2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’; ₹2000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर MDR का विरोध- व्यापारी ढकेंगे QR कोड

दिल्ली और देशभर के व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि 15 अक्टूबर 2026 से ₹2000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने का फैसला वापस लिया जाए।

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By BT बाज़ार डेस्क:

दिल्ली और देशभर के व्यापारियों और उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि 15 अक्टूबर 2026 से ₹2000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने का फैसला वापस लिया जाए।

इंडिया टुडे के पत्रकार आशुतोष मिश्रा के रिपोर्ट के मुताबिक CTI का कहना है कि इस फैसले को लेकर देशभर के दुकानदारों और व्यापारियों में काफी गुस्सा और निराशा है।

2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाएंगे व्यापारी

CTI ने दिल्ली और देशभर के दुकानदारों और व्यापारियों से अपील की है कि वे 2 अक्टूबर को ‘No UPI Day’ मनाएं। इस दिन व्यापारी अपने UPI QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढककर विरोध जताएंगे। साथ ही, ग्राहकों से सिर्फ कैश में भुगतान लेने की बात कही गई है।

CTI महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने कहा, "हम डिजिटल इंडिया के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कम मार्जिन पर काम करने वाले रिटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर पर यह अतिरिक्त लागत व्यापार को महंगा कर देगी।"

6 करोड़ दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ेगा असर?

CTI उपाध्यक्ष राहुल अदलखा और सचिव कुंज नाकरा ने कहा कि सरकार के इस फैसले से देश के करीब 6 करोड़ दुकानदारों, व्यापारियों और उद्यमियों में भारी निराशा है। उनका कहना है कि इस फैसले से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने आशंका जताई है कि अगर 15 अक्टूबर से ₹2000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर MDR शुल्क लगाया जाता है, तो देश में एक बार फिर कैश लेनदेन बढ़ सकता है।

उनका कहना है कि दिल्ली समेत देशभर के दुकानदारों, व्यापारियों और MSME सेक्टर ने UPI को पूरी तरह अपना लिया है। लेकिन अगर व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ पड़ता है, तो वे दोबारा नकद लेनदेन की तरफ लौट सकते हैं। CTI के मुताबिक, इससे UPI पेमेंट में 50% तक की गिरावट आ सकती है।

वित्त मंत्री ने MDR को लेकर क्या कहा?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि UPI पर MDR चार्ज सरकार ने नहीं लगाया है, बल्कि NPCI ने लगाया है। NPCI यह चार्ज बैंकों और पेमेंट कंपनियों की तरफ से दी जाने वाली सर्विस के बदले ले रही है। यह पैसा सरकार को नहीं मिलेगा।

वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ₹2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR दुकानदारों को देना है, ग्राहकों को नहीं। उन्होंने कहा कि दुकानदार अभी भी कुछ क्रेडिट और डेबिट कार्ड के ट्रांजेक्शन पर MDR देते हैं, लेकिन इसका भुगतान ग्राहकों को नहीं करना पड़ता।

FY2025-26 में UPI ने बनाया नया रिकॉर्ड

CTI ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में UPI ने नया रिकॉर्ड बनाया।

  • कुल लेनदेन: 24,162 करोड़ ट्रांजेक्शन
  • कुल लेनदेन की वैल्यू: लगभग ₹314 लाख करोड़
  • डिजिटल भुगतान में हिस्सेदारी: देश के कुल डिजिटल लेनदेन में UPI की हिस्सेदारी लगभग 84% रही

इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश में डिजिटल पेमेंट के लिए UPI का इस्तेमाल बड़े स्तर पर हो रहा है।

व्यापारियों को मिला ₹198 लाख करोड़ का भुगतान

CTI के मुताबिक, कुल ₹314 लाख करोड़ के UPI लेनदेन में से व्यापारियों यानी Person-to-Merchant (P2M) को करीब ₹198 लाख करोड़ का भुगतान प्राप्त हुआ। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात ₹2000 से अधिक के लेनदेन को लेकर है।

संख्या में सिर्फ 4%, लेकिन वैल्यू में 66%

CTI के अनुसार, ₹2000 से अधिक के लेनदेन कुल UPI ट्रांजेक्शन की संख्या का सिर्फ 4% थे। लेकिन वैल्यू के हिसाब से यही 4% लेनदेन करीब ₹131 लाख करोड़ के थे। यह राशि व्यापारियों को मिले कुल UPI भुगतान की वैल्यू का लगभग दो-तिहाई यानी 66% है।यानी संख्या में बड़े UPI भुगतान कम हैं, लेकिन व्यापार के लिहाज से इनका हिस्सा काफी बड़ा है।

₹3000 के भुगतान पर ₹12 और ₹50,000 पर ₹200 का चार्ज

CTI ने MDR को लेकर व्यापारियों पर पड़ने वाले संभावित अतिरिक्त बोझ को भी बताया है। संगठन के मुताबिक, ₹3000 के भुगतान पर ₹12 और ₹50,000 के भुगतान पर ₹200 का चार्ज दुकानदार को देना होगा।

बड़ी रकम वाले भुगतान पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय है। CTI का कहना है कि कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों के लिए यह अतिरिक्त लागत काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।

UPI पेमेंट में 50% तक गिरावट का अंदेशा

CTI का अनुमान है कि MDR लागू होने के बाद ₹2000 से अधिक के UPI भुगतान में 50% तक की गिरावट आ सकती है।

संगठन के मुताबिक, ग्राहक और दुकानदार बड़े भुगतान के लिए दोबारा नकद लेनदेन की ओर जा सकते हैं। इससे डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने और पारदर्शी अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर असर पड़ने की आशंका है।

CTI ने सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की

CTI ने सरकार से आग्रह किया है कि छोटे व्यापारियों, रोजमर्रा के बाजार और अर्थव्यवस्था के हित में ₹2000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR लगाने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए।

संगठन की मांग है कि UPI को पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क रखा जाए, ताकि व्यापारी और ग्राहक बिना अतिरिक्त लागत के डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल जारी रख सकें।

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