सुभाष चंद्रा पर ED का एक्शन! ₹1,322 करोड़ के लोन फ्रॉड में मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज

मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ईडी ने ₹1,322 करोड़ के कथित लोन फ्रॉड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। इस मामले में उनकी नेटवर्थ को लेकर कई सवाल उठे हैं। आखिर कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद और जी एंटरटेनमेंट ने क्या सफाई दी? जानिए।

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In Short

  • सुभाष चंद्रा के खिलाफ ₹1,322 करोड़ के कथित लोन फ्रॉड मामले में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया।
  • ₹980 करोड़ के दो लोन लेने के लिए नेटवर्थ बढ़ाकर दिखाने का आरोप, सीबीआई की एफआईआर के आधार पर कार्रवाई।
  • जी एंटरटेनमेंट ने कहा कि मामला सुभाष चंद्रा और प्रमोटर कंपनियों से जुड़ा है, कंपनी के कारोबार पर कोई असर नहीं।

By BT बाज़ार डेस्क:

मीडिया कारोबारी और पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके खिलाफ एक बड़े लोन फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई शुरू की है। यह मामला एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (एलआईसीएचएफएल) से लिए गए लोन और उसे नहीं चुकाने से जुड़ा है। इसमें सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आइए जानते हैं कि ईडी ने किस आधार पर केस दर्ज किया, कितना लोन लिया गया और कंपनी ने इस मामले पर क्या सफाई दी है।

₹1,322 करोड़ के नुकसान पर ईडी ने दर्ज किया केस

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने 2 नवंबर को सुभाष चंद्रा के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने अपनी नेटवर्थ बढ़ाकर दिखाई और एलआईसीएचएफएल से लोन लिया, जिसे बाद में नहीं चुकाया गया।

एलआईसीएचएफएल की शिकायत के मुताबिक, दो लोन के जरिए कुल ₹980 करोड़ दिए गए थे। इन लोन के डिफॉल्ट होने से कंपनी को ₹1,322 करोड़ का नुकसान होने का दावा किया गया है। ईडी ने सीबीआई की एफआईआर के आधार पर यह कार्रवाई की है।

किन कंपनियों को दिया गया था लोन?

पहला लोन ₹500 करोड़ का था, जो वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। इसमें पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को-बॉरोअर थी। यह लोन पुराने कर्ज के टेकओवर, अतिरिक्त फंड और बिजनेस बढ़ाने के लिए मंजूर हुआ था।

प्रतीकात्मक तस्वीर

दूसरा लोन ₹480 करोड़ का था, जो डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को मिला था। इसमें स्पिरिट इंफ्रा पावर एंड मल्टी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड को-बॉरोअर थी। यह रेंटल डिस्काउंटिंग स्कीम के तहत दिया गया था। दोनों लोन के लिए सुभाष चंद्रा ने पर्सनल गारंटी दी थी।

नेटवर्थ को लेकर क्या है विवाद?

एलआईसीएचएफएल के मुताबिक, 28 मार्च 2018 को डीजेएम एंड कंपनी ने सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ करीब ₹59,000 करोड़ बताई थी। वहीं 6 जुलाई 2018 को एमपीजे एंड कंपनी के सर्टिफिकेट में उनकी नेटवर्थ ₹40,562 करोड़ दिखाई गई थी।

लेकिन बाद में इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के दौरान चंद्रा ने इन आंकड़ों से इनकार किया। एफआईआर के मुताबिक, उन्होंने 2024 में अपनी नेटवर्थ ₹31.79 करोड़ और 2017-18 में अधिकतम ₹40,000 करोड़ बताई थी। सीबीआई का आरोप है कि गलत दस्तावेजों के जरिए लोन मंजूर करवाए गए।

एनसीएलएटी तक कैसे पहुंचा मामला?

एलआईसीएचएफएल उन कर्जदाताओं में शामिल है, जिन्होंने एनसीएलटी के रिपेमेंट प्लान को एनसीएलएटी में चुनौती दी है। इस प्लान के तहत करीब ₹22,006 करोड़ के दावों के मुकाबले सुभाष चंद्रा की निजी संपत्ति से कर्जदाताओं को सिर्फ ₹6.5 करोड़ मिलने की बात थी।

जी एंटरटेनमेंट ने क्या दी सफाई?

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रवक्ता ने साफ किया कि ईडी का मामला सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत हैसियत और प्रमोटर कंपनियों से जुड़ा है। इसका जी एंटरटेनमेंट या उसके कारोबार पर कोई असर नहीं है।

फिलहाल ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। सुभाष चंद्रा पर लगे आरोपों की अभी जांच होनी है और इन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है।

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