अनाज निर्यात के लिए भारत से मदद मांग रहा यूक्रेन! तुर्की और मिस्र से भी बातचीत, लेकिन रूस बन रहा रुकावट
रूस के साथ जारी संघर्ष के बीच यूक्रेन ने अनाज निर्यात को दोबारा पटरी पर लाने के लिए भारत, तुर्की और मिस्र से बातचीत शुरू की है. राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक खास प्रस्ताव का खुलासा किया है, लेकिन रूस के विरोध से मुश्किलें बढ़ गई हैं. आखिर क्या है पूरा मामला?

In Short
- यूक्रेन अनाज निर्यात के लिए काला सागर में सुरक्षित समुद्री रास्ता खोलने को लेकर भारत, तुर्की और मिस्र से बातचीत कर रहा है.
- जेलेंस्की के मुताबिक, तीनों देशों ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का प्रस्ताव दिया है, लेकिन रूस इसका विरोध कर रहा है.
- रूसी हमलों के कारण यूक्रेन का अनाज निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और फिलहाल सामान्य स्तर का सिर्फ 38% निर्यात हो पा रहा है.
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष का असर अब अनाज के निर्यात पर भी पड़ रहा है. यूक्रेन अपने अनाज को दूसरे देशों तक पहुंचाने के लिए काला सागर में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही शुरू करना चाहता है. इसके लिए यूक्रेन भारत, तुर्की और मिस्र के साथ बातचीत कर रहा है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि तीनों देशों ने अनाज की सुरक्षित ढुलाई के लिए एक प्रस्ताव दिया है, लेकिन रूस फिलहाल इस योजना का विरोध कर रहा है.
भारत, तुर्की और मिस्र ने क्या प्रस्ताव दिया?
ब्लूमबर्ग न्यूज को दिए इंटरव्यू में जेलेंस्की ने बताया कि भारत, तुर्की और मिस्र ने अपने झंडे वाले जहाजों को काला सागर में सुरक्षित आवाजाही की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत इन देशों के जहाज यूक्रेन और रूस, दोनों के बंदरगाहों पर जाकर अनाज और दूसरे खाद्य उत्पादों की ढुलाई कर सकेंगे.
जेलेंस्की के मुताबिक, इस व्यवस्था में एक जहाज यूक्रेन के बंदरगाह पर जाएगा, जबकि दूसरा रूस के बंदरगाह पर पहुंचेगा. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत होंगे कि इन जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा.
हालांकि, जेलेंस्की ने कहा कि भारत, तुर्की और मिस्र की ओर से लगातार बातचीत किए जाने के बावजूद रूस इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर रहा है.
अगस्त से प्रभावित है अनाज का निर्यात
यूक्रेन के लिए काला सागर के बंदरगाह अनाज और दूसरे खाद्य उत्पादों के निर्यात का सबसे अहम रास्ता हैं. इन बंदरगाहों के जरिए एक मार्केटिंग सीजन में करीब 4 करोड़ टन अनाज भेजा जा सकता है.
लेकिन अगस्त से रूसी हवाई हमलों के कारण बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे और जहाजों को निशाना बनाया गया है. इसकी वजह से समुद्री रास्ते से अनाज की ढुलाई रुक गई है.
जेलेंस्की ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में अनाज को रेलवे के जरिए दूसरे देशों तक पहुंचाना संभव नहीं है. यही वजह है कि यूक्रेन समुद्री रास्ते को दोबारा खोलने की कोशिश कर रहा है.
यूरोपीय संघ से भी मांगी मदद
यूक्रेन ने यूरोपीय संघ से 'सॉलिडैरिटी लेन्स' कार्यक्रम दोबारा शुरू करने की अपील की है. यह व्यवस्था 2022 में रूस के बड़े सैन्य हमले के बाद शुरू की गई थी. इसके जरिए यूक्रेन यूरोपीय रेलवे और बंदरगाहों की मदद से अनाज का निर्यात कर सकता था.
जेलेंस्की ने कहा कि अनाज के निर्यात को आसान बनाने के लिए इस व्यवस्था को फिर से शुरू करना जरूरी है, क्योंकि दुनिया को इस अनाज की जरूरत है.
सामान्य स्तर का सिर्फ 38% निर्यात कर पा रहा यूक्रेन
पिछली गर्मियों में यूक्रेन ने रूस के तथाकथित शैडो फ्लीट पर हमले किए थे. इन जहाजों का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रतिबंधित तेल और ईंधन के निर्यात के लिए किया जाता है. इसके बाद यूक्रेन के नागरिक बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे पर बड़े हमले हुए.
यूक्रेन के कृषि मंत्रालय के मुताबिक, देश फिलहाल सामान्य स्तर के मुकाबले सिर्फ 38 फीसदी अनाज और कृषि उत्पादों का निर्यात कर पा रहा है. ऐसे में यूक्रेन के लिए काला सागर में सुरक्षित जहाजों की आवाजाही बहाल करना अहम हो गया है.