कच्चे तेल की कीमतें गिरीं! क्या देश में सस्ता होगा पेट्रोल और डीजल? जानिए केंद्रीय राज्यमंत्री ने क्या कहा
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत कम हो जाने चाहिए अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता हो जाए? फिर ऐसा क्यों होता है कि आम लोगों को राहत मिलने में समय लग जाता है? और क्या इसके पीछे सप्लाई चेन और वैश्विक हालात जिम्मेदार हैं? इन्हीं सवालों पर केरल के त्रिशूर में केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने अहम बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि क्रूड की कीमत घटने के बावजूद ईंधन दरों में तुरंत कटौती संभव नहीं है। पढ़ें पूरी स्टोरी।

In Short
- पेट्रोल-डीज़ल की क्यों नहीं होंगी कीमत कम?
- केंद्रीय मंत्री ने कहा नहीं होगा पेट्रोल-डीजल सस्ता
- क्रूड गिरा लेकिन कीमतें नहीं घटेंगी? जानें कारण
- सरकार ने ईंधन पर ₹12,000 करोड़ का भार झेला
केरल के त्रिशूर में गुरुवार को केंद्रीय राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें घटने के बावजूद ईंधन दरों में तुरंत कमी संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि तेल की सप्लाई चेन, परिवहन और वैश्विक परिस्थितियों के कारण कीमतों का असर तुरंत भारत तक नहीं पहुंचा है।
त्रिशूर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि हालिया ईंधन मूल्य वृद्धि में करीब ₹3.94 प्रति लीटर का असर देखने को मिला है, लेकिन इसे सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की गिरावट के आधार पर तुरंत वापस नहीं लिया जा सकता। उन्होंने साफ कहा कि सस्ता क्रूड भारत तक पहुंचने में समय लगता है और यह प्रक्रिया कई स्तरों पर निर्भर करती है।
पेट्रोल-डीजल की क्यों नहीं होंगी कीमत कम?
मंत्री ने बताया कि तेल की सप्लाई मिडिल ईस्ट से होकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत आती है, जहां शिप ट्रैफिक और वैश्विक हालात के कारण सप्लाई सामान्य होने में समय लग सकता है। उनके मुताबिक, फरवरी में पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद तेल कंपनियों पर बड़ा असर पड़ा और सरकार ने इसका काफी हद तक बोझ खुद उठाया।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने अब तक करीब ₹12,000 करोड़ का नुकसान झेला है ताकि आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर कम किया जा सके। साथ ही उन्होंने राज्यों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई राज्यों ने एक्साइज ड्यूटी कम करके कीमतों में राहत नहीं दी है। इसी बातचीत में केरल में AIIMS स्थापना को लेकर भी उन्होंने प्रक्रिया की बात की। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को तय प्रक्रिया के तहत साइट्स की जानकारी देनी होगी और फिर चयन को लेकर चर्चा होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह काम बाजार से खरीदारी करने जैसा नहीं है।