डेढ़ महीने में 150 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हुआ गेहूं, क्या अब आटा-मैदा भी होगा महंगा?

देश में गेहूं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ने की चिंता बढ़ गई है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी गोदामों में पर्याप्त गेहूं मौजूद है। आखिर इसके बावजूद कीमतें क्यों चढ़ रही हैं और आगे किन चीजों पर महंगाई का असर पड़ सकता है?

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In Short

  • पिछले 50 दिनों में गेहूं की कीमतों में 5.24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
  • सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा।
  • गेहूं की बढ़ती कीमतों से आटा, मैदा और बेकरी उत्पाद महंगे होने की आशंका।

By Gungun Mishra:

देश में गेहूं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सरकार की ओर से गेहूं और उससे बने उत्पादों के निर्यात पर चार साल से जारी प्रतिबंध हटाए जाने के बाद से दाम तेजी से बढ़े हैं। पिछले करीब 50 दिनों में गेहूं की कीमत 150 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा बढ़ चुकी है। खास बात यह है कि सरकारी गोदामों में गेहूं का स्टॉक पांच साल के उच्चतम स्तर पर है। इसके बावजूद आने वाले दिनों में आटा, मैदा, सूजी और बिस्कुट जैसे उत्पादों के महंगे होने की आशंका जताई जा रही है।

50 दिनों में 151 रुपये महंगा हुआ गेहूं

24 अगस्त को नई दिल्ली की मंडी में गेहूं का भाव 2,879 रुपये प्रति क्विंटल था। वहीं, 14 अक्टूबर तक इसकी कीमत बढ़कर 3,030 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई। यानी इस दौरान गेहूं के दाम में 151 रुपये प्रति क्विंटल या करीब 5.24 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

सिर्फ दिल्ली ही नहीं, दूसरी मंडियों में भी गेहूं की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। कानपुर में गेहूं का भाव 2,700 रुपये से बढ़कर 2,740 रुपये, राजकोट में 2,700 रुपये से बढ़कर 2,875 रुपये, कोटा में 2,725 रुपये से बढ़कर 2,740 रुपये और इंदौर में 2,725 रुपये से बढ़कर 2,812 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया।

सरकारी आंकड़ों में भी दिखी गेहूं की महंगाई

उपभोक्ता मामलों के विभाग के 15 अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में गेहूं का औसत थोक भाव 2,893.68 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।

8 अक्टूबर को यह 2,873.20 रुपये और 15 सितंबर को 2,839.32 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी एक महीने में औसत थोक कीमत करीब 1.91 फीसदी बढ़ी है। वहीं, 15 अप्रैल 2026 को गेहूं का भाव 2,778.13 रुपये प्रति क्विंटल था।

प्रतीकात्मक तस्वीर

पांच साल के उच्चतम स्तर पर सरकारी स्टॉक

गेहूं की बढ़ती कीमतों के बीच राहत की बात यह है कि सरकार के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) के आंकड़ों के मुताबिक, एक सितंबर तक देश में गेहूं का स्टॉक 479 लाख टन था, जो पिछले पांच साल में इस अवधि का सबसे ऊंचा स्तर है।

पिछले साल इसी अवधि में सरकारी गोदामों में 332.97 लाख टन गेहूं मौजूद था।

क्या आटा, मैदा और बिस्कुट भी होंगे महंगे?

गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर खुदरा बाजार में आटा, मैदा, सूजी और बिस्कुट-ब्रेड जैसे बेकरी उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे आम परिवारों का मासिक बजट बढ़ने की आशंका है।

हालांकि, सरकार के पास पर्याप्त गेहूं का स्टॉक होने से कीमतों को नियंत्रित करने की गुंजाइश बनी हुई है। अगर आने वाले दिनों में गेहूं के भाव और बढ़ते हैं, तो सरकार खुले बाजार में अतिरिक्त गेहूं बेचकर कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए हस्तक्षेप कर सकती है।

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