UGC Rules: नए नियमों की दोबारा होगी समीक्षा? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने बताया आगे का प्लान
UGC के नए इक्विटी नियमों को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अहम जानकारी दी है। छात्रों की चिंताओं को देखते हुए सरकार नियमों की दोबारा समीक्षा करने पर विचार कर रही है। आखिर इन नियमों पर विवाद क्यों हुआ और सरकार अब क्या कदम उठा सकती है? जानिए पूरी खबर।

In Short
- केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि UGC के नए इक्विटी नियमों की दोबारा समीक्षा के लिए कमेटी बनाई जा सकती है।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियम ऐसे होने चाहिए, जिनसे सभी छात्रों के हितों की रक्षा हो सके।
- सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को नए नियमों पर रोक लगाई थी, फिलहाल 2012 के पुराने नियम लागू हैं।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए इक्विटी नियमों को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बयान दिया है। सरकार ने गुरुवार को अदालत को बताया कि वह UGC के 2026 के नए नियमों की दोबारा समीक्षा करने पर विचार कर रही है। इसके लिए एक विशेष कमेटी भी बनाई जा सकती है। सरकार का कहना है कि उसकी कोशिश सभी छात्रों के हितों की रक्षा करना और उनकी चिंताओं को दूर करना है।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच को बताया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसी भी छात्र को यह महसूस न हो कि नए नियमों के कारण उसके साथ भेदभाव हो रहा है या उसके हितों को नुकसान पहुंच सकता है।
तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार हर छात्र का ध्यान रखना चाहती है। किसी के मन में कोई आशंका या असंतोष नहीं होना चाहिए। युवा पीढ़ी के हितों को देखते हुए सरकार एक कमेटी बनाने पर विचार कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने नियमों को लेकर क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात पर जोर दिया कि UGC के नियम ऐसे होने चाहिए, जिनसे सभी छात्रों के हित सुरक्षित रहें।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने सरकार से पूछा कि इन नियमों की दोबारा समीक्षा क्यों नहीं की जा सकती, ताकि आने वाली पीढ़ी के हितों का ध्यान रखा जा सके।
कोर्ट ने साफ किया कि नियमों में बदलाव करते समय हर छात्र के अधिकारों और हितों की रक्षा जरूरी है।
क्या हैं UGC के नए इक्विटी नियम?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए नए नियम जारी किए थे। इनका मकसद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकना था।
नियमों के तहत शिक्षण संस्थानों में Equal Opportunity Centres और Equity Committees बनाने का प्रावधान किया गया था। इनका काम भेदभाव से जुड़ी शिकायतों को देखना था।
नए नियमों पर क्यों हुआ विवाद?
नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को लेकर विरोध शुरू हुआ था। इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को विशेष रूप से शामिल किया गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस परिभाषा में सामान्य वर्ग के छात्रों को शामिल नहीं किया गया है, जिससे असमान व्यवहार की आशंका पैदा हो सकती है।
इसी विवाद के बीच 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि कुछ प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके गलत इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक UGC के 2012 वाले पुराने इक्विटी नियम ही लागू रहेंगे।