देश में और महंगा हो सकता है पेट्रोल और डीजल! प्रति लीटर इतने रुपये की हो सकती है बढ़ोतरी
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI भी 94 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखा। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

Petrol-Diesel Prices: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर लगातार पड़ रहा है। बुधवार को एशियाई बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर मिसाइल हमले किए जाने और अमेरिका द्वारा ईरान की ओर जा रहे एक तेल टैंकर पर हमला किए जाने के बाद बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इस तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI भी 94 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखा। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं और महंगे
रेटिंग एजेंसी CRISIL का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हो सकती है।
एजेंसी के मुताबिक अब तक तेल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है और आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल करीब 2.5 रुपये प्रति लीटर तक और महंगे हो सकते हैं।
तेल कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर घरेलू तेल कंपनियों की लागत पर पड़ता है। अगर कंपनियां बढ़ी हुई लागत को खुद वहन नहीं करतीं, तो इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर डाला जा सकता है।
एक्सपर्ट का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में हालात और बिगड़ते हैं, तो तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
और बढ़ सकती है महंगाई
पेट्रोल और डीजल महंगे होने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजों, सब्जियों, दूध और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी असर पड़ता है। ऐसे में आने वाले दिनों में आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।