कभी मुनाफे में थी Volvo, अब अरबों का घाटा! कंपनी ने लिया बड़ा फैसला, हजारों कर्मचारियों की नौकरी पर संकट

लग्जरी कार बनाने वाली वोल्वो कार्स के लिए साल 2026 मुश्किलों भरा साबित हो रहा है। कंपनी को तीसरी तिमाही में उम्मीद से कहीं ज्यादा घाटा हुआ है। इसके बाद वोल्वो ने 2,500 और कर्मचारियों की छंटनी का फैसला किया है। वहीं, शेयरों में करीब 30 फीसदी की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। आखिर कंपनी की हालत इतनी खराब क्यों हुई?

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Volvo की हालत क्यों हुई खराब? मुनाफे से घाटे में पहुंची कंपनी
Volvo की हालत क्यों हुई खराब? मुनाफे से घाटे में पहुंची कंपनी

In Short

  • Volvo ने 2,500 और कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया।
  • तीसरी तिमाही में कंपनी को 3.7 अरब स्वीडिश क्रोनर का घाटा।
  • कमजोर नतीजों के बाद शेयरों में करीब 30% की गिरावट।

By Shakshi:

दुनिया की प्रमुख लग्जरी कार निर्माता कंपनी वोल्वो कार्स (Volvo Cars) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कंपनी ने भारी घाटे के बाद 2,500 और कर्मचारियों की छंटनी करने का ऐलान किया है। इनमें ज्यादातर कर्मचारी स्वीडन के होंगे। कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद से काफी कमजोर रहे हैं। इसका असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला, जहां वोल्वो के शेयर करीब 30 फीसदी तक गिर गए।

2,500 कर्मचारियों की जाएगी नौकरी

वोल्वो कार्स ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बताया कि वह अपने कारोबार को पटरी पर लाने के लिए 2,500 और नौकरियों में कटौती करेगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कंपनी लगातार मुश्किल बाजार परिस्थितियों का सामना कर रही है।

वोल्वो कार्स में चीन की गीली होल्डिंग (Geely Holding) की बहुमत हिस्सेदारी है। कंपनी को इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग में उतार-चढ़ाव, बढ़ते टैरिफ और चीन में बिगड़ते बाजार हालात जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

मुनाफे से घाटे में पहुंची कंपनी

वोल्वो के वित्तीय नतीजों ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। साल 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनी को 3.7 अरब स्वीडिश क्रोनर यानी करीब 37 करोड़ 30 लाख डॉलर का ऑपरेटिंग घाटा हुआ है।

पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 5.8 अरब स्वीडिश क्रोनर का ऑपरेटिंग मुनाफा कमाया था। यानी एक साल के भीतर कंपनी मुनाफे से भारी घाटे में पहुंच गई है।

सिटी (Citi) के एनालिस्ट्स के मुताबिक, बाजार को कंपनी से करीब 72.4 करोड़ स्वीडिश क्रोनर के घाटे की उम्मीद थी। हालांकि, वास्तविक घाटा इस अनुमान से कहीं ज्यादा रहा।

शेयरों में करीब 30% की गिरावट

कमजोर तिमाही नतीजों और छंटनी की घोषणा के बाद वोल्वो के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। कंपनी के शेयर करीब 30 फीसदी तक गिर गए।

इस गिरावट से साफ है कि निवेशक कंपनी की मौजूदा वित्तीय स्थिति और आने वाले समय में कारोबार की संभावनाओं को लेकर चिंतित हैं।

CEO ने बताया क्यों बढ़ीं मुश्किलें

वोल्वो कार्स के सीईओ हाकन सैमुएलसन (Hakan Samuelsson) ने तीसरी तिमाही के प्रदर्शन को बेहद निराशाजनक बताया।

उन्होंने कहा कि साल 2026 कंपनी की शुरुआती उम्मीदों से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। ऐसे में कारोबार को दोबारा मजबूत बनाने के लिए चल रही टर्नअराउंड योजना में और निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।

फिलहाल कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती घाटे को कम करना और मुश्किल बाजार परिस्थितियों के बीच अपने कारोबार को फिर से मजबूत बनाना है।

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