घर खरीदने के बजाय जमीन में पैसा लगा रहे युवा अमीर! प्राइवेसी और लग्जरी लाइफस्टाइल बनी नई पसंद
भारत के युवा अमीर खरीदारों की रियल एस्टेट पसंद तेजी से बदल रही है। अब वे सिर्फ घर खरीदने के बजाय निवेश, प्राइवेसी और बेहतर लाइफस्टाइल को ध्यान में रख रहे हैं। लेकिन क्या बाजार में उनकी जरूरत के हिसाब से पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं? जानिए पूरी कहानी।

In Short
- युवा अमीर खरीदार रियल एस्टेट को अब सिर्फ घर नहीं बल्कि वेल्थ डायवर्सिफिकेशन के विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
- जमीन, खुली जगह और कम घनत्व वाली लाइफस्टाइल प्रॉपर्टी में बढ़ रही है दिलचस्पी।
- अफोर्डेबल हाउसिंग की कमी और बढ़ती कीमतें युवा खरीदारों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
भारत के युवा अमीर खरीदारों का नजरिया रियल एस्टेट को लेकर तेजी से बदल रहा है। स्टार्टअप फाउंडर्स, उद्यमी, टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स और पहली पीढ़ी के धन बनाने वाले लोग अब प्रॉपर्टी को सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि वेल्थ डायवर्सिफिकेशन के एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
इन खरीदारों की पसंद अब बड़े अपार्टमेंट तक सीमित नहीं है। वे जमीन, कम घनत्व वाली हाउसिंग और ऐसी प्रॉपर्टी की तलाश कर रहे हैं, जहां उन्हें ज्यादा प्राइवेसी, खुली जगह और अपनी जरूरत के हिसाब से बदलाव करने की आजादी मिले।
रियल एस्टेट अब सिर्फ घर खरीदने तक सीमित नहीं
समिरा हैबिटैट्स (इंडिया) लिमिटेड की ग्रुप CEO और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सोनाली राजपूत के मुताबिक, युवा अमीर खरीदार रियल एस्टेट को सिर्फ घर खरीदने के नजरिए से नहीं देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कई खरीदारों के पास पहले से ही फाइनेंशियल एसेट्स में निवेश है और अब वे रियल एस्टेट के जरिए अपनी संपत्ति को डायवर्सिफाई करना चाहते हैं। साथ ही वे बेहतर लाइफस्टाइल भी चाहते हैं।
यही वजह है कि जमीन में उनकी दिलचस्पी बढ़ रही है। तैयार घर या अपार्टमेंट के मुकाबले जमीन खरीदारों को ज्यादा विकल्प देती है। वे इसका इस्तेमाल निवेश, सेकंड होम, बड़े परिवार के घर या भविष्य के लिए विरासत वाली संपत्ति के रूप में कर सकते हैं।
लग्जरी की परिभाषा में आया बदलाव
युवा खरीदारों के लिए लग्जरी का मतलब अब सिर्फ बड़ा अपार्टमेंट नहीं रह गया है। वे अब प्राइवेसी, खुली जगह, प्रकृति के करीब रहना, कम भीड़-भाड़ और अपनी पसंद के हिसाब से घर बनाने की आजादी को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
हालांकि, इस बढ़ती दिलचस्पी के बावजूद हर युवा खरीदार के लिए घर खरीदना आसान नहीं है।
अफोर्डेबल घरों की कमी बनी बड़ी चुनौती
UK रियल्टी के डायरेक्टर देवांशु बंसल ने नाइट फ्रैंक के H1 2026 डेटा का हवाला देते हुए बताया कि 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले सेगमेंट में बिना बिके घरों की संख्या सालाना आधार पर 7% घटी है। वहीं 2 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये वाले सेगमेंट में बिना बिके घरों की संख्या 43% बढ़ी है।
उनके मुताबिक, जिन घरों को युवा खरीदार खरीद सकते हैं, उनकी संख्या कम हो रही है, जबकि बाजार में जो नए घर आ रहे हैं, वे उनकी पहुंच से बाहर हैं।
मुंबई जैसे शहरों में ज्यादा दबाव
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में यह चुनौती और ज्यादा दिखाई देती है। बंसल के मुताबिक, नाइट फ्रैंक के आंकड़ों के अनुसार MMR उन दो भारतीय बाजारों में शामिल है, जहां EMI और आय का अनुपात 50% की अफोर्डेबिलिटी सीमा से ऊपर है।
उन्होंने कहा कि मुंबई में 28 साल का पहला बार घर खरीदने वाला युवा खरीदारी की इच्छा तो रखता है, लेकिन एक सिंगल इनकम के हिसाब से कीमतों वाला प्रोडक्ट आसानी से उपलब्ध नहीं है।
खरीदारों की सोच को बिक्री में बदलने की जरूरत
देवांशु बंसल ने कहा कि डेवलपर्स को युवा खरीदारों की सकारात्मक सोच को सीधे मांग नहीं मानना चाहिए। इसे बिक्री में बदलने के लिए ऐसे घर बनाने होंगे जो उनकी आर्थिक स्थिति के अनुसार हों।
इसके लिए छोटे लेकिन बेहतर तरीके से डिजाइन किए गए घर, सही कीमत और समय पर डिलीवरी जैसे कदम जरूरी हैं। क्योंकि युवा खरीदारों के लिए सही प्रोडक्ट उपलब्ध होगा, तभी उनकी रुचि वास्तविक खरीदारी में बदल पाएगी।