विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट से दिया इस्तीफा, ₹400 करोड़ की चैरिटी से जुड़े फैसलों पर बढ़ी मुश्किल

विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी पद से कार्यकाल खत्म होने से तीन दिन पहले इस्तीफा दे दिया है। इसी बीच ट्रस्ट की जरूरी बैठकों पर रोक से करीब ₹400 करोड़ की चैरिटेबल डिस्बर्समेंट और कुछ शेयरहोल्डर फैसले प्रभावित हो सकते हैं। अब नजर चैरिटी कमिश्नर के फैसले पर है।

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In Short

  • विजय सिंह ने 14 अगस्त को कार्यकाल खत्म होने से पहले सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दिया
  • ट्रस्ट की अहम बैठकों पर रोक से करीब ₹400 करोड़ की चैरिटेबल डिस्बर्समेंट प्रभावित होने की आशंका
  • नवाजभाई शेयर ट्रांसफर और परमानेंट ट्रस्टियों की नियुक्ति से जुड़े मामलों पर फैसला अभी बाकी

By Gaurav Kumar:

टाटा ट्रस्ट्स के भीतर चल रहे मतभेदों के बीच एक और बड़ा बदलाव सामने आया है। वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के ट्रस्टी पद से अपना कार्यकाल खत्म होने से तीन दिन पहले इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल 14 अगस्त को खत्म होना था। इसी बीच ट्रस्ट की अहम बैठकों पर लगी रोक से करीब ₹400 करोड़ की चैरिटेबल डिस्बर्समेंट और कुछ शेयरहोल्डर फैसलों पर भी असर पड़ने की आशंका है। अब विजय सिंह के फैसले से लेकर बैठकों पर रोक और आगे की नियुक्तियों तक कई सवाल एक साथ खड़े हो गए हैं।

विजय सिंह ने क्यों छोड़ा ट्रस्टी पद?

विजय सिंह ने साफ कर दिया था कि वह सर रतन टाटा ट्रस्ट में अगले कार्यकाल के लिए दोबारा अपॉइंटमेंट नहीं चाहते। रिपोर्ट के मुताबिक, साथी ट्रस्टियों के बीच उनके नाम पर यूनैनिमस यानी सर्वसम्मति बनना भी मुश्किल नजर आ रहा था। इसी वजह से उन्होंने मौजूदा कार्यकाल पूरा होने से पहले ही ट्रस्टी पद छोड़ दिया। हालांकि, वह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में ट्रस्टी के तौर पर एक और साल तक बने रहेंगे।

ट्रस्ट की अहम बैठकों पर क्यों लगी रोक?

सर रतन टाटा ट्रस्ट ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर से कुछ जरूरी बैठकें करने की परमिशन मांगी है, लेकिन फिलहाल इन बैठकों पर रोक लगी हुई है। यह रोक कुछ मामलों पर फैसला आने तक जारी है। इनमें नवाजभाई शेयरों के कथित ट्रांसफर से जुड़ा मामला और परमानेंट ट्रस्टियों की नियुक्ति को लेकर की गई शिकायत शामिल है। बैठकें नहीं होने से ट्रस्ट के रेगुलर और जरूरी फैसले आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

₹400 करोड़ की चैरिटी पर कैसे पड़ सकता है असर?

बैठकों पर रोक का सीधा असर करीब ₹400 करोड़ की चैरिटेबल डिस्बर्समेंट पर पड़ सकता है। इसके अलावा आने वाले कुछ शेयरहोल्डर फैसले भी अटक सकते हैं। ट्रस्ट का कहना है कि जरूरी बैठकें नहीं हो पाने से उसके रेगुलर कामकाज और महत्वपूर्ण फैसलों पर असर पड़ रहा है। अब काफी कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि चैरिटी कमिश्नर बैठकों की परमिशन कब देते हैं।

वेणु श्रीनिवासन भी छोड़ चुके हैं एक ट्रस्ट

इससे पहले मई में टाटा ट्रस्ट्स के दूसरे वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन की दोबारा नियुक्ति का ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने विरोध किया था। उनका कहना था कि 1923 के ट्रस्ट डीड में ट्रस्टियों के लिए प्रैक्टिस करने वाला पारसी जोरास्ट्रियन और मुंबई का परमानेंट रेजिडेंट होने जैसी शर्तें दी गई हैं।

अब आगे किन फैसलों पर रहेगी नजर?

विजय सिंह के इस्तीफे के बाद अब सबसे ज्यादा नजर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के फैसले पर रहेगी। यह देखना अहम होगा कि ट्रस्ट को महत्वपूर्ण बैठकें करने की परमिशन कब मिलती है। इसके साथ नवाजभाई शेयरों के कथित ट्रांसफर और परमानेंट ट्रस्टियों की नियुक्ति से जुड़ी शिकायत पर आने वाला फैसला भी महत्वपूर्ण होगा। इन मामलों का असर ट्रस्ट की चैरिटेबल एक्टिविटीज, शेयरहोल्डर से जुड़े फैसलों और आने वाली नियुक्तियों पर पड़ सकता है।

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