रियल एस्टेट कारोबार में उतरी अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता, 100% हिस्सेदारी के साथ बनाई नई सब्सिडियरी

वेदांता ने अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने 100% स्वामित्व वाली नई सब्सिडियरी बनाकर एक नए सेक्टर में एंट्री की तैयारी शुरू कर दी है।

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In Short

  • वेदांता ने रियल एस्टेट सेक्टर में एंट्री के लिए अपनी 100% स्वामित्व वाली नई कंपनी Vedanta Property Platforms Limited (VPPL) की स्थापना की है।
  • मुंबई में पंजीकृत VPPL भारत में रियल एस्टेट और उससे जुड़े कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगी।
  • हाल ही में वेदांता ने डीमर्जर के तहत चार नई कंपनियों को शेयर बाजार में लिस्ट किया था और अब नए बिजनेस विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है।

By Gaurav Kumar:

Vedanta New Business: अरबपति कारोबारी, अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) की कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd) अब एक नए कारोबार में एंट्री करने जा रही है। वेदांता अब रियल एस्टेट सेक्टर में भी काम करेगी।

कंपनी ने बीते बुधवार को अपने लेटेस्ट एक्सचेंज फाइलिंग में बताया की वेदांता लिमिटेड ने अपनी 100% स्वामित्व वाली (Wholly Owned Subsidiary) नई कंपनी Vedanta Property Platforms Limited (VPPL) की स्थापना की है।

यह कंपनी 22 जून 2026 को मुंबई, महाराष्ट्र में पंजीकृत हुई है और रियल एस्टेट कारोबार के लिए एक रणनीतिक प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगी।

कंपनी की अधिकृत और चुकता शेयर पूंजी ₹1 लाख है, जिसमें 1 लाख इक्विटी शेयर (₹1 प्रति शेयर) शामिल हैं। फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि वेदांता ने कैश पेमेंट के जरिए इस पूरी शेयर पूंजी की सदस्यता लेकर कंपनी में 100% हिस्सेदारी हासिल की है।

कंपनी ने यह भी बताया कि फिलहाल VPPL ने अपना कारोबार शुरू नहीं किया है। फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि यह कंपनी भारत में रियल एस्टेट और उससे जुड़े अन्य व्यवसायों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से बनाई गई है।

वेदांता डीमर्जर

हाल ही में वेदांता ने अपने कारोबार को अलग-अलग कंपनियों में बांटने (डीमर्जर) की प्रक्रिया के तहत 15 जून 2026 को अपनी चार नई कंपनियों- Vedanta Aluminium Metal (VAML), Vedanta Oil & Gas (VOGL), Vedanta Power और Vedanta Iron & Steel (VISL) को NSE और BSE पर लिस्ट कराया था।

इस डीमर्जर का उद्देश्य शेयरधारकों के लिए Value Unlock करना है। अब ये सभी कंपनियां स्वतंत्र रूप से अपना कारोबार चलाएंगी और अपनी जरूरत के अनुसार पूंजी जुटा सकेंगी। 

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