RBI के रेपो रेट स्थिर रखने के फैसले से बॉन्ड बाजार में तेजी, रुपये को भी मिली मजबूती

ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.3% मजबूत होकर 95.1025 पर पहुंच गया। वहीं, 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 4 बेसिस प्वाइंट घटकर 6.78% रह गई। यील्ड में गिरावट का मतलब बॉन्ड की कीमतों में बढ़त माना जाता है।

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By BT बाज़ार डेस्क:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने के फैसले के बाद बुधवार को सरकारी बॉन्ड में खरीदारी बढ़ गई। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से रुपये को भी मजबूती मिली।

ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.3% मजबूत होकर 95.1025 पर पहुंच गया। वहीं, 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 4 बेसिस प्वाइंट घटकर 6.78% रह गई। यील्ड में गिरावट का मतलब बॉन्ड की कीमतों में बढ़त माना जाता है।

RBI के 'वेट एंड वॉच' रुख से बाजार को राहत

RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा और 'न्यूट्रल' पॉलिसी स्टांस बनाए रखा। इससे संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रखते हुए आगे के फैसले करेगा।

ब्लूमबर्ग के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक Credit Agricole CIB के सीनियर स्ट्रैटेजिस्ट और इकोनॉमिस्ट डेविड फॉरेस्टर ने कहा, "RBI खाद्य और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के दूसरे दौर के असर के संकेत मिलने का इंतजार कर रहा है। इसके बाद ही ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विचार किया जाएगा।"

उन्होंने कहा कि बाजार पहले मान रहा था कि MPC हेडलाइन महंगाई पर ज्यादा तेजी से प्रतिक्रिया दे सकती है। ऐसे में RBI का Dovish Hold स्थानीय बॉन्ड बाजार के लिए पॉजिटिव साबित हुआ।

कच्चे तेल में नरमी से रुपये को मिला समर्थन

डेविड फॉरेस्टर के मुताबिक, RBI के नरम रुख का असर सामान्य तौर पर रुपये के लिए नकारात्मक हो सकता था, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दोबारा खुलने की संभावना बनी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जिसने भारतीय मुद्रा को समर्थन दिया।

फिलहाल दरें बदलने की जल्दबाजी नहीं

Sumitomo Mitsui Banking Corp. के एशिया मैक्रो स्ट्रैटेजी प्रमुख जेफ एनजी ने कहा, "महंगाई फिलहाल RBI की चिंता के स्तर तक नहीं पहुंची है। ऐसे में केंद्रीय बैंक के पास इंतजार करने की गुंजाइश है। फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की कोई तत्काल जरूरत नहीं दिखती, हालांकि वित्त वर्ष के अंत तक जरूरत पड़ने पर दरें बढ़ाई जा सकती हैं।"

वहीं, 360 ONE Asset के सीनियर इकोनॉमिस्ट विक्रम छाबड़ा का कहना है कि एल नीनो की मजबूत होती स्थिति और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए RBI का 'वेट एंड वॉच' रुख उचित है। उन्होंने कहा कि यदि भू-राजनीतिक हालात सामान्य रहते हैं और मानसून सामान्य के करीब रहता है तो RBI लंबे समय तक ब्याज दरों में बदलाव नहीं कर सकता। हालांकि, कच्चा तेल ऊंचे स्तर पर बना रहने और कमजोर मानसून से खाद्य महंगाई बढ़ने की स्थिति में वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक ब्याज दरें बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।

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