अमेरिकी दबाव के बीच रूस का बड़ा दांव, भारत से कहा- जितना तेल चाहिए, उतना देने को तैयार
रूस ने भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए जितना जरूरी हो उतना कच्चा तेल देने की पेशकश की है। रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने अमेरिकी प्रतिबंध और टैरिफ की कोशिशों को दबाव की रणनीति बताया। जुलाई में रूसी तेल की भारत के आयात में रिकॉर्ड हिस्सेदारी रही।

In Short
- रूस ने कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए जितना कच्चा तेल चाहिए, वह उतनी सप्लाई करने को तैयार है
- जुलाई में भारत के कुल क्रूड इंपोर्ट में रूसी तेल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 50.83% रही।
- डेनिस अलीपोव ने रूस पर नए प्रतिबंध और टैरिफ लगाने की कोशिशों को “दबाव की रणनीति” बताया।
भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस जितना जरूरी हो उतना कच्चा तेल सप्लाई करने को तैयार है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने कहा कि मॉस्को भारत की मांग के मुताबिक तेल उपलब्ध करा सकता है। उन्होंने रूसी तेल बिक्री पर प्रतिबंध और टैरिफ बढ़ाने की कोशिशों को “दबाव की रणनीति” बताया।
अलीपोव ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “भारत को जितना तेल चाहिए, हम उतना देने को तैयार हैं।” उन्होंने कहा कि प्रतिबंध और टैरिफ लगाने वाले देशों ने ईमानदार सहयोग के बजाय दबाव का रास्ता चुना है। इसी वजह से वे भारत को रूस से बेहतर तेल सौदा नहीं दे पा रहे हैं।
जुलाई में आधे से ज्यादा क्रूड रूस से आया
रॉयटर्स के मुताबिक जुलाई में रूस भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर रहा। देश के कुल क्रूड इंपोर्ट में रूस की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 50.83% रही। भारत ने जुलाई में रूस से रोजाना 24.7 लाख बैरल तेल खरीदा। एक साल पहले के मुकाबले रूसी तेल का आयात 62.4% बढ़ा।
अमेरिकी टैरिफ बिल से बढ़ा दबाव
लिंडसे ग्राहम की ओर से तैयार प्रतिबंध बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100% टैरिफ लगाने की शक्ति देगा। चीन, भारत और तुर्की रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं।
बिल पिछले महीने अमेरिकी सीनेट से पास हुआ, लेकिन ब्लूमबर्ग के मुताबिक प्रतिनिधि सभा में इसका विरोध बढ़ रहा है। तेल की कीमतें बढ़ने और राष्ट्रपति की टैरिफ शक्तियां बढ़ने की चिंता के कारण यह नवंबर के मध्यावधि चुनाव तक अटका रह सकता है।
भारत अपने हितों के लिए खड़ा हो सकता है’
अलीपोव ने कहा कि भारत पहले भी अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की क्षमता दिखा चुका है। उनके मुताबिक रूस के साथ तेल कारोबार भारत के लिए अहम है। उन्होंने चेतावनी दी कि रूसी तेल को वैश्विक बाजार से हटाने पर ऊर्जा बाजार में बड़ी दिक्कत पैदा हो सकती है। अलीपोव ने कहा, “दुनिया रूसी तेल के बिना नहीं चल पाएगी।” उन्होंने कहा कि रूस भारत को तेल बेचना चाहता है और भारत भी इसे खरीदने में दिलचस्पी रखता है।