरब डॉलर और बीमा कंपनियां तथा पेंशन फंड 20 से 25 अरब डॉलर का निवेश कर सकते हैं। इस तरह सालाना घरेलू निवेश करीब 60 से 80 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
Edelweiss भी IPO लाने की तैयारी में
रशेश शाह ने बताया कि Edelweiss ग्रुप अगले 18 से 24 महीनों में अपने एसेट मैनेजमेंट बिजनेस का IPO लाने की योजना बना रहा है।
Edelweiss Mutual Fund फिलहाल 1.8 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति मैनेज करता है। इसमें अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी कंपनी WestBridge Capital प्रमुख निवेशक है।
वहीं ग्रुप की कंपनी EAAA India Alternatives ने 1,200 करोड़ रुपये के IPO के बाद इसी हफ्ते शेयर बाजार में कारोबार शुरू किया है। शाह के मुताबिक, ग्रुप भविष्य में अपने इंश्योरेंस और एसेट मैनेजमेंट सहित सभी प्रमुख बिजनेस को शेयर बाजार में लिस्ट कराना चाहता है।