रुपये की गिरावट पर रघुराम राजन की बड़ी चेतावनी! सरकार को दी सलाह, कहा- डॉलर बचाने के चक्कर में न करें ये गलती
डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट से चिंता बढ़ रही है। इस बीच आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सरकार को बड़ी सलाह दी है। उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करने को लेकर चेतावनी दी है। आखिर रुपये को बचाने के लिए कौन-सी गलती नहीं करनी चाहिए? जानिए पूरी बात।

In Short
- साल 2026 में अब तक रुपया करीब 6 फीसदी कमजोर हुआ, एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बना।
- रघुराम राजन ने रुपये को बचाने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खर्च नहीं करने की सलाह दी।
- महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रुपये पर दबाव, करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने का खतरा।
भारतीय रुपया लगातार दबाव में है और डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत गिर रही है। दूसरी तरफ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि रुपये को गिरने से रोकने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक को क्या करना चाहिए? इसी मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अहम सलाह दी है।
रुपये की गिरावट पर क्या बोले रघुराम राजन?
रॉयटर्स ग्लोबल मार्केट्स फोरम में शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस के फाइनेंस प्रोफेसर रघुराम राजन ने कहा कि रुपये की गिरावट देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार को किसी एक एक्सचेंज रेट यानी डॉलर के मुकाबले रुपये की तय कीमत बनाए रखने के पीछे नहीं भागना चाहिए।
राजन के मुताबिक, सरकार को लंबी अवधि की स्थिति समझनी चाहिए। यह देखना जरूरी है कि मौजूदा गिरावट पहले के मुकाबले कितनी अलग है।
उन्होंने कहा कि रुपये का थोड़ा कमजोर होना हमेशा नुकसानदायक नहीं होता। इससे भारतीय सामान विदेशी बाजारों में सस्ता हो सकता है और एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को फायदा मिल सकता है।
विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करने से क्यों किया मना?
रघुराम राजन ने चेतावनी दी कि रुपये को एक तय स्तर पर बनाए रखने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खर्च करना सही नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि हाल ही में एफसीएनआर(बी) के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाने पर काफी पैसा खर्च किया गया है। ऐसे में उसी रकम को रुपये की कीमत बचाने में खर्च करना समझदारी नहीं होगी।
भारत ने इस साल विशेष उपायों से 140 अरब डॉलर से ज्यादा जुटाए थे। इनमें से करीब आधी रकम रुपये को सहारा देने और बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी कम करने के लिए इस्तेमाल की जा चुकी है।
डॉलर के मुकाबले कहां पहुंचा रुपया?
साल 2026 में अब तक रुपया करीब 6 फीसदी कमजोर हो चुका है। यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी रही है। मई में रुपया 96.96 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा था।
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 7 पैसे गिरकर 95.22 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। कारोबार की शुरुआत 95.17 पर हुई थी और एक समय यह सुधरकर 95.11 तक आया था।
सोमवार को रुपया 22 पैसे गिरकर 95.15 पर बंद हुआ था। पिछले तीन कारोबारी सेशन में इसमें कुल 77 पैसे की गिरावट आई है।
विदेशी निवेशक भी लगातार पैसा निकाल रहे हैं। साल 2026 की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 30 अरब डॉलर से ज्यादा की बिकवाली की है। सोमवार को एफआईआई ने 1,462.49 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
महंगा कच्चा तेल बढ़ा सकता है मुश्किलें
राजन ने चेतावनी दी कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो भारत का करेंट अकाउंट डेफिसिट यानी विदेशों से होने वाली कमाई और भुगतान के बीच का घाटा बढ़ सकता है।
सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हूती हमलों से सप्लाई प्रभावित होने की चिंता बढ़ी है। भारत बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर चाहिए।राजन ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध दोबारा भड़कने और खाड़ी देशों के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने पर तेल आयात करने वाले देशों की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।
इसके अलावा पिछले साल भारतीय सामान पर लगे अमेरिकी टैरिफ, महंगाई, आयात पर निर्भरता और विदेशी पूंजी पर निर्भरता भी रुपये पर दबाव डाल रही है।आरबीआई बाजार में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव रोक सकता है, लेकिन रुपये की लंबी अवधि की मजबूती कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई, एक्सपोर्ट और विदेशी निवेश पर निर्भर करेगी।