Tata Sons विवाद पर JPMorgan CEO जेमी डिमोन की टिप्पणी, विदेशी निवेशकों के भरोसे पर जताई चिंता
टाटा ग्रुप में Tata Trusts और Tata Sons के बोर्ड के बीच चल रहे गवर्नेंस विवाद पर JPMorgan Chase के CEO जेमी डिमोन ने चिंता जताई है। उन्होंने एन. चंद्रशेखरन की तारीफ करते हुए कहा कि ऐसे विवादों का असर विदेशी निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।

JPMorgan Chase के सीईओ जेमी डिमोन ने टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन की तारीफ करते हुए टाटा ग्रुप में चल रहे गवर्नेंस विवाद पर चिंता जताई है। ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक जेमी डिमोन ने ईटी को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह टकराव विदेशी निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।
डिमोन ने चंद्रशेखरन को उनके लोकप्रिय नाम ‘चंद्रा’ से संबोधित करते हुए कहा, “मैं चंद्रा का बहुत सम्मान करता हूं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं कभी नहीं चाहूंगा कि वह हमारे साथ न रहें।” डिमोन ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि टाटा ट्रस्ट्स और बोर्ड को भी चंद्रशेखरन के बारे में ऐसा ही महसूस करना चाहिए।
Tata Trusts और बोर्ड के बीच टकराव
JPMorgan Chase के सीईओ जेमी डिमोन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब Tata Sons का बोर्ड अपने कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर Tata Trusts के साथ आमने-सामने है। Tata Trusts के पास Tata Sons की 66% हिस्सेदारी है। इस विवाद ने निवेशकों और नीति-निर्माताओं का ध्यान खींचा है और समूह के गवर्नेंस मानकों पर सवाल उठ रहे हैं।
पिछले हफ्ते Tata Sons के बोर्ड ने Tata Trusts की ओर से रखे गए दो प्रस्तावों को खारिज कर दिया। इनमें Tata Sons को सार्वजनिक कंपनी बनाने यानी IPO लाने और एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल था। प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म Institutional Investor Advisory Services India (IiAS) ने बोर्ड के इस कदम को “बोर्ड की बगावत” (mutiny of the board) बताया।
विदेशी निवेश पर असर की चिंता
जेमी डिमोन ने कहा कि दुनिया भर से निवेश आकर्षित करने के लिए कंपनियों में ट्रांसपेरेंसी और लगातार एक जैसे कॉरपोरेट गवर्नेंस मानक जरूरी हैं। ब्लूमबर्ग ने ईटी के हवाले से बताया कि अगर वह सरकार में होते, तो इस तरह के विवाद को लेकर चिंतित होते, क्योंकि इससे विदेशी निवेश पर असर पड़ सकता है।
JPMorgan Chase के लंबे समय से CEO रहे डिमोन ने सार्वजनिक पारदर्शिता को पॉजिटिव बताया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला जटिल है और उन्हें इसके सभी विवरणों की पूरी जानकारी नहीं है। इसलिए उनकी टिप्पणी मुख्य रूप से Tata Sons के भीतर चल रहे विवाद के निवेश और विदेशी पूंजी पर संभावित असर को लेकर थी।