टाटा ग्रुप में बड़ा नेतृत्व संकट! चंद्रशेखरन के इस्तीफे से ₹10 लाख करोड़ की निवेश योजनाओं पर बढ़ी चिंता
टाटा ग्रुप में बड़ा लीडरशिप बदलाव उसके कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स की दिशा बदल सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, नटराजन चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के फैसले के बाद निवेश रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। अब सेमीकंडक्टर से एयर इंडिया तक कई बड़े बिजनेस पर नजर टिकी है।

In Short
- चंद्रशेखरन के जाने के बाद टाटा ग्रुप के 120 अरब डॉलर के निवेश प्लान को लेकर अनिश्चितता बढ़ी।
- ब्लूमबर्ग के मुताबिक, बोर्ड सेमीकंडक्टर, एयरलाइन और डिजिटल जैसे बड़े निवेशों से पहले बेहतर रिटर्न देखना चाहता है।
- नोएल टाटा की भूमिका अब अहम होगी और ग्रुप का फोकस तेज विस्तार से कैपिटल डिसिप्लिन की ओर जा सकता है।
टाटा ग्रुप ऐसे समय बड़े लीडरशिप बदलाव से गुजर रहा है, जब वह सेमीकंडक्टर, एयरलाइन, बैटरी, एआई डेटा सेंटर और डिजिटल बिजनेस जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश कर रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन के फरवरी में पद छोड़ने के फैसले के बाद ग्रुप के अगले पांच साल के 120 अरब डॉलर के निवेश प्लान को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि नई लीडरशिप आने तक कुछ प्रोजेक्ट धीमे हो सकते हैं, उनका आकार घट सकता है या उन्हें पूरा करने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि टाटा ग्रुप के अलग-अलग बड़े प्रोजेक्ट्स पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
Noel Tata की भूमिका हुई अहम
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा अब ग्रुप के लीडरशिप ट्रांजिशन में सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं। टाटा ट्रस्ट्स के तहत 13 चैरिटेबल संस्थाएं आती हैं और इनके पास टाटा संस की करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नोएल टाटा तेज कैपिटल स्पेंडिंग के बजाय ऐसे निवेश को प्राथमिकता देते रहे हैं, जिनसे कम समय में रिटर्न मिलने की संभावना हो।
बड़े खर्च से पहले बोर्ड चाहता है रिटर्न
रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के ऐलान से पहले ही टाटा संस बोर्ड निवेश रणनीति की समीक्षा कर रहा था। खास तौर पर सेमीकंडक्टर फैब, एयरलाइन और कंज्यूमर टेक बिजनेस जैसे ज्यादा कैपिटल वाले प्रोजेक्ट्स पर खर्च को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, बोर्ड आगे और पैसा लगाने से पहले मौजूदा निवेश से मिलने वाले रिटर्न का साफ सबूत चाहता है।
सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट पर सबसे ज्यादा नजर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में टाटा के चिप फैब प्रोजेक्ट को सबसे अहम योजनाओं में से एक बताया गया है। यह प्रोजेक्ट भारत में बड़े स्तर पर घरेलू चिप मैन्युफैक्चरिंग तैयार करने और चीन पर निर्भरता घटाने की योजना से जुड़ा है। हालांकि टेक्नोलॉजी एक्सेस और ऑपरेशनल देरी के कारण शुरुआत कम एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ हो सकती है। वहीं टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का असम स्थित चिप पैकेजिंग प्लांट अगले साल शुरू होने की योजना पर बना हुआ है।
Agratas ने बैटरी प्लान की रफ्तार घटाई
रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा की बैटरी यूनिट Agratas भी अब अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है। चीनी मैन्युफैक्चरर्स के मुकाबले बढ़ते कॉस्ट गैप और जरूरी टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप नहीं मिलने के बाद कंपनी ने तेजी से कमर्शियल स्केल पर बैटरी सेल प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना छोड़ दी है। फिलहाल फोकस पहले टेक्नोलॉजी को साबित करने और उसके बाद अरबों डॉलर का अतिरिक्त निवेश करने पर है।
Air India को पटरी पर लाना बड़ी चुनौती
ब्लूमबर्ग के अनुसार, एयर इंडिया का टर्नअराउंड भी टाटा ग्रुप के सामने बड़ी चुनौती है। 31 मार्च को खत्म हुए साल में एयरलाइन को रिकॉर्ड नुकसान हुआ। जून 2025 की विमान दुर्घटना और जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण लंबे हुए फ्लाइट रूट्स ने भी कंपनी पर दबाव बढ़ाया। ग्रुप एयर इंडिया को लेकर अपनी कुछ महत्वाकांक्षाएं पहले ही कम कर चुका है और एयरलाइन को जल्द नया सीईओ भी मिलने वाला है।
Tata Digital में चल रही रिस्ट्रक्चरिंग
रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा डिजिटल की मैनेजमेंट टीम ने ऑपरेशंस और लगातार हो रहे नुकसान को संभालने के लिए करीब 1 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग मांगी थी। बोर्ड ने इसके बदले लॉस कम करने, एग्जीक्यूशन सुधारने और अतिरिक्त निवेश को सही ठहराने वाला विस्तृत रोडमैप मांगा। इसके बाद कंपनी मैनेजमेंट लेयर्स घटा रही है, कुछ हिस्सों में हेडकाउंट कम कर रही है और प्रमुख बिजनेस में नई लीडरशिप ला रही है।
TCS के सामने भी बदल रहा कारोबारी माहौल
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ग्रुप के लिए लंबे समय से मजबूत कैश सपोर्ट रही टीसीएस भी अनिश्चित दौर में है। एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी स्पेंडिंग में सुस्ती और एआई की ओर तेजी से हो रहे बदलाव ने दबाव बढ़ाया है। पिछले 18 महीनों में टीसीएस ने चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर और हेड ऑफ एक्विजिशंस जैसे सीनियर पद जोड़े हैं। कंपनी अब एक्विजिशन और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के विकल्प भी ज्यादा सक्रियता से तलाश रही है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, चंद्रशेखरन के दौर में टाटा ग्रुप ने एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और डिजिटल जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। अब उनकी विदाई के बाद ग्रुप का फोकस तेज विस्तार से हटकर कैपिटल डिसिप्लिन, मौजूदा निवेश से रिटर्न और बड़े प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा सतर्क खर्च की ओर जा सकता है।