Most Powerful Women: ओलंपिक क्वालिफायर में मिली निराशा से लेकर टीम की ताकत तक, भारतीय महिला खिलाड़ियों ने खोले राज
Business Today के Most Powerful Women 2026 कार्यक्रम में हॉकी खिलाड़ी नवनीत कौर, सलीमा टेटे और कबड्डी खिलाड़ी पुष्पा ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की। मैदान पर मिली हार से लेकर परिवार के सहयोग तक, खिलाड़ियों ने कई दिलचस्प खुलासे किए। जानिए उनके सफर की खास बातें।

In Short
- नवनीत कौर ने बताया कि ओलंपिक क्वालिफायर में मिली निराशा के बाद कैसे दोबारा हासिल किया आत्मविश्वास।
- सलीमा टेटे ने छोटे गांव से भारतीय हॉकी टीम तक पहुंचने के सफर और परिवार के सहयोग पर की बात।
- कबड्डी खिलाड़ी पुष्पा ने पिता के योगदान को बताया अहम, सलीमा ने महिला हॉकी लीग के लिए मांगा समर्थन।
Business Today के Most Powerful Women कार्यक्रम में भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी नवनीत कौर और सलीमा टेटे के साथ कबड्डी खिलाड़ी पुष्पा ने अपने खेल करियर से जुड़े अनुभव साझा किए। तीनों खिलाड़ियों ने बताया कि खेल में सफलता हासिल करने के लिए खुद पर भरोसा, परिवार का साथ, अनुशासन और टीमवर्क कितना जरूरी है।
हार के बाद खुद को कैसे संभालती हैं नवनीत कौर?
भारतीय हॉकी खिलाड़ी नवनीत कौर ने अपने करियर के एक मुश्किल दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि ओलंपिक क्वालिफायर के दौरान शूटआउट में मौका चूकने के बाद उनका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ था।
इस निराशा से बाहर निकलने के लिए उन्होंने एक खास तरीका अपनाया। नवनीत आईने के सामने खड़े होकर खुद से सकारात्मक बातें करती थीं। इससे उन्हें दोबारा खुद पर भरोसा करने और आगे की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार होने में मदद मिली।
छोटे गांव से भारतीय टीम तक पहुंचीं सलीमा टेटे
भारतीय हॉकी खिलाड़ी सलीमा टेटे ने बताया कि उनका बचपन एक छोटे से गांव में बीता, जहां मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाएं भी सीमित थीं। हालांकि, उनके पिता ने हमेशा उन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।
सलीमा के मुताबिक, अपनी मेहनत के दम पर देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि गलतियों के बारे में लगातार सोचने के बजाय उनका ध्यान बेहतर प्रदर्शन करने और साथी खिलाड़ियों की मदद करने पर रहता है।
पेरिस ओलंपिक में जगह नहीं मिलने के बाद कैसे संभली टीम?
सलीमा टेटे ने पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाने के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम के सफर पर भी बात की।
उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों के बीच बेहतर बातचीत, एक-दूसरे का सहयोग और कोचिंग स्टाफ के साथ मजबूत तालमेल से टीम को दोबारा अपने लक्ष्य पर ध्यान लगाने में मदद मिली। इसके बाद टीम ने एशियन गेम्स के लक्ष्य की दिशा में काम करना शुरू किया।
महिला हॉकी लीग के लिए स्पॉन्सर्स से की अपील
सलीमा ने हॉकी इंडिया लीग की अहमियत भी बताई। उनके मुताबिक, इस लीग से खिलाड़ियों को ऐसे अनुभव और अवसर मिलते हैं, जो राष्ट्रीय कैंप के दौरान हमेशा नहीं मिल पाते।
फंडिंग की चुनौतियों के कारण चार टीमों वाली महिला लीग के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में सलीमा ने स्पॉन्सर्स और समर्थकों से महिला हॉकी को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग करने की अपील की।
कबड्डी खिलाड़ी पुष्पा की सफलता में पिता का अहम योगदान
कबड्डी खिलाड़ी पुष्पा ने बताया कि उनके खेल करियर की शुरुआत पिता के प्रोत्साहन से हुई। उनके पिता ने न सिर्फ उन्हें खेल अपनाने के लिए प्रेरित किया, बल्कि स्पोर्ट्स हॉस्टल तक पहुंचने में भी मदद की।
तीनों खिलाड़ियों ने अपने अनुभवों के जरिए बताया कि खेल में धैर्य, अनुशासन और टीमवर्क बेहद जरूरी हैं। किसी एक हार या असफलता पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने के बजाय लगातार मेहनत करते रहना चाहिए। उनके अनुभव यह भी दिखाते हैं कि महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में परिवार और खेल से जुड़े संस्थानों का सहयोग कितनी अहम भूमिका निभाता है।