तेल का बड़ा खिलाड़ी रूस अब भारत से खरीद रहा पेट्रोल, आखिर क्यों आई ऐसी नौबत?

दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल रूस अब भारत से पेट्रोल खरीद रहा है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद रूस की रिफाइनरियों पर दबाव बढ़ा है, जिससे घरेलू ईंधन सप्लाई प्रभावित हुई। ऐसे में मॉस्को भारत समेत कई देशों से पेट्रोल आयात कर अपनी जरूरत पूरी करने की कोशिश कर रहा है।

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In Short

  • रूस को भारत की नायरा एनर्जी से करीब 42,000 टन पेट्रोल की पहली खेप मिली।
  • यूक्रेनी ड्रोन हमलों से रूस की कई रिफाइनरियों की क्षमता प्रभावित हुई है।
  • रूस घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए हर महीने करीब 4 लाख टन पेट्रोल आयात करने की तैयारी में है।

By Gaurav Kumar:

India Russia Oil Trade: रूस को दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में गिना जाता है, लेकिन अब उसकी जरूरतें बदलती नजर आ रही हैं। देश में पेट्रोल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रूस ने भारत से रिफाइंड पेट्रोल खरीदना शुरू किया है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूस की कई रिफाइनरियों के प्रभावित होने से घरेलू ईंधन उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है।

भारत की नायरा एनर्जी से रूस पहुंची पेट्रोल की पहली खेप

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से रूस पहुंची पहली पेट्रोल खेप करीब 42,000 टन की थी। यह सप्लाई गुजरात के वाडिनार स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी से भेजी गई। जानकारी के अनुसार, पेट्रोल लेकर निकला टैंकर 18 जून को वाडिनार से रवाना हुआ था। बाद में मिस्र के डेमियेटा पोर्ट पर इसे दूसरे जहाज में ट्रांसफर किया गया और अगस्त की शुरुआत में यह रूस पहुंचा।

5 अगस्त को इस खेप के रूस पहुंचने की जानकारी सामने आई। नायरा एनर्जी में रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की करीब 49 फीसदी हिस्सेदारी है। इसलिए भारत से रूस को पेट्रोल भेजे जाने की यह घटना दोनों देशों के ऊर्जा व्यापार में एक अलग बदलाव के तौर पर देखी जा रही है।

जुलाई में भी भारत से गईं पेट्रोल की कई खेप

भारत और रूस के बीच पेट्रोल सप्लाई सिर्फ एक खेप तक सीमित नहीं रही। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में भी वाडिनार से पेट्रोल लेकर कम से कम दो और टैंकर रवाना हुए। इनमें से कुछ खेपों को मिस्र के बंदरगाहों पर दूसरे जहाजों में भेजा गया।

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रिफाइनिंग सेक्टर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जुलाई में भारत से रूस के लिए करीब 60,000 टन पेट्रोल भेजे जाने की जानकारी सामने आई। वहीं एक अन्य जानकारी के मुताबिक, जुलाई में 30,000 से 40,000 टन पेट्रोल रूस पहुंचा।

रिफाइनरियों पर हमलों से बिगड़ा रूस का ईंधन संतुलन

रूस में पेट्रोल की मांग बढ़ने की मुख्य वजह वहां की रिफाइनिंग क्षमता पर पड़ा असर है। यूक्रेन की ओर से किए गए ड्रोन हमलों ने रूस की कई महत्वपूर्ण रिफाइनरियों और प्रोसेसिंग यूनिट को नुकसान पहुंचाया है।

2026 में इन हमलों की संख्या बढ़ने के बाद रूस की ईंधन उत्पादन क्षमता पर दबाव और बढ़ गया। ओम्स्क, रियाजान और ओर्स्क जैसी जगहों की रिफाइनिंग सुविधाएं भी इन हमलों से प्रभावित हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से मई के बीच यूक्रेन ने रूस की कम से कम 16 रिफाइनरियों को निशाना बनाया।

रूस की रिफाइनिंग क्षमता 2005 के बाद सबसे कमजोर स्तर पर

रूस में कम होती रिफाइनिंग का असर कच्चे तेल के प्रोसेसिंग आंकड़ों में भी दिखा। एनर्जी एस्पेक्ट्स के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई की शुरुआत में रूस की रिफाइनरियों में रोजाना करीब 3.91 मिलियन बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस किया गया।

यह आंकड़ा पिछले साल के औसत से करीब 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन कम था। इसे मार्च 2005 के बाद रूस का सबसे निचला रिफाइनिंग स्तर बताया गया है। उत्पादन घटने से घरेलू बाजार में पेट्रोल की उपलब्धता पर असर पड़ा।

पेट्रोल निर्यात रोकने के बाद भी बढ़ी जरूरत

घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता देते हुए रूस ने पेट्रोल निर्यात पर रोक को 2026 के अंत तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके अलावा डीजल निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।

इसके बावजूद रूस और उसके नियंत्रण वाले क्रीमिया के कुछ इलाकों में पेट्रोल की कमी और राशनिंग जैसी स्थिति सामने आई। गर्मियों में रूस में पेट्रोल की खपत करीब 1.10 लाख टन प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।

हर महीने 4 लाख टन पेट्रोल आयात करने की तैयारी

रूस अब अपनी जरूरत पूरी करने के लिए हर महीने करीब 4 लाख टन पेट्रोल आयात करने की योजना बना रहा है। भारत के अलावा बेलारूस और कजाखस्तान से भी रूस को पेट्रोल सप्लाई मिल रही है।

बेलारूस से जून के पहले हिस्से में रेल के जरिए 70,000 टन से ज्यादा पेट्रोल रूस पहुंचा था। वहीं भारत से आने वाली समुद्री सप्लाई को रूस के घरेलू ईंधन बाजार में बढ़ते दबाव का संकेत माना जा रहा है।

भारत और रूस के ऊर्जा रिश्तों में नया बदलाव

यह पूरा मामला इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर रूस भारत को कच्चा तेल बेचता है, लेकिन अब भारत से रिफाइंड पेट्रोल खरीद रहा है। जुलाई में भारत ने रूस से करीब 2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया था।

यह स्थिति बताती है कि किसी देश के पास बड़ी मात्रा में कच्चा तेल होना और अपनी जरूरत के हिसाब से पेट्रोल तैयार कर पाना अलग-अलग बातें हैं। रूस के मामले में रिफाइनिंग क्षमता पर असर ने उसे पेट्रोल आयात करने की स्थिति में ला दिया है, जबकि भारत अपनी बड़ी रिफाइनिंग क्षमता के कारण इस सप्लाई में अहम भूमिका निभा रहा है।
 

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