Oil Crisis: Gulf से तेल आने के रास्तों पर संकट, BRICS ने दी ये सलाह...जानें पूरी बात

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की तेल सप्लाई से जुड़े कई अहम रास्तों पर संकट गहराता जा रहा है. होर्मुज से लेकर बाब अल-मंदेब तक बदलते हालात और सऊदी पाइपलाइन बंद होने से बाजार की चिंता बढ़ी है. सवाल है कि इसका भारत और क्रूड की कीमतों पर कितना बड़ा असर पड़ेगा?

Advertisement

In Short

  • होर्मुज के साथ बाब अल-मंदेब में भी बढ़ा तनाव, ग्लोबल तेल सप्लाई को लेकर चिंता तेज.
  • हूतियों की पकड़ मजबूत होने और सऊदी पाइपलाइन बंद होने से तेल के अहम रास्तों पर बढ़ा दबाव.
  • गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक हालात लंबे समय तक बने रहे तो क्रूड ऑयल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकता है.

By Gungun Mishra:

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ग्लोबल तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. BRICS देशों ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने और संयम बरतने की अपील की है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर बाब अल-मंदेब तक हालात लगातार गंभीर होते दिख रहे हैं. होर्मुज में एक जहाज पर हमले और बाब अल-मंदेब पर हूति विद्रोहियों की पकड़ मजबूत होने के बाद तेल की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है. दूसरी तरफ सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन भी बंद हो चुकी है.

होर्मुज के लिए नए रास्ते पर ईरान-ओमान सहमत

शिन्हुआ न्यूज के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नए प्रवेश और निकास मार्गों के विवरण पर सहमत हो गए हैं. दोनों देश सोमवार को मस्कट में होने वाली एक क्षेत्रीय बैठक में खाड़ी देशों को इस बातचीत और नई व्यवस्था की जानकारी देंगे.

होर्मुज पहले से ही तनाव की वजह से चर्चा में है. यहां से गुजरने वाली तेल सप्लाई पर असर पड़ने के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर दबाव बढ़ा है.

बाब अल-मंदेब पर हूतियों की पकड़ मजबूत

सीबीएस ने यमनी सरकार के एक सैन्य अधिकारी के हवाले से बताया कि हूतियों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण बंदरगाह मोखा और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रणनीतिक शिपिंग रूट में मौजूद अंतिम दो द्वीपों पर कब्जा कर लिया है. इसके बाद हूतियों ने पड़ोसी सऊदी अरब पर हमले भी जारी रखे हैं.

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, बाब अल-मंदेब पर हूतियों की पकड़ ऐसे समय मजबूत हुई है जब वे सऊदी अरब का तेल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बना रहे हैं. होर्मुज में परेशानी बढ़ने के बाद बाब अल-मंदेब को वैकल्पिक रूट के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था.

तेल सप्लाई के रास्तों पर बढ़ा दबाव

बाब अल-मंदेब से दुनिया की करीब 5 से 12 फीसदी तक तेल और गैस सप्लाई गुजरती रही है. होर्मुज में तनाव बढ़ने के बाद इस रास्ते का महत्व और बढ़ गया था. वहीं होर्मुज से जुड़ी परेशानी के कारण पहले ही ग्लोबल तेल सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा प्रभावित बताया जा रहा है.

इसके अलावा सऊदी पाइपलाइन से करीब 4 से 5 फीसदी तेल की आवाजाही होती थी, जो अब बंद है. ऐसे में गल्फ देशों से आने वाले तेल और गैस के कई अहम रास्तों पर एक साथ दबाव बढ़ गया है.

क्या 120 डॉलर के पार जा सकता है क्रूड?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तेल और गैस की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहती है तो कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है. गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि ऐसे हालात बने रहने पर तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं.

तेल महंगा होने से ग्लोबल महंगाई बढ़ सकती है. इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी एनर्जी जरूरत का करीब 80 फीसदी विदेश से मंगाता है. तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर शेयर बाजार पर भी दिख सकता है और सोमवार का कारोबारी सत्र मुश्किल रह सकता है.

BRICS ने शांति और बातचीत की अपील की

नई दिल्ली में शनिवार को जारी BRICS घोषणा पत्र में वेस्ट एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई. BRICS देशों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसी कार्रवाइयों से बचने को कहा है, जिनसे हालात और बिगड़ सकते हैं.

घोषणा पत्र में बातचीत और कूटनीति के जरिए लंबे समय का समाधान निकालने पर जोर दिया गया है, ताकि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनी रहे और ग्लोबल व्यापार, सप्लाई तथा एनर्जी फ्लो प्रभावित न हो.

Read more!
Advertisement