चीन के सामान पर अमेरिका का बड़ा एक्शन प्लान, भारत समेत 40 देशों पर उठाए सवाल

चीन के सामान को लेकर अमेरिका की नई रिपोर्ट ने वैश्विक व्यापार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में कई देशों का नाम शामिल है और अब वॉशिंगटन इस पूरे नेटवर्क पर नजर रखने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी में है। आखिर मामला क्या है, जानिए।

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In Short

  • अमेरिका ने भारत समेत 40+ देशों पर चीन के सामान की री-रूटिंग का आरोप लगाया।
  • रिपोर्ट में भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई कॉरिडोर का जिक्र किया गया।
  • अमेरिका AI सिस्टम से ऐसे शिपमेंट पकड़ने की तैयारी कर रहा है।

By Gaurav Kumar:

अमेरिका ने भारत समेत 40 से ज्यादा देशों पर आरोप लगाया है कि वे चीन के सामान को दूसरे रास्तों से अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। अमेरिका का कहना है कि ऐसा करके चीनी कंपनियां अमेरिकी टैरिफ से बचने की कोशिश कर रही हैं। इस मामले को लेकर अमेरिका अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम की मदद से ऐसे सामानों की पहचान करने की तैयारी कर रहा है।

रिपोर्ट में भारत, मैक्सिको और यूरोपीय यूनियन का नाम

यह आरोप पीटर नवारो की लिखी रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम’ में लगाया गया है। पीटर नवारो अमेरिका के राष्ट्रपति के व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग मामलों के सलाहकार हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हर साल 40 अरब डॉलर से 303 अरब डॉलर तक के सामान की अवैध ट्रांसशिपमेंट हो सकती है।

नवारो ने कहा कि कई बड़े व्यापारिक साझेदार देश चीन के सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने में शामिल हैं। उन्होंने मैक्सिको, कनाडा, यूरोपीय यूनियन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का नाम लिया और इसे चीन का ‘शैडो ट्रांसशिपमेंट नेटवर्क’ बताया।

2018 से शुरू हुई व्यवस्था का लगाया आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, यह तरीका साल 2018 के बाद ज्यादा बढ़ा, जब ट्रंप प्रशासन ने चीन पर सेक्शन 301 टैरिफ लगाए थे। अमेरिका ने उस समय चीन की व्यापार नीतियों को अनुचित बताते हुए कई सामानों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया था।

नवारो के अनुसार, इसके बाद चीनी निर्माताओं ने अपने सामान को दूसरे देशों के रास्ते भेजना शुरू किया। इसमें सामान पर मामूली बदलाव, दोबारा पैकिंग, लेबल बदलना या रूट बदलना शामिल था, जिससे सामान का मूल देश अलग दिखाई दे सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे देशों को चुना गया जहां सस्ता श्रम, कमजोर कस्टम निगरानी या अमेरिकी बाजार तक आसान पहुंच मौजूद थी।

भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई कॉरिडोर का जिक्र

रिपोर्ट में भारत के एक खास औद्योगिक क्षेत्र का भी जिक्र किया गया है। नवारो ने कहा कि भारत का पुणे-गुजरात-चेन्नई कॉरिडोर चीनी पंप और कंप्रेसर को अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने में इस्तेमाल किया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि अगर चीन का बना पंप पुणे से भारतीय सामान के रूप में अमेरिका पहुंचता है, तो इसका असर अमेरिका के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस जैसे शहरों की औद्योगिक सप्लाई चेन पर पड़ता है।

सामान पकड़ने के लिए AI सिस्टम लगाएगा अमेरिका

अमेरिका अब ऐसे मामलों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ‘डिटेक्टिव बॉर्डर’ सिस्टम तैयार कर रहा है। यह सिस्टम शिपमेंट डेटा, सामान भेजने के रास्ते, प्रोडक्ट की जानकारी, कंपनियों के संबंध और उत्पादन क्षमता जैसे कई संकेतों का विश्लेषण करेगा।

अमेरिका का कहना है कि इस सिस्टम का उद्देश्य सही विदेशी निवेश और वैध व्यापार को अवैध तरीके से भेजे जा रहे सामान से अलग करना है। इसके जरिए ज्यादा जोखिम वाले शिपमेंट की पहचान कर कार्रवाई, ड्यूटी वसूली, जुर्माना और सामान रोकने जैसे कदम उठाए जाएंगे।

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