लोन, EMI पर पड़ सकता है सीधा असर! 2023 के बाद आरबीआई पहली बार दे सकता है झटका
अक्टूबर में RBI आम लोगों को ब्याज दरों के मोर्चे पर बड़ा झटका दे सकता है। रॉयटर्स के सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने रेपो रेट बढ़ने की संभावना जताई है। बढ़ती महंगाई और कमजोर रुपये के बीच क्या RBI ब्याज दरों में बदलाव करेगा? जानिए अक्टूबर और दिसंबर को लेकर क्या हैं अनुमान।

In Short
- रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक, RBI अक्टूबर में रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर सकता है। यह 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी होगी।
- अगस्त में रिटेल महंगाई बढ़कर 4.82% पहुंच गई, जबकि इस साल डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 6% कमजोर हुआ है।
- सर्वे में शामिल अर्थशास्त्रियों ने दिसंबर में भी रेपो रेट बढ़ने की संभावना जताई है। ब्याज दर 5.75% तक पहुंच सकती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ा सकता है। रॉयटर्स के सर्वे के मुताबिक, RBI अक्टूबर में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो रेपो रेट बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाएगा। यह फरवरी 2023 के बाद ब्याज दरों में पहली बढ़ोतरी होगी। सर्वे में शामिल कई अर्थशास्त्रियों ने दिसंबर में भी ब्याज दरें बढ़ने की संभावना जताई है।
अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ने की कितनी संभावना?
रॉयटर्स ने 18 से 28 सितंबर के बीच 61 अर्थशास्त्रियों का सर्वे किया। इनमें से 35 यानी करीब 60 फीसदी अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) अक्टूबर में रेपो रेट 0.25 फीसदी बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर सकती है।
RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच होगी। इसी बैठक के आखिर में ब्याज दरों को लेकर फैसला सामने आएगा।
महंगाई ने क्यों बढ़ाई RBI की चिंता?
भारत में महंगाई एक बार फिर बढ़ रही है। अगस्त में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.82 फीसदी पहुंच गई। यह लगातार तीसरा महीना था, जब महंगाई RBI के 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर रही।
महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह एनर्जी और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है।
ICICI सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप के इकोनॉमिक्स और फिक्स्ड इनकम रिसर्च के को-हेड अभिषेक उपाध्याय के मुताबिक, मौजूदा तिमाही में महंगाई RBI के अनुमान से करीब 20 बेसिस पॉइंट ज्यादा चल रही है। उन्होंने अक्टूबर से ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद जताई है।
रुपये की कमजोरी भी बनी बड़ी चुनौती
इस साल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 6 फीसदी कमजोर हुआ है। ऐसे में RBI पर रुपये को सहारा देने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव भी बढ़ रहा है।
यस बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट इंद्रनील पान के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बाद RBI को भी दरें बढ़ाने की जरूरत समझनी होगी।
मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण एनर्जी की कीमतें बढ़ रही हैं। इसके चलते कई बड़े केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा चुके हैं या ऐसा करने पर विचार कर रहे हैं।
दिसंबर में भी बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?
रॉयटर्स के सर्वे में शामिल 53 अर्थशास्त्रियों में से 29 ने दिसंबर तक रेपो रेट में कम से कम 25 बेसिस पॉइंट की एक और बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
यह पिछले महीने के सर्वे से अलग है, जिसमें औसत अनुमान के मुताबिक मार्च 2027 तक ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं थी।
अगस्त की RBI पॉलिसी बैठक के मिनट्स में भी संकेत मिले थे कि गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत कई नीति निर्माता महंगाई का दबाव बढ़ने पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में थे।
कब तक 5.75 फीसदी रह सकता है रेपो रेट?
सर्वे के औसत अनुमानों के मुताबिक, रेपो रेट दिसंबर तक 5.75 फीसदी पहुंच सकता है और कम से कम 2028 के मध्य तक इसी स्तर पर बना रह सकता है।
अगर ऐसा होता है तो यह पिछले एक दशक में RBI के सबसे सीमित ब्याज दर बढ़ोतरी वाले दौरों में से एक हो सकता है। हालांकि, ब्याज दरों पर अंतिम फैसला RBI की मौद्रिक नीति कमेटी ही करेगी।