Tata Sons पर IPO का बढ़ता दबाव, Jardine Matheson के मॉडल से निकल सकता है समाधान
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रुप अपनी इस प्रमुख कंपनी को प्राइवेट रखना चाहता है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियमों के चलते लंबे समय तक IPO टालना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में करीब 194 साल पुराने Hong Kong के कारोबारी समूह Jardine Matheson का अनुभव टाटा संस के लिए रास्ता दिखा सकता है।

158 साल पुराने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons अब एक अहम मोड़ पर है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रुप अपनी इस प्रमुख कंपनी को प्राइवेट रखना चाहता है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियमों के चलते लंबे समय तक IPO टालना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में करीब 194 साल पुराने Hong Kong के कारोबारी समूह Jardine Matheson का अनुभव टाटा संस के लिए रास्ता दिखा सकता है।
RBI के नियम ने बढ़ाया दबाव
पिछले हफ्ते RBI ने टाटा संस को सिस्टमैटिकली इंपॉर्टेंट शैडो लेंडर्स की अपडेटेड लिस्ट में बरकरार रखा। इस लिस्ट की सभी 17 कंपनियों का पब्लिक होना जरूरी है और 16 पहले ही शेयर बाजार में लिस्ट हैं। Tata Sons ने IPO से बचने के लिए अपना एक अहम रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की पेशकश की है, लेकिन आवेदन पर अब तक फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में कंपनी को IPO की तैयारी शुरू करनी पड़ सकती है।
आईपीओ का दबाव Tata Sons के दो बड़े शेयरधारकों के बीच तनाव बढ़ा सकता है। Tata Trusts के पास 66% हिस्सेदारी है, जबकि Shapoorji Pallonji Group (SP Group) के पास 18.4% हिस्सेदारी है। SP Group अपनी Tata Sons हिस्सेदारी Tata Sons की मंजूरी के बिना बेच नहीं सकता। कर्ज के दबाव में SP Group लंबे समय से IPO या उचित निकासी की मांग कर रहा है।
Jardine Matheson ने कैसे सुलझाया था ऐसा संकट?
Jardine Matheson ने कुछ साल पहले अपनी जटिल होल्डिंग संरचना को सरल किया। उसकी एक होल्डिंग कंपनी Jardine Strategic Ltd. के पास खुद Jardine Matheson में करीब 59% हिस्सेदारी थी। इस वजह से दोनों कंपनियों के शेयरों पर बाजार ने डिस्काउंट लगाया।
2021 में Jardine Matheson ने 5.5 अरब डॉलर में Jardine Strategic को खरीद लिया और ढांचे को सरल किया। इसके बाद भी होल्डिंग-कंपनी डिस्काउंट बना रहा, लेकिन इसमें कमी आई और 2020 के बाद प्रति शेयर डिविडेंड लगातार बढ़ा।
टाटा संस के सामने क्या ऑप्शन है?
इसी मॉडल से Tata Sons SP Group की हिस्सेदारी खरीदने पर विचार कर सकता है। इसके लिए कर्ज जुटाकर SP Group की 18.4% हिस्सेदारी खरीदी जा सकती है। Jardine के होल्डिंग-कंपनी डिस्काउंट को आधार मानें तो इसका मूल्य 20 अरब से 30 अरब डॉलर के बीच हो सकता है। इससे SP Group को कर्ज चुकाने के लिए नकदी मिल सकती है और Tata Trusts को किसी बाहरी कारोबारी के हाथ में बड़ी हिस्सेदारी जाने की चिंता कम होगी।
इसके बाद Tata Sons IPO के जरिए अधिग्रहण का कर्ज चुका सकता है। अलग-अलग वोटिंग अधिकार वाले नए शेयर जारी करने से Tata Trusts बोर्ड पर अपना नियंत्रण बनाए रख सकते हैं और अपने परोपकारी कामों के लिए जरूरी डिविडेंड भी सुरक्षित रख सकते हैं।