सस्ते फ्लैट्स से क्यों दूर हो रहे खरीदार? महंगी EMI के बीच प्रीमियम घरों की बढ़ी मांग
महंगी EMI और बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों के बावजूद भारतीय खरीदार अब सस्ते फ्लैट्स से दूरी बना रहे हैं। बड़े शहरों में प्रीमियम घरों की मांग तेजी से बढ़ी है, जबकि अफोर्डेबल हाउसिंग की बिक्री घटी है। आखिर घर खरीदने वालों की पसंद में इतना बड़ा बदलाव क्यों आया?

In Short
- ₹1.5 करोड़ से ₹3 करोड़ वाले घरों की बिक्री 58% बढ़कर 51,231 यूनिट हो गई।
- H1 2026 में ₹1 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल बिक्री में 71% रही।
- ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री 32% घटी, जबकि ₹50 लाख से ₹1 करोड़ वाले घरों में 20% गिरावट आई।
घर खरीदते समय लोगों की जरूरतें अब पहले जैसी नहीं रही हैं। पहले बजट और लोकेशन सबसे बड़ा फैसला करते थे, लेकिन अब खरीदार घर के साथ मिलने वाली सुविधाओं, खुले स्पेस, अच्छी कनेक्टिविटी और बेहतर रहने के माहौल पर भी ध्यान दे रहे हैं।
बढ़ती EMI और महंगी प्रॉपर्टी के बाद भी कई लोग छोटे या साधारण घर के बजाय ऐसा घर चुनना चाहते हैं, जो उनकी लाइफस्टाइल के हिसाब से बेहतर हो। खरीदारों की इसी बदलती पसंद ने हाउसिंग मार्केट की तस्वीर बदल दी है, लेकिन आखिर किस कीमत वाले घरों की बिक्री सबसे तेज बढ़ी?
₹1.5 से ₹3 करोड़ वाले घर सबसे ज्यादा बिके
JLL के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के दौरान देश के सात बड़े शहरों में 1,38,382 घरों की बिक्री हुई। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 3% ज्यादा है।
इस दौरान ₹1.5 करोड़ से ₹3 करोड़ कीमत वाले घरों की बिक्री सबसे तेज बढ़ी। इस कैटेगरी में 51,231 घर बिके, जो एक साल पहले के मुकाबले 58% ज्यादा हैं। वहीं, 2026 की पहली छमाही में कुल बिक्री में ₹1 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी बढ़कर 71% हो गई, जो H1 2025 में 62% थी। लेकिन जब महंगे घरों की मांग बढ़ रही है, तो कम कीमत वाले घरों की बिक्री का क्या हाल है?
सस्ते घरों की बिक्री में बड़ी गिरावट
प्रीमियम घरों की बढ़ती मांग के बीच कम कीमत वाले फ्लैट्स की बिक्री कमजोर हुई है। ₹50 लाख से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में 32% की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, ₹50 लाख से ₹1 करोड़ के बीच कीमत वाले घरों की बिक्री 20% कम हुई। कुल हाउसिंग सेल में ₹1 करोड़ से कम कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी घटकर 28% रह गई, जो एक साल पहले 39% थी। अब सवाल है कि देश के बड़े शहरों में घरों की बिक्री के मामले में कौन सबसे आगे रहा?
बेंगलुरु में सबसे ज्यादा घर बिके
बड़े शहरों में बेंगलुरु घरों की बिक्री के मामले में सबसे आगे रहा। यहां जनवरी से जून 2026 के बीच 35,017 घर बिके, जो पिछले साल की इसी अवधि से 16% ज्यादा हैं। वहीं, चेन्नई में बिक्री की रफ्तार सबसे तेज रही। यहां घरों की बिक्री 27% बढ़कर 8,587 यूनिट हो गई। दिल्ली-NCR में भी 7% की बढ़त के साथ 20,761 घर बिके।
दूसरी ओर, पुणे में घरों की बिक्री 14% घटी। हैदराबाद में 3% की कमी आई, जबकि मुंबई और कोलकाता में बिक्री 1-1% नीचे रही। कुल हाउसिंग सेल में बेंगलुरु, मुंबई, पुणे और दिल्ली-NCR की हिस्सेदारी करीब 76% रही। अब सवाल है कि खरीदारों की इस मांग को देखते हुए डेवलपर्स ने कितने नए घर लॉन्च किए?
डेवलपर्स ने बढ़ाई नए घरों की सप्लाई
2026 की पहली छमाही में डेवलपर्स ने 1,68,507 नए घर लॉन्च किए। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 9% ज्यादा है। इससे साफ है कि बिल्डर्स को घरों की मांग आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद है।
बेंगलुरु में नए घरों की लॉन्चिंग 41% बढ़कर 48,748 यूनिट हो गई। वहीं, मुंबई में नए प्रोजेक्ट्स की संख्या 18% और दिल्ली-NCR में 14% बढ़ी। लेकिन नए घरों की बढ़ती सप्लाई के बीच अलग-अलग शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें कितनी बढ़ीं?
कीमतों में 15% तक की तेजी
देश के सभी सात बड़े शहरों में घरों की कीमतें एक साल में 6% से 15% तक बढ़ीं। बेंगलुरु में कीमतों में सबसे ज्यादा 15% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, चेन्नई और कोलकाता में घर 13% तक महंगे हुए। इसकी बड़ी वजह कंस्ट्रक्शन कॉस्ट बढ़ना और प्रीमियम घरों की मांग मजबूत रहना बताया गया है।
JLL के मुताबिक, बेहतर सड़कें, मेट्रो और दूसरी सुविधाएं, शहरों का बढ़ना, लोगों की इनकम में सुधार और अच्छी कनेक्टिविटी के कारण आने वाले समय में भी घरों की मांग बनी रह सकती है। अप्रैल से जून के बीच बिक्री की रफ्तार थोड़ी धीमी रही,
लेकिन इसकी वजह मांग में कमी नहीं, बल्कि सीजनल असर और खरीदारों का फैसला लेने में ज्यादा समय लगाना बताया गया है।