रूसी क्रूड से दूरी बनाना आसान नहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती

अमेरिका की ओर से रूसी ऊर्जा खरीद पर दबाव के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए तेल खरीद के फैसले लेगा। रूस से अचानक तेल खरीद बंद करने से सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है, इसलिए भारत व्यावहारिक रास्ता अपना रहा है।

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निर्मला सीतारमण ने कहा, भारत अचानक रूसी तेल खरीदना बंद नहीं कर सकता
निर्मला सीतारमण ने कहा, भारत अचानक रूसी तेल खरीदना बंद नहीं कर सकता

In Short

  • निर्मला सीतारमण ने कहा भारत अचानक रूसी तेल खरीद बंद नहीं कर सकता।
  • रूस से तेल हटाने पर सीमित सप्लाई के कारण कीमतें बढ़ने की आशंका है।
  • अगस्त में भारत का रूसी क्रूड आयात 16.5% घटा।

By Shakshi:

भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद अचानक बंद नहीं कर सकता क्योंकि इसका असर वैश्विक तेल कीमतों और देश की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत के लिए सबसे जरूरी है कि देश को पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल मिलता रहे और लोगों की ऊर्जा जरूरतें पूरी हों।

अमेरिका की ओर से रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर सख्त कदम उठाने की बात के बीच सीतारमण ने कहा कि भारत अपनी जरूरत के हिसाब से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से तेल खरीदता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत के लिए उपलब्धता और आर्थिक व्यवहारिकता सबसे महत्वपूर्ण है।

रूस से तेल हटाने पर बढ़ सकती हैं कीमतें

निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है और दूसरे स्रोतों की ओर जाता है, तो उपलब्ध तेल का बाजार सीमित हो जाएगा। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है।

उन्होंने बताया कि भारत की रिफाइनरियां खास तरह के कच्चे तेल के लिए तैयार हैं। भारतीय रिफाइनरियां मुख्य रूप से मीडियम डेंसिटी और ज्यादा सल्फर वाले क्रूड को प्रोसेस करने में सक्षम हैं। ऐसे में ऐसा तेल खरीदना जो भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त नहीं है, आर्थिक रूप से सही फैसला नहीं होगा।

सीतारमण ने कहा कि भारत को अपने नागरिकों की जरूरतों और देश के हित को सबसे ऊपर रखना होगा। ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन फैसले व्यावहारिक आधार पर लेने होंगे।

रूसी तेल आयात में आई कमी

इस बीच, भारत ने रूसी कच्चे तेल के आयात में कमी की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में रूस से भारत का तेल आयात जुलाई की तुलना में 16.5 फीसदी घटकर करीब 21 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया।

वहीं, पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति में बढ़ोतरी हुई है। व्यापार आंकड़ों के अनुसार, अबू धाबी की नेशनल ऑयल कंपनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर से तेल सप्लाई की, जिससे भारत के आयात में मदद मिली।

भारत का कुल कच्चे तेल का आयात भी अगस्त में 8.8 फीसदी घटकर 44.4 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। सितंबर में रूसी तेल आयात कम होकर करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान लगाया गया है।

सरकार का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस समेत दुनिया के कई देशों से तेल खरीदने की रणनीति जारी रखेगा।

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