नेपाल की बाढ़ ने मचाई तबाही, अब बिजली व्यवस्था पर मंडराया बड़ा खतरा
नेपाल के रसुवा जिले में आई भीषण बाढ़ ने जलविद्युत सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। शुरुआती आकलन के मुताबिक 13 बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिनकी कुल क्षमता 748 मेगावाट है। बाढ़ से बांध, पावर हाउस, सड़क और ट्रांसमिशन सिस्टम को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

In Short
- नेपाल में बाढ़ से 748 मेगावाट क्षमता वाली 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित
- रसुवा और नुवाकोट की कई बड़ी बिजली परियोजनाओं पर पड़ा असर
- बिजली उत्पादन और मरम्मत को लेकर नेपाल के सामने बढ़ी चुनौती
नेपाल के रसुवा जिले में आई भीषण बाढ़ ने सिर्फ गांवों और सड़कों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि देश के जलविद्युत सेक्टर पर भी बड़ा असर डाला है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के शुरुआती आकलन के मुताबिक, बाढ़ से कुल 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें चालू और निर्माणाधीन दोनों तरह की परियोजनाएं शामिल हैं।
748 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर असर
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्रभावित परियोजनाओं की कुल क्षमता 748 मेगावाट है। इसमें 8 चालू परियोजनाएं शामिल हैं, जिनकी कुल क्षमता 354 मेगावाट है। वहीं, 5 निर्माणाधीन परियोजनाओं की क्षमता 394 मेगावाट बताई गई है।
अधिकारियों का कहना है कि अभी नुकसान का पूरा आकलन नहीं हो पाया है। बांध, पावर हाउस, ट्रांसमिशन लाइन, पहुंच मार्ग और अन्य ढांचे को हुए वास्तविक नुकसान की जानकारी जमीन पर जांच के बाद ही साफ होगी।
रसुवा की बड़ी परियोजनाएं प्रभावित
रसुवा जिले में बाढ़ की चपेट में आने वाली प्रमुख परियोजनाओं में 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1, 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना और 120 मेगावाट की रसुवा-भोटेकोशी शामिल हैं।
इसके अलावा 78 मेगावाट की सान्जेन खोला, 22 मेगावाट की चिलिमे, 20 मेगावाट की लांगटांग खोला और 6.42 मेगावाट की अपर मेलुंग-ए जैसी परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। ये सभी परियोजनाएं भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणाली से जुड़ी हैं, जहां बाढ़ का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला।
नुवाकोट की परियोजनाओं पर भी पड़ा असर
बाढ़ का प्रभाव सिर्फ रसुवा तक सीमित नहीं रहा। पड़ोसी नुवाकोट जिले की कई जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
नुवाकोट में 24 मेगावाट की त्रिशूली, 14.1 मेगावाट की देवीघाट, 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए और 25 मेगावाट की सौर परियोजना प्रभावित हुई हैं। वहीं निर्माणाधीन परियोजनाओं में 37 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3बी और 15.6 मेगावाट की मिडिल त्रिशूली गंगा शामिल हैं।
बिजली उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर असर
नेपाल की बिजली व्यवस्था काफी हद तक जलविद्युत पर निर्भर है। ऐसे में 748 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं का प्रभावित होना बिजली उत्पादन के लिए चिंता बढ़ा सकता है।
बाढ़ से मलबा जमा होना, मशीनों को नुकसान, सड़क संपर्क टूटना और बिजली ट्रांसमिशन व्यवस्था प्रभावित होना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इनकी मरम्मत में समय लग सकता है, जिससे कुछ समय के लिए बिजली उत्पादन कम हो सकता है।
राहत और मरम्मत की चुनौती
बाढ़ के बाद राहत कार्यों के साथ-साथ बिजली परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। हालांकि कई इलाकों में सड़क और संपर्क व्यवस्था खराब होने के कारण नुकसान का आकलन चुनौती बना हुआ है।
यह घटना हिमालयी इलाकों में जलविद्युत परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बेहतर चेतावनी सिस्टम और मजबूत डिजाइन की जरूरत बढ़ गई है।