दिल्ली-मुंबई नहीं, अब Tier 2 शहरों में आ रही प्रॉपर्टी की बूम - एक्सपर्ट से जानिए कारण
भारत के टियर 2 शहरों में हाउसिंग मार्केट तेजी से बदल रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ते शहरी विस्तार ने इन शहरों को नई पहचान दी है। आखिर क्यों छोटे शहर अब रियल एस्टेट के बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं और इसका असर बाजार पर कैसे पड़ेगा, जानिए।

In Short
- टियर 2 शहरों में बढ़ती हाउसिंग डिमांड अब सिर्फ कैच-अप फेज नहीं, बल्कि बड़ा बदलाव दिखा रही है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, एक्सप्रेसवे और मेट्रो नेटवर्क छोटे शहरों के रियल एस्टेट विकास को गति दे रहे हैं।
- लखनऊ, कोयंबटूर और विशाखापत्तनम जैसे शहर प्रॉपर्टी मार्केट में तेजी से उभर रहे हैं।
भारत के टियर 2 शहरों में तेजी से बढ़ता हाउसिंग मार्केट अब सिर्फ कोरोना के बाद आई रिकवरी या कम कीमतों से जुड़ा कैच-अप फेज नहीं रह गया है। बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Knight Frank India की नेशनल डायरेक्टर रिसर्च - अंकिता सूद ने कहा कि छोटे शहरों में रियल एस्टेट की बढ़ती रफ्तार देश के प्रॉपर्टी मार्केट में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाती है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या टियर 2 शहरों में तेजी सिर्फ बड़े शहरों की बराबरी करने की कोशिश है या कोई स्थायी बदलाव, तो उन्होंने कहा कि यह दोनों है। उनके मुताबिक यह ट्रेंड काफी हद तक स्ट्रक्चरल बदलाव को दिखाता है, हालांकि छोटे शहर अभी भी बड़े महानगरों से अंतर कम कर रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर बना रियल एस्टेट ग्रोथ का बड़ा आधार
अंकिता सूद ने बताया कि इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण देश में तेजी से हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास है। पिछले 10 सालों में इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश दोगुना हुआ है। वहीं एक्सप्रेसवे नेटवर्क में तेजी आई है और अब करीब 26 शहरों में मेट्रो नेटवर्क भी पहुंच चुका है।
सड़क, मेट्रो और बेहतर कनेक्टिविटी ने छोटे शहरों में रहने और निवेश की संभावनाओं को बढ़ाया है। बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम से यात्रा का समय कम हुआ है और ऐसे शहरों में भी विकास के नए अवसर बने हैं।
कनेक्टिविटी से खुल रहे नए रियल एस्टेट मार्केट
रियल एस्टेट बाजार अकेले नहीं चलता, बल्कि इसके लिए बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी होता है। सूद के मुताबिक, कनेक्टिविटी विकास को आगे बढ़ाती है। सड़क और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के विस्तार से छोटे शहरों में आर्थिक गतिविधियां और आवासीय मांग दोनों बढ़ रही हैं।
यही वजह है कि टियर 2 शहरों में हाउसिंग डिमांड अब केवल सस्ते विकल्प के तौर पर नहीं देखी जा रही, बल्कि इसे शहरों के विकास के साथ जुड़ी लंबी अवधि की मांग के रूप में देखा जा रहा है।
कम कीमतों से शुरू हुई थी पकड़, अब बढ़ रही रफ्तार
टियर 2 शहरों में कैच-अप फेज भी अभी जारी है। कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें शुरुआत में बड़े महानगरों की तुलना में कम थीं, जिससे उनमें बढ़ोतरी की ज्यादा गुंजाइश बनी। इसके साथ ही बढ़ती आबादी और लोगों की बदलती जीवनशैली की उम्मीदों ने भी मांग को मजबूत किया है।
नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में कई उभरते शहरों में रेजिडेंशियल प्राइस ग्रोथ महानगरों से ज्यादा रही है। लखनऊ, कोयंबटूर और विशाखापत्तनम जैसे शहर अब प्रॉपर्टी मार्केट में तेजी से चर्चा में आ रहे हैं।
भारत का हाउसिंग मार्केट हो रहा ज्यादा डाइवर्स
टियर 2 शहरों की बढ़ती भूमिका यह संकेत देती है कि भारत का हाउसिंग मार्केट अब सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है। डेवलपर्स, निवेशकों और होमबायर्स के लिए छोटे शहरों का महत्व बढ़ रहा है।
अगर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा विकास आगे भी आर्थिक गतिविधियों में बदलता रहा, तो टियर 2 शहर आने वाले समय में भारत के रियल एस्टेट विस्तार का अहम हिस्सा बन सकते हैं।