प्लास्टिक करेंसी नोट शुरू करने पर विचार कर रहा RBI, चेक करें लेटेस्ट अपडेट

बढ़ती करेंसी मांग, नोट छापने की ऊंची लागत और खराब होने वाले नोटों की बढ़ती संख्या को देखते हुए केंद्रीय बैंक इस ऑप्शन की ओर देख रही है। पढ़िए पूरी खबर।

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By Gaurav Kumar:

RBI Polymer Currency Notes: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) देश में पॉलिमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोट शुरू करने की संभावना पर विचार कर रहा है। हालांकि फिलहाल यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है।

बढ़ती करेंसी मांग, नोट छापने की ऊंची लागत और खराब होने वाले नोटों की बढ़ती संख्या को देखते हुए केंद्रीय बैंक इस ऑप्शन की ओर देख रही है। 

क्या होते हैं पॉलिमर बैंकनोट्स?

पॉलिमर करेंसी नोट खास तरह के सिंथेटिक मटेरियल पॉलीप्रोपाइलीन से बनाए जाते हैं। ये पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होते हैं। पॉलिमर नोट पानी और नमी से खराब नहीं होते, आसानी से फटते नहीं हैं और उनकी उम्र भी अधिक होती है। यही वजह है कि इन्हें लंबे समय में कम खर्च वाला और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प माना जाता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI जल्द ही प्लास्टिक नोटों के सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है। अधिकारियों का मानना है कि इन नोटों की उत्पादन लागत कागज वाले नोट की तुलना में कम होती है, जबकि उनकी उपयोग अवधि सामान्य नोटों से कहीं ज्यादा होती है।

FY25 में नोट छापने में इतना आया था खर्च

RBI की FY25 की एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षित तरीके से बैंकनोट छापने का खर्च बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 5,101.4 करोड़ रुपये था। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह करेंसी नोटों की मांग में लगातार इजाफा है। वहीं FY25 के दौरान 23.8 अरब खराब या गंदे नोट नष्ट किए गए, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 12.3 प्रतिशत अधिक हैं। इनमें 500 रुपये के नोट सबसे ज्यादा और 100 रुपये के नोट दूसरे स्थान पर रहे।

दिलचस्प बात यह है कि डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ने के बावजूद देश में कैश की मांग मजबूत बनी हुई है। 15 मई तक करेंसी इन सर्कुलेशन (CiC) 11.5 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 42.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। FY27 के शुरुआती डेढ़ महीने में ही इसमें 1.15 लाख करोड़ रुपये का इजाफा दर्ज किया गया है।

पहले भी की गई थी पॉलिमर नोट लाने की कोशिश

भारत में पॉलिमर नोट लाने की कोशिश पहली बार 2012 में की गई थी। उस समय पांच शहरों में 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का ट्रायल प्रस्तावित था, लेकिन तकनीकी चुनौतियों और ATM  से जुड़ी समस्याओं के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब RBI का मानना है कि पिछले एक दशक में तकनीक काफी विकसित हो चुकी है और ATM नेटवर्क को भी ऐसे नोटों के अनुरूप तैयार किया जा सकता है।

दुनिया के अन्य देशों में चलता है पॉलिमर बैंकनोट

दुनिया के करीब 60 देशों में पहले से पॉलिमर बैंकनोट का इस्तेमाल हो रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले इन्हें अपनाया था। इसके बाद कनाडा, सिंगापुर और कई अन्य देशों ने भी प्लास्टिक नोटों को अपनी मुद्रा प्रणाली का हिस्सा बनाया।

यदि RBI इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो भारत भी उन देशों की सूची में शामिल हो सकता है जहां ज्यादा टिकाऊ, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाले पॉलिमर बैंकनोट प्रचलन में हैं।

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