नेपाल में बाढ़ से बिजली उत्पादन को झटका...भारत से बिजली खरीदने की तैयारी
नेपाल में बाढ़ और भारी बारिश ने बिजली उत्पादन को बड़ा झटका दिया है। कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स प्रभावित होने के बाद अब नेपाल भारत से बिजली खरीदने की तैयारी में है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि नेपाल फिलहाल भारत को बिजली बेच भी रहा है। आखिर इसकी वजह क्या है?

In Short
- नेपाल में बाढ़ और भारी बारिश से 640 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।
- नेपाल दिसंबर 2026 से मई 2027 के बीच भारत से 1,100 मेगावाट तक बिजली खरीदने की तैयारी कर रहा है।
- नेपाल फिलहाल भारत को 600 से 700 मेगावाट बिजली निर्यात कर रहा है, लेकिन सूखे मौसम में उसे आयात की जरूरत पड़ेगी।
नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ और भारी बारिश ने बिजली उत्पादन को बड़ा झटका दिया है। कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचने के बाद अब नेपाल आने वाले महीनों में भारत से बिजली खरीदने की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नेपाल सूखे मौसम के दौरान भारत से 1,100 मेगावाट तक बिजली आयात कर सकता है।
दिसंबर से मई तक भारत से बिजली खरीदने की तैयारी
नेपाल दिसंबर 2026 से मई 2027 तक भारत से बिजली आयात करने की योजना बना रहा है। दरअसल, इन महीनों में नदियों में पानी कम होने के कारण नेपाल के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से बिजली उत्पादन घट जाता है।
नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) के प्रवक्ता राजन ढकाल ने बताया कि नवंबर के बाद भारत से कुछ बिजली आयात करने की जरूरत होगी। हालांकि, बिजली की सबसे ज्यादा मांग फरवरी से मई के बीच रहने की उम्मीद है।
बाढ़ और बारिश से 640 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित
नेपाल के पास फिलहाल करीब 3,740 मेगावाट की चालू बिजली उत्पादन क्षमता है। लेकिन हाल की प्राकृतिक आपदाओं ने इसका बड़ा हिस्सा प्रभावित किया है।
26 अगस्त को भोटेकोशी इलाके में अचानक आई बाढ़ से कई हाइड्रोपावर प्लांट्स और उनसे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा। इससे करीब 450 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई।
इसके बाद 24 से 27 सितंबर के बीच भारी मानसूनी बारिश ने 190 मेगावाट के कालीगंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचाया। राजन ढकाल के मुताबिक, इन दोनों घटनाओं से नेपाल की कुल 640 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।
भारत को बिजली बेच भी रहा है नेपाल
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ नेपाल भारत से बिजली खरीदने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ फिलहाल भारत को बिजली बेच भी रहा है।
राजन ढकाल के मुताबिक, नेपाल इस समय भारत को करीब 600 से 700 मेगावाट बिजली निर्यात कर रहा है।
दरअसल, नेपाल में बिजली उत्पादन काफी हद तक नदियों के पानी पर निर्भर करता है। मानसून के दौरान नदियों में पानी ज्यादा होने से बिजली उत्पादन बढ़ जाता है। ऐसे में नेपाल अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली भारत को बेचता है।
लेकिन सूखे मौसम में नदियों का जलस्तर घटने से उत्पादन कम हो जाता है और नेपाल को भारत से बिजली खरीदनी पड़ती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने नेपाल को अपने बिजली बाजार में ज्यादा पहुंच भी दी है।
फरवरी तक कुछ प्रोजेक्ट्स फिर शुरू होने की उम्मीद
हालांकि, नेपाल को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में बिजली उत्पादन की स्थिति सुधर सकती है।
नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के मुताबिक, भोटेकोशी में बाढ़ से प्रभावित कुछ हाइड्रोपावर प्लांट्स की मरम्मत के बाद फरवरी तक करीब 160 मेगावाट क्षमता बहाल हो सकती है।
वहीं, 190 मेगावाट का कालीगंडकी प्रोजेक्ट भी अगले कुछ महीनों में दोबारा बिजली उत्पादन शुरू कर सकता है।
अगर ये प्रोजेक्ट्स समय पर शुरू हो जाते हैं, तो फरवरी से मई के बीच बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में नेपाल को राहत मिल सकती है।