रिकॉर्ड लो के बेहद करीब रुपया, 97 का स्तर टूटते ही 98.50 तक गिरने का खतरा; RBI की बढ़ी चिंता

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। RBI की लगातार कोशिशों के बावजूद करेंसी पर दबाव बना हुआ है। महंगा कच्चा तेल, बढ़ती वैश्विक यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मुश्किल बढ़ाई है। इस बीच RBI के विदेशी मुद्रा भंडार में भी बड़ी गिरावट आई है।

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By BT बाज़ार डेस्क:

भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है। ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय करेंसी मई में दर्ज 96.97 प्रति डॉलर के निचले स्तर से सिर्फ 0.2% दूर है। ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और बढ़ती वैश्विक यील्ड के बीच निवेशकों की चिंता रुपये पर भारी पड़ रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ब्याज दर बढ़ाने से लेकर डॉलर की बिक्री और विदेशी जमा आकर्षित करने तक कई कदम उठाए हैं, लेकिन रुपये की कमजोरी थम नहीं रही।

चार हफ्तों में 51 अरब डॉलर घटा रिजर्व

RBI के हस्तक्षेप के बीच 2 अक्टूबर तक के चार हफ्तों में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 51 अरब डॉलर घट गया। बीते शुक्रवार को रिजर्व लगातार चौथे हफ्ते गिरकर 734 अरब डॉलर रह गया, जबकि 4 सितंबर वाले सप्ताह में यह 785 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था।

Mecklai Financial Services के डिप्टी सीईओ रितेश भंसाली ने कहा कि RBI के रिजर्व में तेज गिरावट चिंता की बात है और बाजार इस पर नजर रख रहा है। उनके मुताबिक फिलहाल केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप ही रुपये को मौजूदा स्तर पर थामे हुए है।

RBI ने बढ़ाई दर, फिर भी नहीं थमा रुपया

RBI ने बुधवार को करीब चार साल में पहली बार ब्याज दर बढ़ाई और अपना रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ किया। इसके बावजूद कारोबारियों ने इसे रुपये पर दबाव डालने वाली ताकतों के मुकाबले अपर्याप्त माना।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त है। उनके मुताबिक इससे करीब 11 महीने का आयात कवर होता है और बाहरी कर्ज 94.4% है। उन्होंने यह भी कहा कि रुपया कमजोर मूल्यांकित हो सकता है और छोटी अवधि में बाजार तर्कहीन व्यवहार कर सकते हैं।

तेल, डॉलर और विदेशी बिकवाली बनी चुनौती

इस साल रुपया 7% से ज्यादा कमजोर हो चुका है और एशिया में इसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। भारत की तेल आयात पर निर्भरता के कारण मध्य पूर्व का संघर्ष भी दबाव बढ़ा रहा है। विदेशी निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयरों से करीब 30 अरब डॉलर निकाले हैं।

DBS Bank के ट्रेजरी प्रमुख आशीष वैद्य के मुताबिक RBI के सामने स्थिति मुश्किल है और लंबे समय तक भू-राजनीतिक संघर्ष व ऊंची तेल कीमतें रहने पर रुपये को संभालने की गुंजाइश लगातार कम होगी।

HDFC Bank ने वित्त वर्ष के दूसरे हिस्से में डॉलर-रुपये की जोड़ी के लिए 96-98 की रेंज का अनुमान दिया है। Mecklai के मुताबिक 97 का स्तर टूटने पर रुपया 98.50 तक जा सकता है।

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