बिजनेस में क्यों जरूरी है कॉन्शियस लीडरशिप? 'ईगल माइंड' से कैसे बदल सकती है लीडर्स की सोच
बिजनेस में बेहतर लीडरशिप के लिए सिर्फ प्रॉफिट और स्ट्रैटेजी काफी नहीं है। कॉन्शियस लीडरशिप में क्लैरिटी, बड़ी तस्वीर देखने और चुनौतियों को अवसर में बदलने की सोच पर जोर दिया गया है। 'ईगल माइंड' के जरिए समझाया गया कि यह तरीका बिजनेस परफॉर्मेंस और इनोवेशन को कैसे प्रभावित कर सकता है।

आज के बिजनेस वर्ल्ड में लीडरशिप सिर्फ कंपनी की कमाई बढ़ाने या टीम को मैनेज करने तक सीमित नहीं है। तेजी से बदलते बाजार और लगातार सामने आ रही चुनौतियों के बीच ऐसे लीडर्स की जरूरत बढ़ रही है, जो बड़ी तस्वीर देख सकें और मुश्किल हालात में बेहतर फैसले ले सकें। इसी सोच को कॉन्शियस लीडरशिप से जोड़ते हुए बताया गया कि यह बिजनेस की परफॉर्मेंस से लेकर इनोवेशन तक में अहम भूमिका निभा सकती है।
क्या है कॉन्शियस लीडरशिप?
कॉन्शियस लीडरशिप को समझने के लिए सबसे पहले कॉन्शियसनेस यानी चेतना को समझना जरूरी है। बातचीत में इसे उस स्थिति से जोड़ा गया, जहां से इंसान सोचता है और उसी सोच के आधार पर अपनी वास्तविकता और फैसले तैयार करता है।
योग, चलना और सांस के जरिए अपने भीतर जाने जैसी प्रैक्टिस को मन में ज्यादा क्लैरिटी लाने का तरीका बताया गया। इसका मकसद ऐसी मानसिक स्थिति तक पहुंचना है, जहां व्यक्ति अपने विचारों को बेहतर तरीके से समझ सके और उनमें बदलाव ला सके।
'ईगल माइंड' से समझाया लीडरशिप का मतलब
लीडर की सोच को समझाने के लिए चिड़ियों का उदाहरण दिया गया। कहा गया कि हमारा मन गौरैया या कौवे की तरह सीमित दायरे में देख सकता है या फिर ईगल यानी बाज की तरह ऊपर से पूरी तस्वीर देख सकता है।
जो लीडर किसी स्थिति को ऊपर से देखकर उसके अलग-अलग पहलुओं को समझ पाता है, वह स्वाभाविक रूप से बेहतर तरीके से नेतृत्व कर सकता है। ऐसी सोच चुनौतियों को सिर्फ परेशानी की तरह देखने के बजाय उनमें नए मौके तलाशने में मदद कर सकती है।
पीएम मोदी की लीडरशिप का दिया उदाहरण
बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लीडरशिप का भी उदाहरण दिया गया। वक्ता के मुताबिक भारत ने कई संकट और चुनौतियां देखी हैं, जिन्हें अवसर में बदलने की कोशिश की गई है। इसे उन्होंने 'योगिक लीडरशिप' से जोड़ा।
उनका कहना था कि इस तरह की लीडरशिप किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। हर व्यक्ति अपने अंदर ऐसी सोच विकसित कर सकता है और मुश्किल परिस्थितियों को ज्यादा व्यापक नजरिए से देख सकता है।
बिजनेस के छह हिस्सों पर पड़ सकता है असर
कॉन्शियसनेस को बिजनेस से जोड़ते हुए छह अहम हिस्सों की बात की गई। इनमें लीडरशिप और विजन, प्रोसेस, टीम स्पिरिट और ह्यूमन एलिमेंट, कस्टमर-क्लाइंट रिलेशनशिप और कम्युनिटी सर्विस जैसे पहलू शामिल हैं।
दावा किया गया कि इन क्षेत्रों में कॉन्शियसनेस को शामिल करने से काम करने का तरीका और उसके नतीजे बेहतर हो सकते हैं। इसका असर ज्यादा प्रॉफिटेबिलिटी, बेहतर कनेक्टिविटी और बड़े उद्देश्य के लिए काम करने के रूप में दिखाई दे सकता है।
इनोवेशन और स्ट्रैटेजी में भी मिल सकती है मदद
कॉन्शियस लीडरशिप का एक अहम फायदा सोचने की क्षमता को बेहतर बनाना बताया गया। जब लीडर 'ईगल माइंड' के साथ बड़ी तस्वीर देखता है, तो उसके लिए नई स्ट्रैटेजी बनाना और इनोवेटिव तरीके से सोचना आसान हो सकता है।
इसी सोच को विकसित भारत के लक्ष्य से भी जोड़ा गया। वक्ता के मुताबिक जब भारत दुनिया की ग्रोथ का एक प्रमुख इंजन बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब बिजनेस लीडर्स के लिए व्यापक सोच और उद्देश्य के साथ नेतृत्व करना ज्यादा अहम हो जाता है।