RBI गवर्नर बोले- डॉलर की नेट शॉर्ट पोजिशन मैनेजेबल, रुपये को संभालने के लिए बाजार पर नजर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो साल में RBI ने कमजोर रुपये को सहारा देने के लिए बड़े स्तर पर डॉलर की मंदी वाली पोजिशन बनाई थी। अब केंद्रीय बैंक के सामने इस पोजिशन को इस तरह घटाने की चुनौती है कि मुद्रा बाजार में अस्थिरता न बढ़े।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर संजय माल्होत्रा ने कहा कि नेट शॉर्ट फॉरवर्ड-डॉलर पोजिशन फिलहाल काफी मैनेजेबल है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो साल में RBI ने कमजोर रुपये को सहारा देने के लिए बड़े स्तर पर डॉलर की मंदी वाली पोजिशन बनाई थी। अब केंद्रीय बैंक के सामने इस पोजिशन को इस तरह घटाने की चुनौती है कि मुद्रा बाजार में अस्थिरता न बढ़े।
मार्केट तय करता है एक्सचेंज रेट
आरबीआई गवर्नर ने गुरुवार को प्रकाशित फाइनेंशियल एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा कि एक्सचेंज रेट अब भी बाजार तय करता है। उन्होंने कहा कि RBI की दखल की नीति में बदलाव नहीं हुआ है। इसका मकसद अत्यधिक उतार-चढ़ाव और किसी भी तरह की अनुचित सट्टेबाजी पर लगाम लगाना है।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, RBI को डॉलर जुटाने के लिए हाल में उठाए गए तीन कदमों से कम से कम 80 अरब डॉलर का इनफ्लो आने की उम्मीद है। इनमें फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट, एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग और विदेशों से फॉरेन-करेंसी बॉरोइंग शामिल हैं।
FCNR(B) स्वैप विंडो पर क्या बोले गवर्नर?
RBI ने FCNR(B) स्वैप विंडो को तय समय से एक महीने पहले बंद करने का फैसला लेकर बाजार को चौंका दिया था। माल्होत्रा ने इसे नीति में पलटाव के बजाय आंकड़ों के आधार पर किया गया “कैलिब्रेशन” बताया।
उन्होंने कहा कि डॉलर का इनफ्लो RBI और ज्यादातर बाजार प्रतिभागियों की उम्मीद से ज्यादा रहा। माल्होत्रा के मुताबिक, हर अतिरिक्त डॉलर को स्वैप करने से मिलने वाला फायदा लगातार घट रहा था, जबकि उस डॉलर से आई लिक्विडिटी को लंबे समय तक स्टेरिलाइज करने की लागत बढ़ रही थी।