Byju’s की पैरेंट कंपनी के एसेट्स पर लगी रोक, 16 करोड़ की डील को लेकर क्यों उठे सवाल?

Byju’s की पैरेंट कंपनी की संपत्तियों की बिक्री अब विवादों में घिर गई है। नीलामी प्रक्रिया और एसेट्स के मालिकाना हक को लेकर उठे सवालों के बीच NCLT ने बड़ा आदेश दिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि ट्रिब्यूनल को हस्तक्षेप करना पड़ा और आगे क्या होगा जानिए पूरी कहानी।

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In Short

  • Byju’s की पैरेंट कंपनी TLPL की विवादित एसेट नीलामी पर NCLT ने लगाई रोक
  • करीब 150 करोड़ रुपये की संपत्तियां सिर्फ 16 करोड़ रुपये में बेचने के आरोप
  • NCLT ने खरीदार को एसेट्स सुरक्षित रखने और पूरी इन्वेंट्री जमा करने का आदेश दिया

By Gungun Mishra:

एडटेक कंपनी Byju’s की पैरेंट कंपनी Think and Learn Private Limited (TLPL) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बेंगलुरु बेंच के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने कंपनी की इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के दौरान बेची गई संपत्तियों पर रोक लगा दी है। यह फैसला उस विवादित नीलामी को लेकर आया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि करीब 150 करोड़ रुपये की संपत्तियां सिर्फ 16 करोड़ रुपये में बेच दी गईं।

NCLT ने Resolution Professional (RP) शैलेंद्र अजमेरा और सफल बोलीदाता Comprint Tech Solutions को निर्देश दिया है कि नीलामी में बेची गई सभी संपत्तियों को मौजूदा स्थिति में सुरक्षित रखा जाए। यह आदेश अगली सुनवाई तक लागू रहेगा, जो 21 सितंबर को होगी।

खरीदी गई संपत्तियों की देनी होगी जानकारी

ट्रिब्यूनल ने Comprint Tech Solutions को एक हफ्ते के भीतर खरीदी गई संपत्तियों की पूरी जानकारी जमा करने को कहा है। इसमें इन्वेंट्री की सूची, उनकी मौजूदा जगह और फिजिकल फोटो शामिल होंगे।

NCLT ने कहा कि कई नीलामी की गई वस्तुओं के मालिकाना हक को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। ट्रिब्यूनल ने माना कि इस बात की जांच जरूरी है कि कहीं किसी तीसरे पक्ष की संपत्ति भी इस नीलामी में शामिल तो नहीं कर दी गई।

RP ने नीलामी को बताया सही

वहीं, Resolution Professional ने नीलामी प्रक्रिया का बचाव किया है। RP का कहना है कि बेची गई सभी संपत्तियां कानूनी रूप से TLPL की थीं और इस बिक्री को Committee of Creditors (CoC) की मंजूरी भी मिली थी।

RP के मुताबिक, नीलामी को चुनौती देने वाले पक्ष अभी तक इन संपत्तियों पर अपना कानूनी अधिकार साबित नहीं कर पाए हैं। उनका कहना है कि ये संपत्तियां कॉरपोरेट देनदार की संपत्ति का हिस्सा थीं और इन्हें इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के तहत बेचा जा सकता था।

Image Credit: ITG

चार दिन में नीलामी पूरी करने पर भी विवाद

इस मामले में Byju’s ग्रुप की कंपनी K3 Education Private Limited ने भी नीलामी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कंपनी का आरोप है कि RP ने ऐसी संपत्तियां भी बेच दीं, जो उसकी खुद की रिजॉल्यूशन प्रक्रिया के लिए जरूरी थीं।

K3 Education ने यह भी कहा कि दिसंबर 2024 के इन्वेंट्री रिकॉर्ड, जो संपत्तियों के मालिकाना हक को साबित करने में मदद कर सकते थे, उन्हें ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं किया गया।

वहीं, TLPL के निलंबित निदेशकों की ओर से भी नीलामी की समयसीमा पर सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि सिर्फ चार दिन में संपत्तियों की बिक्री करने के फैसले के पीछे स्पष्ट कारण होना चाहिए था।

अब 21 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

इस पूरे विवाद का मुख्य मुद्दा सिर्फ संपत्तियों की कीमत नहीं है, बल्कि यह भी है कि RP के पास सभी संपत्तियों को बेचने का अधिकार था या नहीं।

फिलहाल NCLT ने न तो नीलामी को रद्द किया है और न ही किसी पक्ष के दावे पर अंतिम फैसला दिया है। ट्रिब्यूनल ने सिर्फ इतना निर्देश दिया है कि खरीदी गई संपत्तियों को सुरक्षित रखा जाए और उनमें कोई बदलाव या बिक्री न की जाए।

21 सितंबर की सुनवाई में NCLT संपत्तियों के मालिकाना हक, वैल्यूएशन और नीलामी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर आगे विचार करेगा। यह विवाद Byju’s और उसकी पैरेंट कंपनी के लंबे समय से चल रहे इंसॉल्वेंसी मामले में एक और नया मोड़ लेकर आया है।

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