भारत में 8% से भी कम लोगों के पास है पासपोर्ट, विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान
पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर देशभर में नई बहस छिड़ गई है। इस बीच विदेश मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि देश में 8 फीसदी से भी कम लोगों के पास पासपोर्ट है। ऐसे में सवाल उठता है कि नागरिकता कैसे तय होती है और पासपोर्ट की कानूनी अहमियत क्या है। पढ़ें पूरी खबर।

In Short
- विदेश मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत में 8 फीसदी से भी कम लोगों के पास पासपोर्ट है।
- पासपोर्ट विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला सरकारी दस्तावेज है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं।
पासपोर्ट को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। देश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक बयान देते हुए कहा कि भारत में 8 फीसदी से भी कम लोगों के पास पासपोर्ट है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण मानने को लेकर बहस हो रही थी।
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तय प्रक्रिया के बाद जारी होता है पासपोर्ट
विदेश मंत्रालय ने बताया कि पासपोर्ट सरकार की ओर से जारी किया जाने वाला एक दस्तावेज है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए किया जाता है।
रणधीर जायसवाल ने बताया कि पासपोर्ट जारी करने से पहले आवेदन करने वाले व्यक्ति की पहचान और जरूरी जानकारी की जांच की जाती है। भारत में पासपोर्ट बनाने और जारी करने की प्रक्रिया पासपोर्ट अधिनियम 1967 और पासपोर्ट नियम 1980 के तहत चलती है। इन्हीं नियमों के अनुसार लोगों को पासपोर्ट दिया जाता है।
पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं
विदेश मंत्रालय ने पिछले दिनों कहा था कि जिन मामलों में किसी व्यक्ति की नागरिकता का फैसला किया जाना हो, वहां केवल पासपोर्ट को निर्णायक दस्तावेज नहीं माना जा सकता। कोर्ट के एक फैसले के बाद मंत्रालय की इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई थी।
मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, देश की कुल आबादी में आठ फीसदी से भी कम लोगों के पास पासपोर्ट है। ऐसे में पासपोर्ट रखने या नहीं रखने को नागरिकता तय करने का अकेला आधार नहीं माना जा सकता।
कैसे मिलती है भारतीय नागरिकता?
भारत में नागरिकता देने से जुड़े नियम नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत तय किए गए हैं। इस अधिनियम के अनुसार किसी व्यक्ति को पांच तरीकों से भारत की नागरिकता मिल सकती है।
पहला तरीका जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने का है। दूसरा तरीका वंश के आधार पर है, जिसमें माता-पिता की नागरिकता को आधार बनाया जाता है। तीसरा तरीका पंजीकरण के जरिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का है।
चौथा तरीका प्राकृतिककरण यानी नेचुरलाइजेशन के जरिए नागरिकता हासिल करना है। इसके अलावा, जब कोई नया क्षेत्र भारत में शामिल होता है तो उस क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी नियमों के तहत भारतीय नागरिकता मिल सकती है। इसे किसी क्षेत्र के भारत में शामिल होने के आधार पर मिलने वाली नागरिकता कहा जाता है।