थर्ड मुंबई: जमीन से तैयार होगी नई सिटी, Atal Setu और Airport बनेंगे विकास की ताकत
मुंबई के पास एक नई सिटी बसाने की तैयारी हो रही है। थर्ड मुंबई यानी कर्नाला-साई चिर्नर न्यू टाउन को अटल सेतु और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सहारे विकसित किया जाएगा। एमएमआरडीए इसका मास्टरप्लान तैयार कर रहा है, जिसमें ट्रांसपोर्ट, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं पर फोकस रहेगा।

In Short
- थर्ड मुंबई 323.44 वर्ग किमी क्षेत्र में विकसित होने वाली नई प्लान्ड सिटी होगी, जिसमें 124 गांव शामिल हैं।
- एमएमआरडीए को न्यू टाउन डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाया गया है और सिंगापुर की कंपनी सुरबाना जुरोंग मास्टरप्लान तैयार करेगी।
- अटल सेतु और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बढ़ने के बाद इस क्षेत्र में रोजगार और रियल एस्टेट ग्रोथ की उम्मीद बढ़ी है।
मुंबई के पास एक नई सिटी बसाने की तैयारी चल रही है, जिसे थर्ड मुंबई या कर्नाला-साई चिर्नर (केएससी) न्यू टाउन के नाम से जाना जा रहा है। यह नया शहर रायगढ़ जिले में 323.44 वर्ग किमी क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसका मकसद एक ऐसी प्लान्ड सिटी बनाना है, जहां ट्रांसपोर्ट, रोजगार और बेसिक सुविधाएं पहले से तय योजना के हिसाब से विकसित हों। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए एमएमआरडीए अब इसका लैंड-यूज प्लान और मास्टरप्लान तैयार कर रहा है, जो इस पूरे विकास की नींव बनेगा।
एमएमआरडीए को मिली न्यू टाउन डेवलपमेंट अथॉरिटी की जिम्मेदारी
थर्ड मुंबई प्रोजेक्ट के लिए एमएमआरडीए यानी मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी को न्यू टाउन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एनटीडीए) बनाया गया है। यह क्षेत्र उरण, पेन और पनवेल तालुका के 124 गांवों में फैला हुआ है। एमएमआरडीए साल 1975 से मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन की प्लानिंग और डेवलपमेंट का काम कर रहा है। अब इसी अनुभव के आधार पर इस नए शहर की प्लानिंग की जा रही है।
अटल सेतु और नवी मुंबई एयरपोर्ट से बढ़ी उम्मीद
थर्ड मुंबई को विकसित करने का विचार साल 2024 में 21.8 किमी लंबे अटल सेतु के शुरू होने के बाद तेजी से आगे बढ़ा। इस ब्रिज ने मुंबई और नवी मुंबई के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत किया और रायगढ़ क्षेत्र में डेवलपमेंट की संभावनाएं बढ़ाईं। इसके अलावा नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी इस इलाके के लिए बड़ा बदलाव लाने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इन्हीं बड़े प्रोजेक्ट्स के कारण इस क्षेत्र में नई इकोनॉमिक एक्टिविटी और रियल एस्टेट ग्रोथ की उम्मीद बढ़ी है।
323 वर्ग किमी में से करीब 104 वर्ग किमी जमीन होगी डेवलप
हालांकि केएससी न्यू टाउन का पूरा क्षेत्र 323.44 वर्ग किमी है, लेकिन इसमें कई गांव, फॉरेस्ट एरिया और ग्रीन जोन शामिल हैं। ऐसे में करीब 104 वर्ग किमी जमीन को ही डेवलप किया जा सकेगा। लैंड एक्विजिशन की प्रक्रिया मार्च 2026 से शुरू हुई थी। इसमें जमीन मालिकों को 22.5% डेवलप्ड लैंड, मॉनेटरी कंपनसेशन या ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) और फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) के जरिए मुआवजे के विकल्प दिए गए हैं।
कुछ गांवों का विरोध, लैंड-यूज सर्वे पर असर
इस प्रोजेक्ट को लेकर कुछ गांवों के लोगों ने विरोध भी जताया है। उनका कहना है कि जमीन लेने की प्रक्रिया सही नहीं है और उन्होंने इसे "लैंड ग्रैब" बताया है। विरोध के कारण कुछ हिस्सों में लैंड-यूज सर्वे की रफ्तार धीमी हुई है। हालांकि एमएमआरडीए को उम्मीद है कि लैंड-यूज प्लान अगस्त के अंत तक तैयार हो जाएगा।
सिंगापुर की कंपनी बनाएगी थर्ड मुंबई का मास्टरप्लान
थर्ड मुंबई के डेवलपेबल एरिया का मास्टरप्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सिंगापुर की अर्बन डेवलपमेंट कंसल्टेंसी सुरबाना जुरोंग को दी गई है। यह कंपनी शहर की लेआउट प्लानिंग, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और बेसिक यूटिलिटीज की योजना तैयार करेगी। इस मास्टरप्लान में यह तय किया जाएगा कि नया शहर किस तरह से विकसित होगा और यहां रहने वालों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी।
रोजगार और तेज ट्रांसपोर्ट होंगे सबसे बड़ी चुनौती
एक्सपर्ट्स का मानना है कि थर्ड मुंबई की सफलता सिर्फ घर बनाने से तय नहीं होगी, बल्कि यहां रोजगार के मौके और मजबूत ट्रांसपोर्ट नेटवर्क जरूरी होगा। नाइट फ्रैंक के गुलाम जिया के अनुसार नवी मुंबई की बड़ी चुनौती यह रही कि यहां रहने वाले ज्यादातर लोग काम के लिए मुंबई पर निर्भर रहे। इसलिए थर्ड मुंबई को एक सफल सैटेलाइट सिटी बनाने के लिए बेहतर मास ट्रांसपोर्ट और लोकल जॉब्स पर ध्यान देना होगा।
डेवलपर्स को दिख रही बड़ी संभावनाएं
रियल एस्टेट डेवलपर्स का मानना है कि अटल सेतु और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कारण मुंबई-रायगढ़ बेल्ट में विकास की नई संभावनाएं बनेंगी। नियो लिव के फाउंडर और सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से करजत और खोपोली जैसे इलाकों को भी फायदा मिलेगा। वहीं वोमेकी ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन गौरव के सिंह ने इसे शुरुआत से प्लान्ड सिटी बनाने का बड़ा मौका बताया।
एमएमआरडीए ने साफ किया है कि थर्ड मुंबई एक लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट है और इसके बड़े नतीजे आने में 5 से 10 साल लग सकते हैं। इस नई सिटी की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि ट्रांसपोर्ट, रोजगार, यूटिलिटीज और अर्बन प्लानिंग एक साथ कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं।