US-Iran War: ईरान से 50 साल के नुकसान का पैसा मांगेंगे ट्रंप, होर्मुज खोलने और पीस डील पर बढ़ा टकराव
अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशें जारी हैं, लेकिन अब मुआवजे को लेकर नया टकराव खड़ा हो गया है। ईरान की मांगों के जवाब में डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा दावा किया है, जिससे Peace Deal और Strait of Hormuz खोलने की कोशिशें और मुश्किल हो सकती हैं।

In Short
- ट्रंप ने ईरान से पिछले 50 साल के नुकसान का Compensation मांगने की बात कही
- USS Cole हमले में मारे गए 17 अमेरिकी Sailors के परिवारों के लिए भी मांगा पैसा
- Strait of Hormuz खोलने के लिए Iran और Oman Final Pact के करीब, लेकिन Technical Issues बाकी
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की कोशिशों में अब मुआवजे को लेकर नया टकराव सामने आया है। ईरान जहां अमेरिका से कम्पेनसेशन, सैंक्शंस खत्म करने और मिलिट्री थ्रेट्स रोकने जैसी मांग कर रहा है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उल्टा ईरान से ही पैसा मांगने की बात कही है।
इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की कोशिश भी चल रही है। आइए समझते हैं कि ट्रंप ने ईरान से कितना पुराना हिसाब मांगा है, दोनों देशों के बीच पीस डील कहां अटकी है और होर्मुज को लेकर क्या बातचीत चल रही है।
50 साल के नुकसान का पैसा मांगेंगे ट्रंप
सोमवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पिछले 50 साल में वॉर्स, अटैक्स और प्रोटेस्ट्स से जुड़े नुकसान और मौतों के लिए ईरान से कम्पेनसेशन मांगेगा। ट्रंप ने कहा, “हम पिछले 50 साल में उनके किए नुकसान के लिए पैसा मांगने जा रहे हैं।” उनके मुताबिक इसमें क्षेत्र में मारे गए सिविलियंस और अमेरिकी फोर्सेज से जुड़ा नुकसान भी शामिल होना चाहिए। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर नुकसान की भरपाई होनी है तो ईरान को उसका पैसा देना चाहिए।
यूएसएस कोल हमले के पीड़ित परिवारों का भी किया जिक्र
ट्रंप ने कहा कि अक्टूबर 2000 में यमन में यूएसएस कोल पर हुए हमले में मारे गए 17 अमेरिकी सेलर्स के परिवारों को भी ईरान को कम्पेनसेशन देना चाहिए। हालांकि, इस हमले के लिए ईरान नहीं बल्कि अल कायदा को जिम्मेदार ठहराया गया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर यह भी कहा कि लेबनान, सीरिया, यमन और गाजा में हुए नुकसान और मौतों के लिए भी ईरान को जिम्मेदार होना चाहिए।
प्रोटेस्ट्स में 52 हजार मौतों का ट्रंप ने किया दावा
ट्रंप ने 2025 के आखिर और 2026 में ईरान में डेमॉन्स्ट्रेशंस पर हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि करीब छह हफ्ते पहले तक लगभग 52,000 प्रोटेस्टर्स मारे गए थे। वहीं यूएस-बेस्ड ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने फरवरी में करीब 7,000 मौतों की जानकारी दी थी, जिनमें लगभग 6,500 प्रोटेस्टर्स शामिल थे।
होर्मुज के लिए ओमान से फाइनल पैक्ट के करीब ईरान
ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नए शिपिंग लेन्स बनाने के लिए ओमान के साथ फाइनल पैक्ट करीब है। ईरानियन फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्समैन इस्माइल बघाई के मुताबिक शिपिंग रूट का मैप तय हो चुका है, लेकिन कुछ टेक्निकल इश्यूज अभी बाकी हैं। बातचीत में सेफ नेविगेशन, एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन, मैरीटाइम सर्विसेज और क्राइम से निपटने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि ऐसा कोई एग्रीमेंट स्वीकार नहीं होगा जिसमें तेहरान को स्ट्रेट से गुजरने के लिए फीस लेने की इजाजत मिले।
होर्मुज बंद होने से ऑयल प्राइसेज और इन्फ्लेशन पर असर
कॉन्फ्लिक्ट शुरू होने से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस इसी वॉटरवे से गुजरता था। वॉर शुरू होने के बाद स्ट्रेट प्रभावी रूप से ब्लॉक है, जिससे ऑयल प्राइसेज और इन्फ्लेशन बढ़ने में मदद मिली है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शंस से पहले ट्रंप पर कॉन्फ्लिक्ट खत्म करने का दबाव भी है, क्योंकि ज्यादा फ्यूल प्राइसेज खासतौर पर उन रूरल एरियाज में बड़ा मुद्दा हैं जहां उन्हें समर्थन मिलता रहा है।
जून का सीजफायर टूटा, जुलाई में फिर बढ़ा तनाव
वॉशिंगटन और तेहरान जून में सीजफायर पर सहमत हुए थे, लेकिन जुलाई में अमेरिका ने ईरानियन शिपिंग पर दोबारा ब्लॉकेड लगा दिया। ईरान ने इसे ट्रूस का उल्लंघन बताया। इसके बाद ईरान ने यूएस अलाइज और कमर्शियल वेसल्स के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन अटैक्स किए। अब कम्पेनसेशन को लेकर दोनों तरफ से अलग-अलग मांगों ने पीस एग्रीमेंट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है।