विझिंजम पोर्ट से बढ़ेगी भारत की ग्लोबल ट्रेड ताकत, विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता होगी कम
केरल का विझिंजम पोर्ट अब सीधे एक्सपोर्ट इंपोर्ट ऑपरेशन शुरू कर चुका है। इससे भारत को विदेशी ट्रांसशिपमेंट पोर्ट पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने की क्षमता वाला यह पोर्ट दक्षिण भारत के कारोबार और देश की ग्लोबल ट्रेड सप्लाई चेन को नई रफ्तार दे सकता है।

In Short
- विझिंजम पोर्ट ने शुरू किए पूरी तरह एक्सपोर्ट इंपोर्ट ऑपरेशन, भारत को मिलेगा सीधा ग्लोबल ट्रेड कनेक्शन
- पोर्ट अब तक संभाल चुका है 2.28 मिलियन TEU कंटेनर और करीब 1100 जहाज
- 16,000 करोड़ रुपये के विस्तार से बढ़ेगी क्षमता, बनेंगे 5,000 से ज्यादा रोजगार के मौके
केरल का विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट अब पूरी तरह एक्सपोर्ट इंपोर्ट यानी EXIM ऑपरेशन के लिए शुरू हो गया है। इससे भारत के सामान को दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने और विदेशों से आने वाले सामान की सप्लाई को आसान बनाने में मदद मिलेगी। यह कदम भारत के समुद्री व्यापार के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि अब देश का एक बड़ा हिस्सा विदेशी ट्रांसशिपमेंट पोर्ट पर निर्भर नहीं रहेगा और सीधे ग्लोबल शिपिंग नेटवर्क से जुड़ सकेगा।
ट्रांसशिपमेंट हब से बना सीधा ट्रेड गेटवे
EXIM ऑपरेशन शुरू होने के बाद विझिंजम पोर्ट अब सिर्फ अलग अलग इंटरनेशनल शिपिंग सेवाओं के बीच कंटेनर पहुंचाने का काम नहीं करेगा बल्कि भारत से सीधे एक्सपोर्ट और इंपोर्ट होने वाले कार्गो को भी संभालेगा।
यह पोर्ट बड़े इंटरनेशनल शिपिंग रूट से करीब 10 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है। इसकी नेचुरल ड्राफ्ट क्षमता 18 से 20 मीटर है जिसके कारण यहां दुनिया के बड़े कंटेनर जहाज जैसे अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल्स भी आसानी से आ सकते हैं।
दक्षिण भारत के कारोबार को मिलेगा फायदा
विझिंजम पोर्ट से केरल तमिलनाडु और कर्नाटक के कारोबारियों को ग्लोबल शिपिंग रूट तक ज्यादा सीधी पहुंच मिलेगी। इससे बेंगलुरु कोयंबटूर और तिरुप्पुर जैसे मैन्युफैक्चरिंग सेंटर को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
अभी भारत अपने 75 फीसदी से ज्यादा कंटेनर ट्रांसशिपमेंट कार्गो को विदेशी पोर्ट के जरिए भेजता है। इससे शिपिंग खर्च और सामान पहुंचने में लगने वाला समय बढ़ जाता है। विझिंजम के जरिए इस निर्भरता को कम करने में मदद मिल सकती है।
2.28 मिलियन TEU और 1100 जहाजों की संभाल चुका है पोर्ट
विझिंजम पोर्ट ने 3 दिसंबर 2024 को कमर्शियल ऑपरेशन शुरू किया था। इसके बाद से यह 2.28 मिलियन TEU से ज्यादा कंटेनर और करीब 1100 जहाजों को संभाल चुका है।
इस पोर्ट ने सिर्फ 10 महीने में 1 मिलियन TEU और 18 महीने में 2 मिलियन TEU का आंकड़ा पार किया। यहां 80 से ज्यादा अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल्स आ चुके हैं।सबसे बड़े जहाजों में MSC Irina भी शामिल है जिसकी लंबाई 399.99 मीटर और क्षमता 24,346 TEU है। इन आंकड़ों से साबित होता है कि विझिंजम बड़े स्तर के ग्लोबल शिपिंग ऑपरेशन के लिए तैयार है।
16 हजार करोड़ रुपये से होगा विस्तार
पोर्ट के फेज 2 विस्तार पर 16,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस विस्तार के बाद विझिंजम की सालाना क्षमता बढ़कर 5.7 मिलियन TEU हो जाएगी।इसमें 1,200 मीटर का कंटेनर बर्थ, स्थायी रेल कनेक्टिविटी, बेहतर रोड नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउस जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
फेज 2 का पूरा काम दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद विझिंजम प्रोजेक्ट में अडानी ग्रुप का कुल निवेश करीब 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
बढ़ेंगे रोजगार और लॉजिस्टिक्स के मौके
विझिंजम पोर्ट के विस्तार से 5,000 से ज्यादा नए डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रोजगार पैदा होने की संभावना है।पोर्ट के अलावा ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज, फ्रेट फॉरवर्डिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा। केरल सरकार का कहना है कि बेहतर रोड और रेल कनेक्टिविटी के जरिए इस पोर्ट की पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इसके लिए रिंग रोड के लिए जमीन खरीद पर 3,200 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है और निजी निवेश को आकर्षित करने की कोशिश भी जारी है।
भारत के समुद्री व्यापार के लिए नया रास्ता
विझिंजम पोर्ट का EXIM ऑपरेशन शुरू होना भारत के लिए सिर्फ एक नए बंदरगाह की शुरुआत नहीं है बल्कि ग्लोबल ट्रेड में मजबूत पकड़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
अपनी रणनीतिक लोकेशन गहरी ड्राफ्ट क्षमता और बड़े विस्तार प्लान के साथ विझिंजम आने वाले समय में भारत के समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन को नई ताकत दे सकता है।