Most Powerful Women: सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग से नहीं बनेगा भारत ग्लोबल लीडर, महिला दिग्गजों ने बताई वजह

भारत को दुनिया की बड़ी औद्योगिक ताकत बनाने के लिए क्या सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग काफी है? बिजनेस टुडे के Most Powerful Women 2026 कार्यक्रम में EV और डिफेंस सेक्टर की महिला दिग्गजों ने भारत की अगली ग्रोथ को लेकर अहम बातें कहीं। जानिए भारतीय कंपनियों के सामने कौन सी बड़ी चुनौतियां हैं।

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In Short

  • भारत को ग्लोबल लीडर बनाने के लिए सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग नहीं, स्वदेशी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन भी जरूरी।
  • डिफेंस सेक्टर की महिला दिग्गजों ने R&D में निवेश और मजबूत घरेलू सप्लाई चेन पर दिया जोर।
  • इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट में करीब 50% इलेक्ट्रिफिकेशन, कम खर्च बन रहा ग्राहकों के लिए बड़ा आकर्षण।

By Gungun Mishra:

भारत को औद्योगिक विकास की अगली ऊंचाई पर पहुंचने के लिए सिर्फ सामान बनाने तक सीमित नहीं रहना होगा। अब देश की कंपनियों को अपनी टेक्नोलॉजी डिजाइन और विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा। मुंबई में आयोजित बिजनेस टुडे के Most Powerful Women 2026 कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक व्हीकल और डिफेंस सेक्टर की महिला दिग्गजों ने भारत के औद्योगिक भविष्य को लेकर कई अहम बातें कहीं।

भारत को खुद की टेक्नोलॉजी विकसित करनी होगी

कार्यक्रम में 'Building What India Needs' विषय पर हुई चर्चा में महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी की एमडी और सीईओ सुमन मिश्रा, जेन टेक्नोलॉजीज की होल-टाइम डायरेक्टर शिल्पा चौधरी और डेटा पैटर्न्स की होल-टाइम डायरेक्टर रेखा मूर्ति रंगराजन शामिल हुईं।

तीनों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बनाने के लिए स्वदेशी इनोवेशन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और मजबूत सप्लाई चेन पर निवेश बढ़ाना होगा।

डिफेंस सेक्टर में स्वदेशी डिजाइन क्यों जरूरी?

जेन टेक्नोलॉजीज की शिल्पा चौधरी ने कहा कि जब तक भारतीय कंपनियां अपने प्रोडक्ट की डिजाइन पर मालिकाना हक नहीं रखेंगी, तब तक भारत को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाना मुश्किल होगा।

उन्होंने बताया कि ड्रोन वॉरफेयर और आधुनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही हैं। उनकी कंपनी ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 2018 में ही एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी में निवेश शुरू कर दिया था।

चौधरी ने इंडस्ट्री और यूनिवर्सिटी के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी बताई। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और एम्बेडेड सिस्टम जैसे क्षेत्रों में इंजीनियरिंग स्किल बढ़ाने पर जोर दिया।

सिर्फ भारत नहीं, पूरी दुनिया के लिए बनें प्रोडक्ट

डेटा पैटर्न्स की रेखा मूर्ति रंगराजन ने कहा कि भारतीय कंपनियों को केवल घरेलू बाजार की जरूरतों के हिसाब से प्रोडक्ट नहीं बनाने चाहिए। उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने वाले प्रोडक्ट विकसित करना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कंपनियों को R&D पर लगातार निवेश करना होगा। डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स में टेक्नोलॉजी तेजी से पुरानी होती है। ऐसे में बदलती जरूरतों के मुताबिक सिस्टम तैयार करना और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत करना जरूरी है।

इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की बढ़ रही मांग

महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी की सुमन मिश्रा ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे आर्थिक फायदे को अहम वजह बताया।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर सेगमेंट में इलेक्ट्रिफिकेशन करीब 50 फीसदी तक पहुंच चुका है। कम परिचालन खर्च के कारण ग्राहक पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ रहे हैं।

मिश्रा के मुताबिक, सरकारी सब्सिडी खत्म होने के बाद भी EV कंपनियों का कारोबार आर्थिक रूप से टिकाऊ होना चाहिए। इसके लिए लागत नियंत्रण, बड़े पैमाने पर उत्पादन, बेहतर प्रोडक्ट और R&D में निवेश जरूरी है।

भारत की अगली ग्रोथ का क्या होगा आधार?

चर्चा में महिला दिग्गजों ने साफ किया कि भारत की आत्मनिर्भरता सिर्फ देश में ज्यादा उत्पादन करने से तय नहीं होगी। असली चुनौती अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करने और दुनिया के बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की है।

इसके लिए भारतीय कंपनियों को इनोवेशन, नई स्किल, रिसर्च और मजबूत सप्लाई चेन पर लगातार ध्यान देना होगा। यही भारत के औद्योगिक विकास के अगले चरण की बुनियाद बन सकता है।

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