UPI MDR: एसआईपी और शेयर खरीदने वालों पर क्या होगा असर? जानिए ₹10,000 के निवेश पर कितना लगेगा चार्ज

UPI से शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए नया MDR फ्रेमवर्क चर्चा में है। सरकार ने कैपिटल मार्केट पेमेंट को अलग कैटेगरी में रखा है, जहां 0.02% MDR तय किया गया है। लेकिन क्या यह चार्ज आपकी जेब से कटेगा? जानिए नए नियमों का पूरा असर।

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In Short

  • UPI से शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेश पर भी लागू होगा MDR, कैपिटल मार्केट पेमेंट के लिए तय की गई 0.02% दर।
  • ₹10,000 के निवेश पर सिर्फ ₹2 MDR, जबकि ₹1 लाख के ट्रांजैक्शन पर लगेगा ₹20 चार्ज और अधिकतम सीमा ₹300 तय।
  • निवेशक के बैंक अकाउंट से सीधे नहीं कटेंगे पैसे, MDR की लागत संभालने की जिम्मेदारी ब्रोकर और प्लेटफॉर्म पर होगी।

By Sonam:

UPI को अब तक भारत में सबसे आसान और बिना अतिरिक्त शुल्क वाला डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म माना जाता रहा है। लेकिन अब इसके नियमों में बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का नया फ्रेमवर्क जारी कर दिया है, जो 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।

हालांकि, आम यूजर्स के लिए UPI पेमेंट अभी भी फ्री रहेगा। यानी ग्राहक को अपनी जेब से अलग से MDR नहीं देना होगा। लेकिन दुकानदारों और बिजनेस से जुड़े कुछ पेमेंट पर यह चार्ज लागू होगा। खास बात यह है कि नए फ्रेमवर्क में शेयर बाजार और कैपिटल मार्केट से जुड़े UPI पेमेंट को भी अलग कैटेगरी में रखा गया है।

कैपिटल मार्केट पेमेंट पर सामान्य UPI से अलग MDR

नए MDR फ्रेमवर्क के मुताबिक, ₹2,000 से ज्यादा के हर UPI पेमेंट पर एक जैसा चार्ज नहीं लगेगा। अलग-अलग तरह के लेनदेन के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं।

सामान्य मर्चेंट पेमेंट पर जहां 0.4% MDR का प्रावधान है, वहीं कैपिटल मार्केट यानी शेयर बाजार से जुड़े पेमेंट के लिए MDR की दर सिर्फ 0.02% रखी गई है।

इसमें म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज खरीदने, स्टॉकब्रोकर या डीलर से जुड़े UPI पेमेंट शामिल होंगे।

₹10,000 निवेश पर ₹2 MDR

कैपिटल मार्केट कैटेगरी में MDR को उदाहरण से समझें तो अगर कोई निवेशक UPI के जरिए ₹10,000 का निवेश करता है, तो MDR की रकम ₹2 होगी।

इसी तरह ₹50,000 के निवेश पर MDR ₹10 और ₹1 लाख के निवेश पर ₹20 देना होगा। हालांकि, बड़े ट्रांजैक्शन के लिए MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन रखी गई है।

किन निवेश पर लागू हो सकता है MDR?

नए नियमों के तहत UPI से किए जाने वाले कई कैपिटल मार्केट पेमेंट इस दायरे में आ सकते हैं। इनमें म्यूचुअल फंड में निवेश, सिक्योरिटीज खरीदने के लिए भुगतान, स्टॉकब्रोकर या डीलर को किए जाने वाले पेमेंट और ब्रोकिंग से जुड़े फंड ट्रांसफर शामिल हैं।

Image Credit : Aaj Tak

यानी अगर कोई व्यक्ति UPI से ₹10,000 की खरीदारी करता है और उसी UPI से ₹10,000 का म्यूचुअल फंड निवेश करता है, तो दोनों पेमेंट पर MDR एक जैसा नहीं होगा।

क्या निवेशक के बैंक अकाउंट से कटेंगे पैसे?

MDR फ्रेमवर्क मर्चेंट या इंटरमीडियरी से फीस लेने के लिए बनाया गया है। इसलिए ऐसा नहीं है कि शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय निवेशक के बैंक अकाउंट से सीधे ₹20 काट लिए जाएंगे।

यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ब्रोकर, म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म या दूसरे इंटरमीडियरी इस लागत को किस तरह संभालते हैं। नियमों के मुताबिक MDR का अलग से बोझ ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं है।

SIP करने वालों पर क्या होगा असर?

अगर कोई निवेशक हर महीने UPI के जरिए SIP करता है या कभी-कभार म्यूचुअल फंड में निवेश करता है, तो 0.02% MDR के हिसाब से रकम काफी छोटी होगी।

हालांकि, निवेशकों को यह देखना होगा कि उनका इस्तेमाल किया जा रहा प्लेटफॉर्म इस लागत को अपने स्तर पर कैसे मैनेज करता है।

ट्रेडर्स के लिए क्यों अहम है MDR फ्रेमवर्क?

बार-बार फंड ट्रांसफर करने वाले ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए यह बदलाव ज्यादा अहम हो सकता है, क्योंकि उनके UPI लेनदेन की संख्या ज्यादा होती है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO आशीष कुमार चौहान ने भी शॉर्ट टर्म में UPI के जरिए ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर पड़ने की संभावना जताई है। हालांकि, समय के साथ यह असर स्थिर हो सकता है।

इसलिए UPI से कैपिटल मार्केट में निवेश करने वालों के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि उनका ब्रोकर या निवेश प्लेटफॉर्म MDR की लागत को किस तरह संभालता है।

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