BT India@100: मौजूदा आर्थिक मॉडल से न ग्रोथ न नौकरियां? पी चिदंबरम ने उठाए बड़े सवाल
भारत के मौजूदा आर्थिक मॉडल को लेकर पी चिदंबरम ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ तेज ग्रोथ का दावा काफी नहीं है, अगर उससे रोजगार और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बन रहा। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई और सेमीकंडक्टर निवेश के नतीजों का भी मूल्यांकन करने की जरूरत बताई।

भारत की मौजूदा आर्थिक दिशा को लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा आर्थिक मॉडल देश को उस स्तर की ग्रोथ, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं दे पाएगा जिसकी जरूरत करोड़ों युवाओं की उम्मीदों को पूरा करने के लिए है।
चिदंबरम ने कहा कि किसी भी मजबूत राजनीतिक नेतृत्व के साथ गहरी आर्थिक समझ भी जरूरी होती है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि आर्थिक फैसलों के लिए विशेषज्ञता बेहद जरूरी है।
मौजूदा मॉडल पर क्यों उठाए सवाल
चिदंबरम ने कहा कि वर्तमान आर्थिक मॉडल जमीन की स्थिति के गहरे आकलन और आर्थिक विशेषज्ञता पर आधारित नहीं दिखता। उनके मुताबिक, सिर्फ यह कहना काफी नहीं है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में है।
उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि क्या इस ग्रोथ से नौकरियां पैदा हो रही हैं और क्या अच्छी गुणवत्ता वाला इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है।
Make in India और PLI पर भी साधा निशाना
जब उनसे Make in India, आत्मनिर्भर भारत और PLI जैसी पहलों के बारे में पूछा गया तो चिदंबरम ने कहा कि इनके बावजूद मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी है।
उन्होंने दावा किया कि मैन्युफैक्चरिंग अभी भी जीडीपी के करीब 13.5 से 14 फीसदी के आसपास अटकी हुई है।
सेमीकंडक्टर निवेश पर उठाया सवाल
चिदंबरम ने सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर में लगने वाले प्लांट्स को बड़ी मात्रा में सरकारी सहायता दी जा रही है।
उनका कहना था कि अगर किसी परियोजना में 80 से 85 फीसदी तक सब्सिडी सार्वजनिक धन से आ रही है तो इसे पूरी तरह निजी निवेश की सफलता के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बड़े आर्थिक विजन की जरूरत
चिदंबरम ने कहा कि भारत को एक बड़े और साफ आर्थिक विजन की जरूरत है। उन्होंने 1991 के आर्थिक सुधारों और बाद के वर्षों में अपनाई गई नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश को ऐसी दिशा चाहिए जो ग्रोथ के साथ रोजगार और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी दे सके।
उनके मुताबिक, अगर मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी लंबे समय से लगभग उसी स्तर पर बनी हुई है तो मौजूदा पहलों के नतीजों का गंभीर मूल्यांकन जरूरी है।