RBI का ₹7 लाख करोड़ का VRRR ऑक्शन, FCNR से आई भारी नकदी के बाद क्यों बढ़ी हलचल?
बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी अतिरिक्त नकदी को काबू करने के लिए RBI बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्रीय बैंक 7 सितंबर को ₹7 लाख करोड़ का 30 दिन वाला VRRR ऑक्शन करेगा। FCNR (B) डिपॉजिट से आए भारी इनफ्लो के बाद अब सबकी नजर इस ऑक्शन पर है।

In Short
- RBI 7 सितंबर को ₹7 लाख करोड़ का 30 दिन वाला VRRR ऑक्शन करेगा।
- FCNR (B) डिपॉजिट से भारी इनफ्लो के बाद बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी बढ़ी है।
- RBI जरूरत पड़ने पर VRRR के अलावा Incremental CRR और sell-buy swap जैसे ऑप्शन भी अपना सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए सोमवार, 7 सितंबर को बड़ा कदम उठाने जा रहा है। RBI ₹7 लाख करोड़ का Variable Rate Reverse Repo यानी VRRR ऑक्शन करेगा। इस ऑक्शन की अवधि 30 दिन होगी।
अभी तक RBI आमतौर पर एक दिन से लेकर सात दिन तक के VRRR ऑक्शन करता रहा है। ऐसे में 30 दिन की अवधि वाला यह ऑक्शन खास माना जा रहा है।
बैंकिंग सिस्टम में इतनी नकदी आई कहां से?
बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी नकदी की बड़ी वजह Foreign Currency Non-Resident Bank यानी FCNR (B) डिपॉजिट हैं। RBI ने जून में एक स्पेशल रियायती स्वैप विंडो शुरू की थी।
इस स्कीम के जरिए करीब 127 अरब डॉलर जुटाए गए। बाजार को 80 से 90 अरब डॉलर आने की उम्मीद थी। इससे पहले 2013 में इसी तरह की विंडो से करीब 26 अरब डॉलर जुटाए गए थे।
FCNR (B) डिपॉजिट और सरकारी खर्च की वजह से बैंकों के पास इस समय ज्यादा नकदी मौजूद है।
क्या होता है VRRR ऑक्शन?
VRRR RBI के लिए बाजार से अतिरिक्त नकदी निकालने का एक तरीका है। इसमें बैंक अपनी अतिरिक्त रकम कुछ समय के लिए RBI के पास रखते हैं।
इसके बदले RBI बैंकों को ब्याज देता है। इसमें ब्याज दर पहले से तय नहीं होती, बल्कि बैंकों की बोली के आधार पर तय होती है। इसीलिए इसे Variable Rate Reverse Repo कहा जाता है।
सीधे शब्दों में कहें तो बैंक अगर अपनी अतिरिक्त रकम RBI के पास जमा करते हैं तो बाजार में उपलब्ध नकदी कम हो जाती है।
अतिरिक्त नकदी से RBI को क्या परेशानी?
सिस्टम में जरूरत से ज्यादा पैसा रहने पर छोटी अवधि की ब्याज दरें नीचे आ सकती हैं। ज्यादा नकदी खर्च और कर्ज को बढ़ावा दे सकती है, जिससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
इसी वजह से RBI को यह संतुलन बनाए रखना होता है कि बाजार में न तो बहुत कम पैसा रहे और न ही जरूरत से ज्यादा नकदी हो।
रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार
भारी FCNR (B) इनफ्लो के बाद 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 740.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
वहीं, अप्रैल-जून तिमाही में देश की वास्तविक GDP ग्रोथ उम्मीद से बेहतर 7.8 प्रतिशत रही। दूसरी तरफ महंगाई और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए RBI के लिए नकदी प्रबंधन अहम बना हुआ है।
RBI के पास और कौन-से ऑप्शन?
Nomura की चीफ इकनॉमिस्ट Sonal Varma के मुताबिक RBI सिर्फ VRRR पर निर्भर नहीं रहेगा। केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर कुछ महीनों के लिए Incremental CRR बढ़ाने और sell-buy swap जैसे दूसरे उपाय भी अपना सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि 30 दिन वाले इस बड़े ₹7 लाख करोड़ VRRR ऑक्शन में बैंक कितनी दिलचस्पी दिखाते हैं।