RBI का बड़ा दांव! डॉलर बिक्री और विदेशी निवेश से रुपये की चाल पर लगी लगाम, 6 महीने में सबसे कम हुआ उतार-चढ़ाव

भारतीय रुपये में जारी उतार-चढ़ाव अब कम होता दिख रहा है। RBI की लगातार डॉलर बिक्री, विदेशी मुद्रा योजनाओं और बाजार में बढ़ती दखल से रुपये की चाल स्थिर हुई है। वोलैटिलिटी 6 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है, जिससे बाजार में रुपये को लेकर भरोसा बढ़ रहा है।

Advertisement
AI Generated Image

In Short

  • RBI की लगातार फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में दखल से रुपये की वोलैटिलिटी 6 महीने के निचले स्तर पर पहुंची
  • विदेशी डॉलर जमा योजना से RBI को मिले करीब 40 अरब डॉलर, कुल इनफ्लो 100 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
  • रुपये की कमजोरी के डर से डॉलर खरीदने वाले आयातकों के व्यवहार में बदलाव की उम्मीद

By BT बाज़ार डेस्क:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की लगातार दखल और विदेशी डॉलर इनफ्लो बढ़ने से भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव कम हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI अब विदेशी मुद्रा बाजार में पहले से ज्यादा सक्रिय है, जिससे रुपये को एक स्थिर दिशा मिल रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब महंगे कच्चे तेल और अमेरिका-ईरान तनाव जैसी वैश्विक चुनौतियों के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

RBI लगातार बेच रहा है डॉलर

ब्लूमबर्ग ने बाजार से जुड़े ट्रेडर्स के हवाले से बताया कि RBI पिछले एक हफ्ते से लगातार विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। केंद्रीय बैंक डॉलर बेचकर डॉलर-रुपये की जोड़ी को एक सीमित दायरे में रखने की कोशिश कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, RBI की मौजूदा रणनीति पहले की तुलना में अलग है। पहले डॉलर बिक्री के बाद रुपये में अचानक तेजी आती थी, लेकिन अब केंद्रीय बैंक का लक्ष्य रुपये को ज्यादा स्थिर रखना है।

विदेशी डॉलर जमा योजना से RBI को मिली ताकत

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट में बताया गया है कि RBI की जून में शुरू की गई विदेशी डॉलर जमा योजना से केंद्रीय बैंक को अतिरिक्त मजबूती मिली है। इस योजना के तहत बैंकों को RBI के साथ रियायती फॉरेन एक्सचेंज स्वैप करने की सुविधा दी गई है।

इससे बैंकों का करेंसी रिस्क कम हुआ और उन्हें बेहतर दरों पर डॉलर जुटाने में मदद मिली। रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के जरिए आने वाले करीब 40 अरब डॉलर सीधे RBI के खाते में जा रहे हैं।

IDFC First Bank की चीफ इकोनॉमिस्ट गौरा सेन गुप्ता ने ब्लूमबर्ग को बताया कि RBI को उम्मीद है कि उसकी पूंजी जुटाने वाली योजनाओं से भारी डॉलर इनफ्लो आएगा। सभी योजनाओं को मिलाकर यह रकम करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

रुपये में उतार-चढ़ाव 6 महीने के निचले स्तर पर

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, रुपये की एक महीने की रियलाइज्ड वोलैटिलिटी घटकर 3.5% रह गई है, जबकि जून के मध्य में यह 6.1% थी। वहीं एक महीने की इम्प्लाइड वोलैटिलिटी मई के 7.2% से घटकर 4.3% पर आ गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे संकेत मिलता है कि बाजार में रुपये के तेजी से कमजोर होने का डर कम हुआ है और ट्रेडर्स अब रुपये के खिलाफ बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं।

100 रुपये प्रति डॉलर तक गिरने का खतरा हुआ कम

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट में बताया गया है कि RBI विदेशी डॉलर जमा योजना के अलावा करीब 100 अरब डॉलर की फॉरवर्ड करेंसी डिफेंस रणनीति भी चला रहा है। इसके साथ ही मार्च में सट्टेबाजी रोकने के लिए लागू किए गए कदम भी जारी हैं।

इन उपायों की वजह से बाजार में रुपये के बहुत ज्यादा कमजोर होने की आशंका कम हुई है। पहले रुपये के 100 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंचने की चिंता थी, लेकिन अब यह जोखिम घट गया है।

आयातकों की डॉलर मांग कम करने की कोशिश

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के मुताबिक, रुपये की स्थिरता का असर आयातकों के व्यवहार पर भी पड़ सकता है। पिछले एक साल में रुपया करीब 8% कमजोर हुआ है, जिसके कारण आयातकों ने भविष्य के नुकसान से बचने के लिए ज्यादा डॉलर खरीदना शुरू कर दिया था।

IDFC First Bank की गौरा सेन गुप्ता के अनुसार, RBI की कोशिश है कि आयातकों की लगातार डॉलर खरीदने की आदत कम हो और रुपये को लेकर बाजार का भरोसा मजबूत हो सके।

Read more!
Advertisement