UPI पर MDR को लेकर बहस तेज, दुकानदार से लिया शुल्क ग्राहक पर पड़ सकता है असर
यूपीआई पर एमडीआर को लेकर बहस के बीच अर्थशास्त्री अजीत रानाडे ने दुकानदारों से शुल्क लेने के असर पर सवाल उठाया है। सरकार का कहना है कि ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और ज्यादातर छोटे पेमेंट मुफ्त रहेंगे। लेकिन सवाल है कि दुकानदार पर आने वाली लागत आखिर कहां जाएगी।

In Short
- अजीत रानाडे ने यूपीआई पेमेंट मुफ्त रखने की बात कही है।
- सरकार ने कहा है कि ग्राहक से यूपीआई ट्रांजैक्शन का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
- रानाडे के मुताबिक, दुकानदार पर एमडीआर का खर्च बढ़ी कीमतों के जरिए ग्राहकों तक पहुंच सकता है।
UPI Payments: यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर बहस तेज हो गई है। अर्थशास्त्री अजीत रानाडे ने कहा है कि यूपीआई पेमेंट मुफ्त रहना चाहिए। उनका कहना है कि दुकानदार से MDR लेने के बाद यह कहना कि इसका असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा, सही तर्क नहीं है।
संसद ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 पास किया है। इससे सरकार बैंकों को यूपीआई ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने की अनुमति दे सकती है। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि ग्राहकों और व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
जुलाई में हुए करीब 24 अरब UPI ट्रांजैक्शन
बिजनेस टुडे ने मिंट के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि जुलाई में यूपीआई पर करीब 24 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 30 लाख करोड़ रुपये रही।
उनके मुताबिक, संशोधन खुद MDR लागू नहीं करता, लेकिन उस सुरक्षा को हटा देता है जिसने यूपीआई और रुपे पेमेंट पर MDR को शून्य रखा था। भविष्य में शुल्क लगाने का फैसला कार्यपालिका के स्तर पर लिया जा सकता है।
दुकानदार पर शुल्क का असर ग्राहक तक पहुंच सकता है
सीतारमण ने कहा है कि MDR लागू होने पर इसका भुगतान दुकानदार करेगा, ग्राहक नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन, जिसमें सड़क किनारे दुकानदारों को किए जाने वाले कम राशि के पेमेंट शामिल हैं, मुफ्त रहेंगे।
रानाडे का तर्क है कि इसका मतलब यह नहीं कि ग्राहकों पर असर नहीं पड़ेगा। दुकानदार लागत खुद वहन कर सकता है या बढ़ी हुई कीमतों के जरिए इसका बोझ ग्राहक पर डाल सकता है। उन्होंने कहा कि 85 प्रतिशत से ज्यादा व्यक्ति से दुकानदार यानी P2M ट्रांजैक्शन छोटे मूल्य के हैं। 20 रुपये की चाय या 150 रुपये के ऑटो पेमेंट में आम तौर पर ट्रांजैक्शन लागत नहीं जोड़ी जाती। उनके मुताबिक, जीरो MDR यूपीआई के तेजी से फैलने की अहम वजह रहा है।
UPI की सालाना लागत करीब 20 हजार करोड़ रुपये
रानाडे ने माना कि यूपीआई चलाने में बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और NPCI सर्वर, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की पहचान, विवाद समाधान और सेटलमेंट पर खर्च करते हैं। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, इसकी सालाना लागत करीब 20 हजार करोड़ रुपये है, जबकि सरकारी रिइंबर्समेंट इसका केवल एक हिस्सा कवर करता है।
रानाडे ने कहा कि सरकार दूसरे तरीकों से भी यह लागत पूरी कर सकती है। उन्होंने बताया कि 2025-26 में RBI का केंद्र को डिविडेंड 2.86 लाख करोड़ रुपये था और यूपीआई की सालाना लागत इसका करीब 7 प्रतिशत है।
सरकार ने कहा- ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा शुल्क
सीतारमण ने राज्यसभा में कहा कि संशोधन केवल सक्षम प्रावधान है और इससे यूपीआई यूजर्स पर कोई टैक्स या ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लगाया गया है। उन्होंने कहा कि अभी MDR का कोई फ्रेमवर्क तय नहीं हुआ है।
बिल पास होने के बाद NPCI की अध्यक्षता वाली UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी MDR लागू करने, उसके दायरे और ढांचे पर विचार करेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि ग्राहक यूपीआई ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं देंगे और ज्यादातर कम मूल्य वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी मुफ्त रहेंगे।