रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI का एक्शन, डॉलर से लेकर हेजिंग तक बदले नियम

रुपये में गिरावट को थामने के लिए RBI ने कई अहम कदम उठाए हैं। तीन सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना डॉलर उपलब्ध कराने के लिए स्पेशल विंडो खुलेगी। विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव की सीमा घटाई गई है। साथ ही 20% रिजर्व और हेजिंग से जुड़े नियम सख्त किए गए हैं।

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In Short

  • RBI ने IOCL HPCL और BPCL की रोजाना डॉलर जरूरत पूरी करने के लिए स्पेशल विंडो खोलने का ऐलान किया।
  • विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर की गई।
  • पात्र फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट पर 20% रिजर्व और हेजिंग के लिए सख्त डॉक्यूमेंटेशन के नियम लागू होंगे।

By Sonam:

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को सहारा देने और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए कई नए उपायों का ऐलान किया है। इसके तहत तीन सरकारी तेल कंपनियों की रोजाना अमेरिकी डॉलर की जरूरत पूरी करने के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा घटाई गई है और कुछ सौदों के लिए रिजर्व रखने के साथ हेजिंग से जुड़े नियम भी सख्त किए गए हैं।

RBI के मुताबिक, यह व्यवस्था सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 से लागू होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी। इसके तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) को नामित बैंकों के जरिए अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराए जाएंगे।

तेल कंपनियों के लिए खुलेगी स्पेशल डॉलर विंडो

RBI ने मौजूदा बाजार स्थितियों का आकलन करने के बाद यह फैसला लिया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि तीनों सरकारी तेल कंपनियां अपने रोजाना के विदेशी मुद्रा खर्चों को पूरा कर सकें।

तेल कंपनियों को कच्चे तेल के आयात और दूसरे विदेशी भुगतानों के लिए अमेरिकी डॉलर की जरूरत होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का कारोबार मुख्य रूप से डॉलर में होता है। ऐसे में रुपये और डॉलर की विनिमय दर में बदलाव का असर तेल आयात की लागत और कंपनियों की वित्तीय जरूरतों पर पड़ता है।

हालांकि, RBI ने इस व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराए जाने वाले डॉलर की कुल मात्रा या हर लेनदेन की सीमा के बारे में जानकारी नहीं दी है।

विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव की सीमा घटाई

केंद्रीय बैंक ने कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन के लिए सीमा को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दिया है। संशोधित सीमा मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर रुपये से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव पर भी लागू होगी।

इस कदम का उद्देश्य बड़े डेरिवेटिव सौदों का इस्तेमाल मुख्य रूप से सट्टेबाजी के बजाय आयात भुगतान और निर्यात से जुड़े वास्तविक जोखिमों को संभालने के लिए सुनिश्चित करना है।

20% विदेशी मुद्रा रिस्क रिजर्व का नियम

RBI ने 20 लाख डॉलर से अधिक के सांकेतिक मूल्य वाले पात्र रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के लिए विदेशी मुद्रा रिस्क रिजर्व (FERR) की व्यवस्था शुरू की है।

इसके तहत रजिस्टर्ड डीलरों को पात्र लेनदेन के रुपये मूल्य का 20% कैश रिजर्व के रूप में RBI के पास रखना होगा। यह नियम उन कॉन्ट्रैक्ट पर लागू होगा, जिनका इस्तेमाल चालू खाते से जुड़े जोखिमों की हेजिंग के लिए किया जाता है और जिनमें रुपये के मुकाबले विदेशी मुद्रा खरीदी जाती है।

हेजिंग के लिए डॉक्यूमेंटेशन होगा सख्त

नए नियमों के तहत रजिस्टर्ड डीलरों को विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट करने वाले ग्राहकों से एक वचन पत्र लेना होगा। इसमें ग्राहक को पुष्टि करनी होगी कि उसी जोखिम की हेजिंग किसी दूसरे डीलर के माध्यम से नहीं की गई है। इसका उद्देश्य एक ही जोखिम की दोहरी हेजिंग को रोकना है।

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