Independence Day 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद किया ‘Fragile Five’, जानिए कौन थे ये पांच देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने संबोधन में भारत की आर्थिक यात्रा का जिक्र करते हुए ‘Fragile Five’ का उल्लेख किया। जानिए आखिर Fragile Five क्या था, इसमें कौन-कौन से पांच देश शामिल थे और भारत कैसे इस आर्थिक स्थिति से बाहर निकला।

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In Short

  • पीएम मोदी ने लाल किले से भारत के Fragile Five से बाहर निकलने की यात्रा का जिक्र किया
  • Fragile Five में भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की शामिल थे
  • जानिए किन आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की

By Gaurav Kumar:

Fragile Five Countries: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से भारत की आर्थिक यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय भारत को दुनिया की ‘Fragile Five’ अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने बड़ी तस्वीर बदली है और आज देश दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

लाल किले से प्रधानमंत्री ने क्यों याद किया फ्रजाइल फाइव

लाल किले से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया ने कभी भारत की अर्थव्यवस्था को ‘फ्रजाइल फाइव’ में डाल दिया था, लेकिन लोगों के प्रयासों से पिछले 12 वर्षों में भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौर की आर्थिक स्थिति पर भी निशाना साधा।

पिछले साल भारत ने जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान हासिल किया। अब भारत से आगे अमेरिका, चीन और जर्मनी हैं।

आखिर क्या था ये ‘फ्रजाइल फाइव’?

‘फ्रजाइल फाइव’ शब्द 2013 में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली ने इस्तेमाल किया था। इसका मतलब उन पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं से था, जिन्हें बाहरी वित्तीय झटकों के प्रति ज्यादा कमजोर माना गया था।

इस समूह में भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की शामिल थे।

उस वक्त भारत के सामने थीं ये बड़ी चुनौतियां

भारत को इस समूह में ऐसे समय शामिल किया गया था, जब देश की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही थी। इनमें ज्यादा महंगाई, बढ़ता चालू खाता घाटा, रुपये में गिरावट और विदेशी पूंजी पर ज्यादा निर्भरता शामिल थी।

इस स्थिति के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से बड़े पैमाने पर किए जा रहे बॉन्ड खरीद कार्यक्रम यानी Quantitative Easing को धीरे-धीरे वापस लेने की संभावना भी एक बड़ा कारण बनी। अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका के चलते विदेशी निवेशकों ने उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालना शुरू किया।

5.1 फीसदी चालू खाता घाटे ने बढ़ाई चिंता

इसका असर भारत पर भी पड़ा। 2012 में भारत का चालू खाता घाटा GDP के 5.1 फीसदी तक पहुंच गया था। इसका मतलब था कि भारत जितना निर्यात से कमाता था, उससे ज्यादा पैसा आयात पर खर्च कर रहा था।

इससे भारत की वित्तीय झटकों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ गई। इसके अलावा कुछ ही महीनों में रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले करीब 12 फीसदी गिर गई।

कैसे निकला भारत फ्रजाइल फाइव से बाहर

साल 2014 में भारत इस समूह से बाहर निकल गया। इस दौरान देश के बाहरी वित्तीय संतुलन में सुधार हुआ और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ। IMF ने भी कहा था कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने सबसे तेज मैक्रोइकोनॉमिक सुधार किया।

फ्रजाइल फाइव से निकलने के लिए उठाए गए थे ये कदम

इस बदलाव का श्रेय कई विशेषज्ञों ने उस समय के RBI गवर्नर रघुराम राजन को दिया। सरकार ने चालू खाता घाटे को कम करने के लिए सोने के आयात पर रोक लगाने और निर्यात को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए।

 

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