ट्रंप की 100 फीसदी टैरिफ की धमकी पर बोले पूर्व राजदूत, ‘भारत को अभी ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं’
अमेरिका में रूस और ईरान से जुड़े तेल कारोबार पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने वाले बिल को लेकर भारत में चिंता बढ़ी है। हालांकि, पूर्व राजनयिक केपी फैबियन का कहना है कि अभी इस पर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बिल को आगे कई चरणों से गुजरना है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी ऐसा कदम आर्थिक रूप से आसान नहीं होगा।

In Short
- अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान से जुड़े बिल को 86-11 वोट से मंजूरी दी है, जिसमें रूस का तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का विकल्प है।
- पूर्व राजनयिक केपी फैबियन के मुताबिक, बिल को अभी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलनी बाकी है और उसमें बदलाव भी हो सकते हैं।
- फैबियन ने कहा कि अगर ट्रंप टैरिफ लागू करते हैं तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा।
India US trade: अमेरिका में रूस और ईरान से जुड़े तेल कारोबार पर सख्त कार्रवाई की तैयारी के बीच भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, पूर्व राजनयिक केपी फैबियन का कहना है कि अभी भारत को इस मामले पर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनका मानना है कि इस बिल को अभी अमेरिकी संसद के एक और सदन से मंजूरी मिलनी बाकी है और आगे इसमें बदलाव भी हो सकते हैं।
सीनेट ने 86-11 वोट से बिल किया पास
अमेरिकी सीनेट ने लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 को 86-11 वोट से मंजूरी दी है। अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से पास होना बाकी है। हाउस फिलहाल सेशन में नहीं है और 10 अगस्त को इसकी बैठक होने की उम्मीद है।
फैबियन के मुताबिक, हाउस इस बिल को मौजूदा रूप में मंजूर करे, यह जरूरी नहीं है। बिल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ लगाने के साथ उन्हें हटाने का विकल्प भी दिया गया है। हाउस अगर इसमें बदलाव करता है तो बिल को दोबारा सीनेट में भेजना होगा।
बिल में भारत पर 100 फीसदी टैरिफ का विकल्प
इस बिल के तहत उन देशों के सामान पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का विकल्प दिया गया है, जो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले टॉप पांच देशों में शामिल हैं। मौजूदा समय में चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया इन देशों में शामिल हैं।
बिल का मकसद रूस से होने वाले तेल कारोबार पर दबाव बढ़ाना है। अमेरिका का कहना है कि रूस से होने वाला यह कारोबार यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी अर्थव्यवस्था को मदद करता है।
ईरान के खिलाफ भी सख्त प्रावधान
इस बिल में ईरान के एनर्जी सेक्टर में निवेश करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई से जुड़ा प्रावधान भी है। इसके साथ ही 1996 के ईरान सैंक्शंस एक्ट को 2031 तक बढ़ाने की बात कही गई है।
बिल में रूस के नेताओं और अधिकारियों, जिसमें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ओलिगार्क्स और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस शामिल हैं, पर सैंक्शंस लगाने का भी प्रावधान है।
टैरिफ लगा तो तेल की कीमत बढ़ सकती है
केपी फैबियन ने कहा कि अगर बिल कांग्रेस से पास हो जाता है और ट्रंप वास्तव में टैरिफ लागू करते हैं, तो इसका असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। उनके मुताबिक तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या ट्रंप ऐसे फैसले का आर्थिक असर झेल पाएंगे। फैबियन ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पहले से मुश्किल दौर में है और लेबर डिपार्टमेंट की हालिया रिपोर्ट में हजारों नौकरियां जाने की बात सामने आई है।
भारत को अभी इंतजार करना चाहिए
फैबियन का कहना है कि बिल के आगे बढ़ने की प्रक्रिया में अभी काफी कुछ बदल सकता है। हाउस इसमें बदलाव कर सकता है और उसके बाद बिल फिर सीनेट में जा सकता है। ऐसे में उनका मानना है कि भारत को अभी इस मुद्दे पर बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है।