जून में उम्मीद से ज्यादा बढ़ी थोक महंगाई! WPI 9.87% पर पहुंचा, खाने-पीने की चीजों और केमिकल्स ने बढ़ाया दबाव

जून में भारत की थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई, जो अनुमान से अधिक रही। खाद्य वस्तुओं, मिनरल ऑयल, बेसिक मेटल और केमिकल्स की कीमतों में तेजी इसकी मुख्य वजह रही। हालांकि फ्यूल और पावर समूह में महंगाई कुछ कम हुई, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव बना रहा।

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In Short

  • जून में भारत की थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% रही, जो अर्थशास्त्रियों के 9.15% के अनुमान से अधिक है।
  • खाद्य वस्तुओं, मिनरल ऑयल, बेसिक मेटल और केमिकल्स की कीमतों में तेजी से थोक महंगाई में उछाल आया।
  • फ्यूल और पावर महंगाई में कुछ राहत मिली, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कीमतों का दबाव लगातार बना हुआ है।

By Gaurav Kumar:

जून में भारत की थोक महंगाई (WPI) ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में थोक महंगाई बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई, जो मई में 9.68% थी। यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 9.15% के अनुमान और रॉयटर्स के सर्वे से भी ज्यादा रहा।

मंत्रालय के मुताबिक, महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य वस्तुओं, पेट्रोलियम उत्पादों वाले मिनरल ऑयल, बेसिक मेटल और केमिकल एवं केमिकल प्रोडक्ट्स की कीमतों में तेजी रही।

खाद्य महंगाई में सबसे तेज उछाल

जून में WPI फूड इंडेक्स बढ़कर 6.14% हो गया, जबकि मई में यह 4.49% था। प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई भी 4.99% से बढ़कर 7% पर पहुंच गई। इस दौरान खाद्य वस्तुओं की कीमतें महीने-दर-महीने 3.75% बढ़ीं। गैर-खाद्य वस्तुओं में 1.43% और मिनरल्स में 0.58% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। हालांकि कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 0.08% की मामूली गिरावट रही।

दूसरी ओर, फ्यूल और पावर समूह की महंगाई मई के 30.33% से घटकर जून में 27.41% रह गई। इस श्रेणी का सूचकांक महीने-दर-महीने 1.68% गिरा, जबकि बिजली की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

मैन्युफैक्चरिंग में दबाव बरकरार

थोक महंगाई टोकरी में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई 7.48% पर स्थिर रही। हालांकि 24 में से 22 मैन्युफैक्चरिंग समूहों में कीमतें बढ़ीं। सबसे ज्यादा तेजी बेसिक मेटल, केमिकल, फूड प्रोडक्ट्स, मशीनरी और अन्य मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों में रही। वहीं फार्मास्यूटिकल्स, मेडिसिनल केमिकल्स और फैब्रिकेटेड मेटल प्रोडक्ट्स की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

सरकार ने बताया कि जून के आंकड़े 2022-23 बेस ईयर वाली संशोधित WPI श्रृंखला पर आधारित हैं। नई श्रृंखला में 697 की जगह 957 वस्तुओं को शामिल किया गया है। साथ ही अप्रैल 2026 की अंतिम WPI महंगाई दर को 8.26% से संशोधित कर 8.36% किया गया है। कुल मिलाकर जून के आंकड़े बताते हैं कि खाद्य और चुनिंदा मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों की महंगाई ने थोक महंगाई को उम्मीद से ज्यादा ऊपर पहुंचाया, जबकि फ्यूल और पावर समूह में दबाव कुछ कम हुआ।  

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