ईरान-यूक्रेन युद्ध से तेल बाजार में बढ़ी चिंता, ट्रेडर्स ने लंबी अवधि के दांव से बनाई दूरी - डिटेल्स

ईरान और यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक, तेल ट्रेडर्स अब लंबे समय के सौदों से दूरी बना रहे हैं और छोटे समय के निवेश पर ध्यान दे रहे हैं। बढ़ते जोखिमों ने बाजार की रणनीति और लिक्विडिटी को प्रभावित किया है।

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In Short

  • ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और यूक्रेन युद्ध के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ी, ट्रेडर्स लंबे समय के दांव से बच रहे हैं।
  • मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक, कारोबारी अब 3 से 6 महीने की अवधि वाले सौदों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
  • आपूर्ति में रुकावट के चलते डीजल और अन्य तेल उत्पादों की कीमतों पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है।

By BT बाज़ार डेस्क:

दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, तेल कारोबारी अब लंबे समय के निवेश और ट्रेडिंग दांव लगाने से बच रहे हैं, क्योंकि ईरान और यूक्रेन में जारी युद्धों के कारण आने वाले महीनों को लेकर तस्वीर साफ नहीं है।

छोटे समय के सौदों पर ज्यादा फोकस

मॉर्गन स्टेनली के ग्लोबल ऑयल ट्रेडिंग के को-हेड ब्रेंडन रॉस के मुताबिक, तेल ट्रेडर्स अब लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स की जगह कम अवधि वाले सौदों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कारोबारी अब जोखिम को लेकर ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं और अपनी रणनीति को सीमित दायरे में रख रहे हैं। वे हर तरह के डेरिवेटिव्स में निवेश करने के बजाय चुनिंदा इंस्ट्रूमेंट्स पर फोकस कर रहे हैं।

युद्धों से बढ़ी तेल बाजार में हलचल

ईरान और यूक्रेन में चल रहे संघर्षों ने तेल बाजार को काफी प्रभावित किया है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में उतार-चढ़ाव और यूक्रेन की ओर से रूस के ऊर्जा ढांचे पर हमलों ने बाजार में अस्थिरता बढ़ाई है।

इस साल ब्रेंट क्रूड की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कच्चे तेल की कीमत करीब 60 डॉलर प्रति बैरल से लेकर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है।

लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट्स में घट रही लिक्विडिटी

ब्रेंडन रॉस के अनुसार, ट्रेडर्स अब अपने पोर्टफोलियो में मौजूद जोखिमों को कम कर रहे हैं और उन दांवों को हटा रहे हैं, जिनमें उन्हें ज्यादा अनिश्चितता नजर आ रही है।

इसका असर लंबे समय वाले कॉन्ट्रैक्ट्स पर पड़ रहा है। बाजार में लंबी अवधि के सौदों के लिए लिक्विडिटी यानी खरीद-बिक्री की उपलब्धता कम हो रही है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

उन्होंने कहा कि ज्यादातर कारोबारी अब अगले तीन से छह महीने के आधार पर ही बाजार में ट्रेड कर रहे हैं। लंबी अवधि में कम भागीदारी के कारण लिक्विडिटी और कमजोर हो रही है।

तेल उत्पादों पर ज्यादा असर

युद्ध और आपूर्ति से जुड़ी परेशानियों का सबसे ज्यादा असर तेल उत्पादों पर देखने को मिला है। उत्पादन और व्यापार में रुकावट के कारण वैश्विक सप्लाई पर दबाव बढ़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में रिटेल डीजल की कीमतें पिछले हफ्ते रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, जबकि यूरोप में भी ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है।

मॉर्गन स्टेनली के मुताबिक, भौतिक बाजार और वित्तीय बाजार के बीच सबसे ज्यादा अंतर तेल उत्पादों में देखने को मिला है।

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